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    इम्पीरिया ग्रुप पर ED का बड़ा एक्शन, गुरुग्राम-दिल्ली में 8 ठिकानों पर छापेमारी

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 08:22 PM (GMT+05:30)

    प्रवर्तन निदेशालय ने इम्पीरिया ग्रुप के गुरुग्राम और दिल्ली स्थित परिसरों पर धन शोधन मामले में तलाशी अभियान चलाया। कंपनी पर खरीदारों को 15 साल से फ्लै ...और पढ़ें

    प्रवर्तन निदेशालय ने इम्पीरिया ग्रुप के गुरुग्राम और दिल्ली स्थित परिसरों पर धन शोधन मामले में तलाशी अभियान चलाया।

    प्रवर्तन निदेशालय ने इम्पीरिया ग्रुप के गुरुग्राम और दिल्ली स्थित परिसरों पर धन शोधन मामले में तलाशी अभियान चलाया। 

    HighLights

    1. ईडी ने इम्पीरिया ग्रुप के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।

    2. खरीदारों से 63 करोड़ रुपये लेकर फ्लैट नहीं दिए।

    3. 50.50 लाख नकद और तीन लग्जरी वाहन जब्त किए।

    जागरण संवाददाता, नया गुरुग्राम। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत इम्पीरिया ग्रुप के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए गुरुग्राम और दिल्ली से जुड़े आठ आवासीय एवं व्यावसायिक परिसरों पर तलाशी और सर्वे अभियान चलाया।

    यह कार्रवाई 29 जुलाई को इम्पीरिया विशफील्ड प्राइवेट लिमिटेड, इम्पीरिया स्ट्रक्चर्स लिमिटेड, उनके प्रमोटर निदेशकों तथा वर्तमान दिवाला समाधान पेशेवर (रेजोल्यूशन प्रोफेशनल) से जुड़े ठिकानों पर की गई।

    ईडी ने इम्पीरिया स्ट्रक्चर्स लिमिटेड, इम्पीरिया विशफील्ड प्राइवेट लिमिटेड तथा उनके प्रमोटर निदेशकों हरप्रीत सिंह बत्रा, ब्रजिंदर सिंह बत्रा, प्रदीप शर्मा, अविनाश सेतिया सहित अन्य के खिलाफ प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआइआर) दर्ज की है। जांच हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में दर्ज कई एफआइआर के आधार पर शुरू की गई।

    आरोप है कि कंपनी और उसके प्रमोटरों ने खरीदारों को फ्लैट और व्यावसायिक इकाइयां देने का झांसा देकर करोड़ों रुपये जुटाए, परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं कीं, तय मासिक रिटर्न और किराए का भुगतान नहीं किया तथा खरीदारों के धन का अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया। ईडी को इन परियोजनाओं के अनेक घर खरीदारों से भी शिकायतें प्राप्त हुई हैं।

    एल्वेडोर परियोजना के खरीदारों का पैसा दूसरी जगह लगाया

    ईडी की जांच में सामने आया कि गुरुग्राम के सेक्टर-37 स्थित इम्पीरिया एल्वेडोर परियोजना के खरीदारों से जुटाई गई राशि को कंपनी ने अपनी दूसरी देनदारियां चुकाने तथा अपनी संबद्ध कंपनियों और संबंधित व्यक्तियों को ऋण एवं अग्रिम देने में खर्च किया। जांच के अनुसार कंपनी ने वर्ष 2011 से इस परियोजना में बुकिंग शुरू की थी, लेकिन करीब 15 वर्ष बीत जाने के बाद भी खरीदारों को फ्लैटों का कब्जा नहीं दिया गया। वर्तमान में यह परियोजना दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत चल रही है।

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    एक ही यूनिट कई लोगों को बेचने का आरोप

    ईडी के अनुसार इम्पीरिया स्ट्रक्चर्स लिमिटेड ने गुरुग्राम के माइंडस्पेस और ग्रेटर नोएडा के इम्पीरिया बिजनेस पार्क प्रोजेक्ट में भी खरीदारों से अग्रिम बुकिंग ली। उन्हें समय पर कब्जा देने, मासिक सुनिश्चित रिटर्न और बाद में किराए की आय का वादा किया गया, लेकिन कंपनी अपने वादे पूरे नहीं कर सकी।

    जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में एक ही फ्लैट या व्यावसायिक इकाई की बुकिंग कई खरीदारों से की गई। खरीदारों के साथ बिल्डर-खरीदार अनुबंध (बीबीए) करने के बजाय केवल समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कराए गए। इनमें न तो यूनिट की स्पष्ट पहचान दर्ज थी और न ही कब्जा देने की कोई समय-सीमा तय की गई थी।

    63 करोड़ रुपये जुटाने का खुलासा

    ईडी के अनुसार अब तक की जांच में सामने आया है कि केवल एल्वेडोर परियोजना के खरीदारों से ही कंपनी ने करीब 63 करोड़ रुपये एकत्र किए। वहीं माइंडस्पेस और इम्पीरिया बिजनेस पार्क परियोजनाओं में कथित अपराध से अर्जित धनराशि का आकलन अभी किया जा रहा है।

    दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड, नकदी और लग्जरी वाहन जब्त

    तलाशी अभियान के दौरान ईडी ने कई डिजिटल उपकरण, प्रमोटरों और निदेशकों से जुड़े संपत्ति दस्तावेज, आडिट किए गए वित्तीय अभिलेख, लेखा साफ्टवेयर (टैली) का डाटा, खरीदारों के धन के दुरुपयोग से जुड़े रिकार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। इसके अलावा 50.50 लाख रुपये नकद और तीन लग्जरी वाहन भी जब्त किए गए हैं।

    ईडी के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।