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    सावधान! ऑनलाइन शॉपिंग के फेंके गए बॉक्स से डेटा चुरा रहे साइबर ठग, फतेहाबाद पुलिस ने जारी की चेतावनी

    Updated: Sun, 19 Jul 2026 12:50 PM (IST)

    साइबर अपराधी अब ऑनलाइन शॉपिंग के फेंके गए पार्सल बॉक्स से नाम, पता और मोबाइल नंबर जैसी निजी जानकारी चुराकर ठगी कर रहे हैं। ...और पढ़ें

    ऑनलाइन शॉपिंग के फेंके गए बॉक्स से डेटा चुरा रहे साइबर ठग (फोटो: जागरण)

    ऑनलाइन शॉपिंग के फेंके गए बॉक्स से डेटा चुरा रहे साइबर ठग (फोटो: जागरण)

    HighLights

    1. फेंके गए पार्सल बॉक्स से निजी जानकारी चुरा रहे ठग।

    2. कैशबैक, गिफ्ट वाउचर के नाम पर भेज रहे फर्जी लिंक।

    3. शिपिंग लेबल नष्ट करें, संदिग्ध कॉल से रहें सतर्क।

    जागरण संवाददाता, फतेहाबाद। ऑनलाइन शापिंग के बढ़ते चलन के साथ साइबर ठगी के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। अब साइबर अपराधियों ने लोगों की निजी जानकारी जुटाने का नया तरीका खोज लिया है। घरों से निकलने वाले इस्तेमाल किए गए पार्सल बाक्स उनके लिए आसान माध्यम बन रहे हैं।

    पार्सल पर लगे शिपिंग लेबल से नाम, मोबाइल नंबर, पता और अन्य व्यक्तिगत जानकारी हासिल कर ठग लोगों को फोन कर रहे हैं और उन्हें कैशबैक, गिफ्ट वाउचर या विशेष आफर का झांसा देकर ठगी का शिकार बना रहे हैं। इस नए तरीके को देखते हुए फतेहाबाद पुलिस ने लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी है।

    जानकारी के अनुसार साइबर अपराधी कूड़ेदान और कबाड़ से आनलाइन शापिंग कंपनियों के पार्सल बाक्स एकत्र करते हैं। इन बाक्सों पर लगे शिपिंग लेबल में उपभोक्ता का नाम, मोबाइल नंबर, पता और कई बार ई-मेल जैसी जानकारी भी दर्ज होती है। इसी जानकारी के आधार पर ठग स्वयं को ई-कामर्स कंपनी या डिलीवरी एजेंसी का कर्मचारी बताकर उपभोक्ताओं से संपर्क करते हैं और विश्वास जीतने की कोशिश करते हैं।

    कैशबैक का लालच, लिंक पर क्लिक करते ही जाल

    साइबर अपराधी फोन या संदेश के माध्यम से कैशबैक, लॉयल्टी रिवार्ड, गिफ्ट वाउचर या विशेष ऑफर का झांसा देते हैं। इसके बाद वे फर्जी लिंक भेजते हैं या बैंक खाते, डेबिट कार्ड, सीवीवी और ओटीपी जैसी गोपनीय जानकारी मांगते हैं।

    खबरें और भी

    कई मामलों में लोगों से अज्ञात मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करवा ली जाती है, जिससे मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल होकर बैंक खाते तक पहुंच बनाई जा सकती है और रकम निकाली जा सकती है।

    आनलाइन शॉपिंग के बाद पार्सल बॉक्स को सीधे कूड़े में फेंकने के बजाय उस पर लगा शिपिंग लेबल पूरी तरह फाड़ देना या नष्ट करना चाहिए। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचना, बैंक संबंधी जानकारी साझा न करना और किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में एप डाउनलोड नहीं करना भी जरूरी है।

    यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे तुरंत नजदीकी पुलिस थाना, साइबर सेल या राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

    एसपी निकिता खट्टर ने कहा कि साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में आनलाइन शापिंग के बाद पार्सल बाक्स पर लगी व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित तरीके से नष्ट करना बेहद जरूरी है। पुलिस साइबर अपराधों पर लगातार नजर रखे हुए है और ऐसे मामलों में शामिल आरोपितों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।