पानी की बर्बादी पर लगेगा फुलस्टॉप, सेंसर तकनीक से सुधरेगा गुरुग्राम का वाटर सिस्टम; 24 घंटे होगी निगरानी
जीएमडीए गुरुग्राम में 251 भूमिगत पानी की टंकियों को स्मार्ट सेंसर से जोड़ेगा, जिससे सेंट्रलाइज्ड इंटीग्रेटेड वाटर मैनेजमेंट सिस्टम के तहत 24 घंटे निगर ...और पढ़ें

बसई स्थित वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट। आर्काइव
HighLights
251 भूमिगत पानी की टंकियां होंगी स्मार्ट
लीकेज का तुरंत पता चलेगा, पानी की बर्बादी रुकेगी
शहर में समान और निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित होगी
संदीप रतन, गुरुग्राम। शहर की पेयजल व्यवस्था को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाने के लिए महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने काम शुरू कर दिया है। सेंट्रलाइज्ड इंटीग्रेटेड वाटर मैनेजमेंट सिस्टम (सीआइडब्ल्यूएमएस) फेज-दो के तहत शहर की 251 भूमिगत पानी के टैंक (यूजीटी) को स्मार्ट सेंसरों से जोड़ा जाएगा।
इसके बाद बसई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से लेकर विभिन्न सेक्टरों तक पानी की आपूर्ति, दबाव, जलस्तर और गुणवत्ता की निगरानी 24 घंटे एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) से की जाएगी। इससे जलापूर्ति अधिक पारदर्शी होगी और पानी की बर्बादी रोकने में मदद मिलेगी।
चार उपकरण जुटाएंगे हर पल का डेटा
परियोजना के तहत प्रत्येक यूजीटी पर इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फ्लो मीटर, फ्लो कंट्रोल वाल्व, प्रेशर ट्रांसमीटर और लेवल सेंसर लगाए जाएंगे। ये सभी उपकरण लगातार डेटा भेजेंगे, जिससे अधिकारियों को यह पता चलता रहेगा कि किस टंकी में कितना पानी है।
पाइपलाइन में कितना दबाव है और कितनी मात्रा में पानी आगे भेजा जा रहा है। किसी भी तरह की तकनीकी गड़बड़ी होने पर सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा।
251 भूमिगत जल टंकियां होंगी स्मार्ट
- 1300 मिमी व्यास की मुख्य पाइपलाइन होगी डिजिटल निगरानी में।
- 16 से अधिक सेक्टर होंगे परियोजना के दायरे में।
- 4 स्मार्ट उपकरण हर यूजीटी पर लगाए जाएंगे।
- 24×7 कंट्रोल रूम से होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग
लीकेज पकड़ने में मिलेगी बड़ी मदद
अब तक पाइपलाइन में लीकेज या पानी की बर्बादी का पता अक्सर शिकायत मिलने के बाद चलता था। नई प्रणाली में यदि किसी हिस्से में पानी का प्रवाह अचानक कम या अधिक होता है, दबाव घटता है या टंकी का जलस्तर असामान्य रूप से बदलता है तो सिस्टम तुरंत संकेत देगा।
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इससे संबंधित टीम मौके पर पहुंचकर तुरंत मरम्मत कर सकेगी। इससे नाॅन-रेवेन्यू वाॅटर यानी लीकेज, अनधिकृत उपयोग और अन्य कारणों से होने वाले जल नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।
हर सेक्टर को मिलेगा जरूरत के अनुसार पानी
स्मार्ट फ्लो कंट्रोल वाल्व के जरिए पानी के प्रवाह को जरूरत के अनुसार नियंत्रित किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में अधिक दबाव के कारण पानी व्यर्थ बहता है, वहां प्रवाह कम किया जाएगा, जबकि कम दबाव वाले इलाकों में पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे शहर में पानी की एक समान पेयजल आपूर्ति होगी।
पीने के पानी की होगी बचत
अधिकारियों का मानना है कि रियल टाइम माॅनिटरिंग, लीकेज की तुरंत पहचान और नियंत्रित जल वितरण से हर दिन बड़ी मात्रा में पानी की बर्बादी रोकी जा सकेगी। इससे जल शोधन संयंत्र से अंतिम उपभोक्ता तक पानी का पूरा हिसाब रखा जा सकेगा। प्रणाली का सबसे बड़ा उद्देश्य है।
सीआइडब्ल्यूएमएस के माध्यम से केवल जलापूर्ति ही नहीं, बल्कि पानी की गुणवत्ता की भी निगरानी की जाएगी। पानी की बर्बादी रुकेगी और शहर के हर कोने तक पेयजल की निर्बाध आपूर्ति भी हो सकेगी।
- पीसी मीणा, सीईओ जीएमडीए
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