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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 23, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    रसोई में लगा महंगाई का तड़का! त्योहारी सीजन से पहले किराने के सामान में जबरदस्त उछाल, 20 प्रतिशत तक बढ़े दाम

    By Amit PopliEdited By: Rajat Mourya
    Updated: Sat, 23 Sep 2023 03:52 PM (IST)

    त्योहारी सीजन आने वाला है और एक बार फिर महंगाई ने लोगों की हालत पतली कर दी है। रसोई में एक बार फिर महंगाई का तड़का लग रहा है। त्योहारी सीजन से पहले कि ...और पढ़ें

    रसोई में लगा महंगाई का तड़का! त्योहारी सीजन से पहले किराने के सामान में जबरदस्त उछाल
    रसोई में लगा महंगाई का तड़का! त्योहारी सीजन से पहले किराने के सामान में जबरदस्त उछाल

    HighLights

    1. रसोई में एक बार फिर महंगाई का तड़का लग रहा है
    2. 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुके दाम, हर वर्ग के बजट पर पड़ रहा प्रतिकूल असर
    3. फसली सीजन के दौरान आई बारिश के कारण बढ़ी महंगाई

    झज्जर, जागरण संवाददाता। Haryana Dal And Rajma Rate सितंबर माह की आहट के साथ ही किराने के सामान में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। दाल सहित प्राय: वस्तुओं के दाम में 20 प्रतिशत से अधिक तक का उछाल है। जिससे हर वर्ग के घरेलू बजट पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

    हालांकि, रसोई के सामान की महंगाई का यह तड़का पिछले कुछ माह से चला आ रहा है। लेकिन, अब दलहन की फसलों की स्थिति ने बजट को बिल्कुल ही खराब करने का काम किया है।

    क्यों बढ़ रही महंगाई?

    जानकार इसे पिछले दिनों में फसली सीजन के दौरान आई बरसात को एक बड़ा कारण मानते हैं। कहना है कि महंगाई का यह तड़का अभी त्योहारी सीजन में और ज्यादा देखने को मिलेगा। कारण कि बढ़े हुए दामों से तैयार होने वाले उत्पाद जब बाजार में बिक्री के लिए आएंगे तो उसमें भी बढ़ोत्तरी होना स्वभाविक है।

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    'राजस्थान में भी स्थिति ठीक नहीं'

    दरअसल, ये महंगाई का वो खतरा है जो कि अगस्त में मानसून की बेरुखी से फसलें तबाह होने के बाद पैदा हो गया था। किराना व्यापारी मनोज गर्ग बताते हैं कि रिकॉर्ड तोड़ दलहन और तिलहन उत्पादन के मामले में पहले स्थान पर रहने वाले राजस्थान के अन्य क्षेत्रों में भी स्थिति अच्छी नहीं है।

    उत्पादन कम, डिमांड अधिक

    कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मूंग की पैदावार 15 से 25 प्रतिशत, मूंगफली की पैदावार 10 से 15 प्रतिशत और कपास उत्पादन 25 से 30 का प्रतिकूल असर पड़ा है। दूसरी ओर कम हो रहे उत्पादन ने इस स्तर पर डिमांड बढ़ा दी है कि बाजार में उसका असर दिख रहा है। साथ ही त्योहारी सीजन सिर पर है। जिसके कारण दिक्कत होना लाजमी है।

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