Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 29, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Rust Disease: धूप न निकलने के कारण सरसों की फसल में हो रही ये बीमारी, कृषि विशेषज्ञों ने जारी की एडवाइजरी

    Updated: Mon, 29 Jan 2024 05:27 PM (IST)

    एक महीने से जिले में लगातार पड़ रही ठंड का असर अब फसलों पर भी देखने को मिल रहा है। धूप न निकलने के कारण सरसों की फसल में सफेद रतुआ (Rust Disease) का ख ...और पढ़ें

    धूप न निकलने के कारण सरसों की फसल में हो रहा रतुआ रोग।
    धूप न निकलने के कारण सरसों की फसल में हो रहा रतुआ रोग।

    जागरण संवाददाता, फतेहाबाद। पिछले एक महीने से जिले में लगातार ठंड पड़ रही है। इसका असर अब फसलों पर देखने को मिल रहा है। सबसे अधिक असर सरसों की फसल पर देखने को मिल रहा है। इस समय अनेक जगह सरसों की फसल में सफेद रतुआ की बीमारी देखी जा सकती है। सफेद रतुआ सरसों में फंगस के कारण होने वाली बीमारी है। इसके लक्षण आरंभ में पत्तों पर नजर आते हैं। पत्तों के निचले भाग में सफेद धब्बे से दिखाई देते हैं और सफेद पाउडर सा बन जाता है।

    पौधों पर दिखाई देते ये लक्षण

    इस प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते उपाय कर नुकसान से बच सकते हैं। लगातार धुंध और कोहरे के मौसम का बने रहना और पौधों को सूर्य की समुचित रोशनी का न मिलना प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को बाधित करता है, जिससे फफूंद जनित बीमारियों के आक्रमण की संभावनाएं रहती हैं। इसमें पौधों के पत्तियों और तनों पर सफेद या पीले क्रीम रंग के कील से नजर आते हैं जो कि पत्तों से शुरू होकर तने से फूलों तक फैल जाते हैं।

    परिणामस्वरूप तने, फूल और फलियां बेढंग के आकार के और टेढ़े मेढे हो जाते हैं। जिसका फसल की पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और पैदावार घट जाती है। यह ज्यादातर पछेती बीजी गई फसलों में होता है तथा अगेती बिजाई गई फसलों में इस बीमारी का असर बहुत कम देखने को मिलता है।

    इस कीटनाशक का कर सकते है प्रयोग

    कृषि विकास अधिकारी डॉ. अंकित ढिल्लो ने बताया कि सरसों में सफेद रतुआ के नियंत्रण के लिए 600 ग्राम मैनकोजेब (डाइथेन या एंडोफिल एम-45) को 250-300 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ की दर से 15 दिन के अंतर पर 3-4 बार छिड़काव कर दे।

    खबरें और भी

    ये भी पढ़ें: लॉरेंस बिश्नोई गैंग के शूटर राजन की निर्मम हत्या, पहले गोली मारी फिर... हाथ-पैर बांधकर शव को फेंका; बंबीहा गैंग ने ली जिम्मेदारी

    फफूंदनाशक का छिड़काव

    कृषि मौसम विभाग द्वारा जारी मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर ही करें। इसके साथ-साथ किसान छिड़काव करने से पहले ये सुनिश्चित अवश्य करें की जिस स्प्रेयर से छिड़काव करना चाहते हैं वो किसी खरपतवारनाशी के लिए प्रयोग ना किया हुआ हो। अगर कहीं तना गलन की समस्या हो तो 0.1 प्रतिशत कार्बांजिम का छिड़काव करें।

    धूप न निकलने के कारण बढ़ रही बीमारी

    कृषि एवं कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजेश सिहाग ने कहा कि पिछले कई दिनों से अच्छी धूप न निकलने के कारण यह बीमारी अधिक देखने को मिल सकती है। अगर किसान समय पर उपचार करेंगे तो इस पर अंकुश लगाया जा सकता है। किसान अपनी फसलों का समय-समय पर निरीक्षण करते रहे।

    ये भी पढ़ें: Haryana: लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के पास नहीं दमदार उम्मीदवार, नए चेहरे की तलाश में जुटी पार्टी