खून का सौदागर! झज्जर ब्लड बैंक में 19 लाख का घोटाला, तीन साल तक बिकता रहा दान का रक्त
झज्जर के सरकारी ब्लड बैंक में तीन साल तक दान किए गए रक्त की बिक्री और सरकारी फीस में करीब 19 लाख रुपये का गबन सामने आया है। ...और पढ़ें
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तीन साल तक बिकता रहा दान का खून। फोटो सोर्स- सोशल मीडिया।
HighLights
झज्जर ब्लड बैंक में 19 लाख रुपये का गबन उजागर
तीन साल तक दान किए रक्त का हुआ सौदा
स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस को एफआईआर के लिए लिखा
जागरण संवाददाता, झज्जर। लोग दूसरों की जान बचाने के लिए रक्तदान करते रहे, लेकिन झज्जर के बल्ड बैंक में उनके दिए गए खून का सौदा होता रहा। तीन साल तक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी आंखें बंद कर बैठे रहे। अब बल्ड बैक के कर्मचारी का चार्ज बदला तो मामले से पर्दा उठा। जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस को मामला दर्ज करने के लिए पत्र लिखा है।
वहीं, शहर पुलिस की तरफ से स्वास्थ्य विभाग से मामले का रिकॉर्ड भी मांगा है। ताकि जांच के बाद उसके आधार पर मामला दर्ज किया जा सके। सरकारी ब्लड बैंक में निजी अस्पतालों के मरीजों को उपलब्ध कराए जाने वाले रक्त के बदले वसूली गई सरकारी फीस में करीब तीन वर्षों तक बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है।
जांच में करीब 19 लाख 14 हजार 800 रुपये के गबन के आरोप सामने आए हैं। मामले के खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच कमेटी गठित कर संबंधित लेखाकार के पूरे कार्यकाल का विशेष आडिट कराने की सिफारिश की गई है।
तीन साल से चला आ रहा खेल
स्वास्थ्य विभाग की अब तक की जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में प्राप्त 10 लाख 97 हजार 700 रुपये में से केवल 82 हजार 500 रुपये ही सरकारी खाते में जमा कराए गए, जबकि 10 लाख 15 हजार 200 रुपये जमा नहीं हुए। वर्ष 2024-25 में प्राप्त 7 लाख 34 हजार 700 रुपये में से 2 लाख 37 हजार 600 रुपये जमा हुए और 4 लाख 97 हजार 100 रुपये की राशि का हिसाब नहीं मिला।
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2025-26 में प्राप्त 5 लाख 90 हजार 600 रुपये में से केवल 1 लाख 88 हजार 100 रुपये ही बैंक खाते में जमा कराए गए। जबकि एक अन्य खाते की जांच अभी जारी है। बताया जा रहा है कि निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को सरकारी ब्लड बैंक से रक्त उपलब्ध कराने के बदले निर्धारित सरकारी शुल्क लिया जाता था। यह राशि सरकारी खाते में जमा होनी थी, लेकिन आरोप है कि एनएचएम के लेखाकार अखिल ने पिछले तीन वर्षों में वसूली गई पूरी राशि बैंक में जमा नहीं कराई।
चार्ज बदलने के बाद उठा पर्दा
रिपोर्ट के अनुसार 6 मई 2025 को उप सिविल सर्जन (एड्स) ने ब्लड बैंक में राशि संग्रहण का कार्य अखिल से लेकर डाटा मैनेजर-कम-अकाउंटेंट राजीव को सौंपने के आदेश जारी किए थे।
आरोप है कि अखिल ने चार्ज देने में आनाकानी की और हटाए जाने के बाद भी मार्च 2026 तक राशि संग्रह करता रहा। वित्तीय वर्ष की क्लोजिंग के दौरान रिकॉर्ड और बैंक लेन-देन के मिलान में अनियमितताएं सामने आईं। तो बल्ड बैंक की तरफ से एक साल की राशि के लिए गड़बड़ी की जांच की मांग विभाग के अधिकारियों से की गई।
बैंक स्टेटमेंट से खुला तीन वर्षों का हिसाब
जांच कमेटी ने बैंक खातों की स्टेटमेंट और रसीद पुस्तकों का मिलान किया, जिसमें प्राप्त राशि और बैंक में जमा राशि के बीच बड़ा अंतर मिला। संदेह होने पर पिछले वर्षों के रिकॉर्ड भी खंगाले गए, जिसके बाद करीब 19 लाख रुपये से अधिक के कथित गबन का खुलासा हुआ। अखिल ने 16 सितंबर 2019 को एनएचएम में लेखाकार के रूप में कार्यभार संभाला था। अब जांच समिति ने उसके पूरे कार्यकाल का विशेष आडिट कराने की सिफारिश की है।
पुलिस को लिखा पत्र
कार्यवाहक सिविल सर्जन तीर्थ बागड़ी का कहना है कि जांच के बाद गड़बड़ी पाए जाने पर विभाग से पुलिस को मामला दर्ज करने के लिए पत्र लिख दिया है। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस की तरफ से की जाएगी।
पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग से इस संबंध में रिकॉर्ड देने के लिए कहा गया है। रिकॉर्ड आने के बाद उसकी जांच की जाएंगी और उसके आधार पर मामला दर्ज किया जाएगा। - सरिता, शहर थाना प्रभारी, झज्जर।