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गुरुग्राम में बिना लाइसेंस ड्राइविंग की सजा, बीमा कंपनी बची; गाड़ी मालिक-ड्राइवर अपनी जेब से भरेंगे 21.30 लाख

By Mahaveer YadavEdited By: Kushagra Mishra
Published: Tue, 04 Aug 2026 04:49 PM (IST)

मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने बिना लाइसेंस चालक द्वारा किए गए हादसे में बीमा कंपनी को मुआवजा देने से मुक्त ...और पढ़ें

गाड़ी मालिक और ड्राइवर को देना होगा मुआवजा। फोटो: सांकेतिक

गाड़ी मालिक और ड्राइवर को देना होगा मुआवजा। फोटो: सांकेतिक

HighLights

  1. बिना वैध लाइसेंस चालक, बीमा कंपनी मुआवजा देने से मुक्त

  2. मालिक-ड्राइव को 21.30 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश

  3. एमएसीटी ने दीपक तिवारी मौत मामले में सुनाया अहम फैसला

महावीर यादव, बादशाहपुर। सड़क हादसे में 19 वर्षीय युवक की मौत के मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। दुर्घटना के समय कार ड्राइवर के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था।

इसलिए अधिकरण ने बीमा कंपनी को मुआवजे के भुगतान की जिम्मेदारी से मुक्त करते हुए वाहन मालिक और ड्राइवर को संयुक्त रूप से 21.30 लाख रुपये मुआवजा और 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया है।

अदालत ने माना कि दुर्घटना के समय कार ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस न होना बीमा पालिसी की शर्तों का उल्लंघन है, इसलिए बीमा कंपनी को क्षतिपूर्ति के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

मां को 20.42 लाख, बहनों को 44-44 हजार

पीठासीन अधिकारी नरेंद्र सूरा की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दुर्घटना में जान गंवाने वाले दीपक तिवारी की मां बृजबाला को 20.42 लाख रुपये तथा उसकी दोनों बहनों प्रिया तिवारी और मानशी को 44-44 हजार रुपये दिए जाएंगे।

बृजबाला मूल रूप से यूपी के कानपुर देहात के गांव पुलंदर की रहने वाली है। यह राशि वाहन मालिक हिमगिरि ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड और वाराणसी के थाना बनारस के गांव शिवदासपुर का रहने वाला ड्राइवर चंद्रशेखर को संयुक्त रूप से अदा करनी होगी।

13 मार्च 2024 को हुआ था हादसा

13 मार्च 2024 की शाम दीपक तिवारी मोटरसाइकिल से नौरंगपुर से रामपुरा की ओर जा रहा था। मित्तल फार्म हाउस के पास सामने से तेज रफ्तार और लापरवाही से आ रही कार ने उसकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी।

गंभीर रूप से घायल दीपक को पहले मेट अस्पताल और बाद में सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया। 17 मार्च 2024 को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

जांच के दौरान पुलिस ने ड्राइवर के विरुद्ध भादंसं की संबंधित धाराओं के साथ मोटर वाहन अधिनियम की धारा 3/181 भी जोड़ी। चार्जशीट में भी ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होने का उल्लेख किया गया। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने इसी आधार पर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त किए जाने की मांग की।

कोई सुबूत नहीं दे सका ड्राइवर 

अधिकरण ने रिकॉर्ड, पुलिस जांच और गवाहों के बयानों के बाद माना कि ड्राइवर बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चला रहा था। वाहन मालिक और ड्राइवर इस तथ्य का खंडन करने के लिए अदालत में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके।

ऐसे में अधिकरण ने इसे बीमा पालिसी की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन मानते हुए बीमा कंपनी को मुआवजे के भुगतान से मुक्त कर दिया और पूरी देनदारी वाहन मालिक व ड्राइवर पर डाल दी।

31 अगस्त को काॅन्सटेबल की गवाही

19 वर्षीय दीपक तिवारी की मौत से जुड़े सड़क हादसे के आपराधिक मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीदेव राय की अदालत में अभियोजन साक्ष्य के चरण में चल रही है।

6 जुलाई की सुनवाई में पुलिस गवाह हेड कांस्टेबल युधवीर सिंह का बयान दर्ज किया गया। वहीं, मुख्य गवाह प्रिया तिवारी अदालत में स्वास्थ्य कारणों से उपस्थित नहीं हो सकीं। उनके संबंध में जारी जमानती वारंट मेडिकल प्रमाण के साथ वापस अदालत में पेश किए गए।

अदालत ने प्रिया तिवारी के खिलाफ 5,000 रुपये के जमानती वारंट पुनः जारी करते हुए अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 तय की है। साथ ही शेष गवाहों को भी अगली तारीख पर तलब करने के आदेश दिए गए।

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