अंधेरे में डूबे घर और फैक्ट्रियां, पानी के लिए तरसे लोग... हड़ताल के बीच गुरुग्राम में 40 घंटे से गुल बत्ती
Haryana Electricity Strike: बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण गुरुग्राम में व्यापक बिजली संकट गहरा गया है, जिससे लाखों लोग ...और पढ़ें

गुरुग्राम में रातभर छाया रहा अंधेरा। जागरण
HighLights
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से गुरुग्राम में गहराया संकट।
लाखों लोग रातभर अंधेरे और पानी की किल्लत से परेशान।
प्रशासन की विफलता से औद्योगिक उत्पादन भी हुआ ठप।
जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। Haryana Electricity News: बिजली वितरण व्यवस्था निजी हाथों में सौंपने के विरोध में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल (Haryana Electricity Strike ने साइबर सिटी की व्यवस्था को बेपटरी कर दिया है।
बुधवार रात 10 बजे के बाद से शहर के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने के बावजूद जिला प्रशासन और बिजली निगम लोगों को राहत देने में नाकाम दिखाई दिए। रातभर अंधेरे में रहने के साथ लोगों को पानी के संकट से भी जूझना पड़ा।
गुस्साए लोगों ने लगाया जाम
बताया कि हालात इतने बिगड़े कि गुस्साए लोगों ने दौलताबाद फ्लाईओवर पर काफी देर तक जाम लगाए रखा, लेकिन इसके बाद भी बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। सवाल यह है कि जब हड़ताल पहले से घोषित थी, तो प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की?
गुरुग्राम में बिजली कर्मियों की हड़ताल से करीब 40 घंटे तक बत्ती गुल रही। इस बीच घरों और फैक्ट्रियों में अंधेरा छाया रहा।

भीम नगर, दौलताबाद, बसई, गढ़ी हरसरू, दयानंद कालोनी, सेक्टर-9, हरि नगर, सेक्टर-10, आइडीसी, अशोक विहार, शिवाजी नगर, धनवापुर, सूर्या विहार, न्यू पालम विहार, खांडसा, न्यू कॉलोनी, गुड़गांव गांव, बजघेड़ा, भीमगढ़ खेड़ी, राजेंद्र पार्क और शीतला कालोनी समेत अनेक इलाकों में बिजली संकट से जनजीवन प्रभावित रहा।
पटौदी, फर्रुखनगर और जमालपुर क्षेत्र में भी लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। बिजली नहीं होने से घरों में पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई। सुबह बच्चों को स्कूल जाने के लिए तैयार करने से लेकर कामकाज पर निकलने तक, हर स्तर पर लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पानी नहीं मिलने के कारण कई बच्चे स्कूल तक नहीं जा सके।

फ्यूज व्यवस्था हटने से बढ़ी मुश्किल
बिजली आपूर्ति बाधित होने के पीछे फ्यूज व्यवस्था हटाए जाने को भी बड़ा कारण बताया जा रहा है। इससे आपूर्ति में खराबी आने पर उसे दुरुस्त करने की व्यवस्था प्रभावित हुई। कर्मचारियों की हड़ताल के बीच वैकल्पिक इंतजाम और त्वरित शिकायत निस्तारण की जिम्मेदारी प्रशासन और बिजली निगमों की थी, लेकिन उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिल सकी।
बिजली गुल होने के बाद लोगों के सामने अंधेरे के साथ पेयजल, घरेलू कामकाज और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हो गया। रातभर बिजली का इंतजार करते लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया।

उद्योगों पर दोहरी मार
बिजली संकट का असर औद्योगिक क्षेत्रों पर भी पड़ा। सेक्टर-37, बसई, कादीपुर, उद्योग विहार और बेगमपुर खटौला सहित कई औद्योगिक क्षेत्रों की हजारों इकाइयों में उत्पादन ठप हो गया। इससे उद्योगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और श्रमिकों का काम भी प्रभावित हुआ।
पीएफटीआइ के चेयरमैन दीपक मैनी ने कहा कि हड़ताल को देखते हुए प्रशासन को उद्यमियों के साथ पहले ही संवाद करना चाहिए था। यदि बिजली आपूर्ति सुचारु रखने की व्यवस्था संभव नहीं थी, तो उद्योगों को पहले से स्थिति स्पष्ट कर लगातार तीन दिन इकाइयां बंद रखने की सलाह दी जा सकती थी।
इससे उद्यमियों और श्रमिकों को अचानक पैदा हुए संकट से बचाया जा सकता था। उनके अनुसार, पूरे दिन मैनपावर बैठी रही। हड़ताल के बीच बिजली-पानी जैसी बुनियादी जरूरतों की व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी थी।

इसके बावजूद न आम लोगों को राहत मिली और न उद्योगों को समय रहते स्थिति की स्पष्ट जानकारी। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर संकट की आशंका के बावजूद प्रशासन ने ऐसी तैयारी क्यों नहीं की, जिससे लाखों लोगों को इस तरह परेशान न होना पड़ता।
