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    गुरुग्राम में उद्योगों को कचरा प्रबंधन शुल्क में मिलेगी छूट, शहरी उपभोक्ताओं को मुफ्त पानी

    Updated: Thu, 05 Mar 2026 01:29 AM (IST)

    गुरुग्राम में उद्योगों को कचरा प्रबंधन शुल्क में छूट मिलेगी यदि वे परिसर में वैज्ञानिक निस्तारण करते हैं। अब यह शुल्क केवल कवर्ड एरिया पर लगेगा। ...और पढ़ें

    सेक्टर-34 का गुरुग्राम निगम कार्यालय जागरण आर्काइव

    सेक्टर-34 का गुरुग्राम निगम कार्यालय जागरण आर्काइव

    जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। गुरुग्राम शहर के औद्योगिक इकाइयों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने कचरा प्रबंधन शुल्क की व्यवस्था में बदलाव किया है। जो फैक्ट्रियां अपने परिसर में ही कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करेंगी, उनसे अब कोई कूड़ा शुल्क नहीं लिया जाएगा।

    पहले पूरे प्लाट एरिया के आधार पर 0.50 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से शुल्क तय था, लेकिन नई व्यवस्था में यह दर केवल कवर्ड एरिया पर लागू होगी। औद्योगिक हब के रूप में पहचान बना चुके साइबर सिटी से प्रतिदिन लगभग 400 टन औद्योगिक कचरा निकलता है।

    बजट में घोषित इस नीति से बंधवाड़ी लैंडफिल साइट पर पड़ने वाला दबाव कम होने की संभावना जताई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

    हर महीने मिलेगा दस किलोलीटर पानी मुफ्त

    बजट में शहरी उपभोक्ताओं को राहत देते हुए 500 गज तक के रिहायशी मकानों को हर महीने दस किलोलीटर पेयजल मुफ्त देने का प्रविधान किया गया है। अब तक एक रुपये प्रति किलोलीटर की दर से बिल वसूला जाता था।

    अनुमान है कि इस निर्णय से शहर के तीन लाख से अधिक मकान मालिकों को लाभ मिलेगा। हालांकि, योजना का फायदा लेने के लिए पानी का मीटर लगवाना अनिवार्य किया गया है।

    डेढ़ लाख से ज्यादा अवैध कनेक्शन

    नगर निगम क्षेत्र में इस समय लगभग 1.91 लाख वैध जल कनेक्शन दर्ज हैं, जबकि डेढ़ लाख से ज्यादा अवैध कनेक्शन चिन्हित किए जा चुके हैं। निगम हर साल करीब 140 से 145 करोड़ रुपये के बिल जारी करता है, लेकिन वसूली लगभग 50 से 60 करोड़ रुपये तक ही सीमित रह जाती है। सरकार को उम्मीद है कि अनिवार्य मीटरिंग से राजस्व में बढ़ोतरी होगी और पानी की चोरी पर नियंत्रण लगेगा।

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    पार्षदों को अब टेंडर के लिए नहीं करना होगा इंतजार

    शहरी निकायों के जनप्रतिनिधियों को भी पहली बार विशेष आपातकालीन निधि देने की घोषणा की गई है। नगर निगम के पार्षदों को सालाना छह लाख रुपये, नगर परिषद के पार्षदों को तीन लाख रुपये और नगर पालिका के पार्षदों को डेढ़ लाख रुपये तक की राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

    इस फंड का उपयोग वार्ड स्तर पर सीवर लाइन टूटने, पेयजल पाइपलाइन फटने, जलभराव या अन्य आकस्मिक समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए किया जा सकेगा।

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    अधिकारियों का दावा है कि इस व्यवस्था से टेंडर प्रक्रिया में होने वाली देरी से राहत मिलेगी और स्थानीय स्तर पर जनता की समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण संभव हो सकेगा।