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    IIT बाबा अभय सिंह ने की शादी, इंजीनियर पत्नी के साथ पहुंचे झज्जर वाले घर; मां ने बहू को मिठाई खिलाकर उतारी आरती

    Updated: Mon, 06 Apr 2026 04:58 PM (IST)

    प्रयागराज महाकुंभ से प्रसिद्ध हुए आईआईटी बाबा अभय सिंह ने हिमाचल के अघंजर मंदिर में शादी कर ली है। उन्होंने 15 फरवरी को शिवरात्रि पर विवाह किया। ...और पढ़ें

    HighLights

    1. आईआईटी बाबा अभय सिंह ने हिमाचल में शादी की।

    2. उनकी पत्नी कर्नाटक की रहने वाली इंजीनियर हैं।

    3. अभय सिंह झज्जर के सासरौली गांव के मूल निवासी।

    जागरण संवाददाता, झज्जर। हरियाणा के जिला झज्जर के सासरौली गांव के रहने वाले और प्रयागराज महाकुंभ मेले में प्रसिद्ध हुए आईआईटी बाबा अभय ने शादी की। शादी के बंधन में बंधने के बाद आज (सोमवार) वे अपने झज्जर वाले घर पहुंचे। उन्होंने 15 फरवरी को शिवरात्रि शुभ अवसर पर शादी की। इसके बाद उन्होंने 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज भी की। 

    उन्होंने हिमाचल के अघंजर मंदिर में शादी की। इन दिनों पत्नी के साथ हिमाचल के धर्मशाला में रह रहे हैं। इनकी पत्नी मूलरूप से कर्नाटक की हैं। वह भी इंजीनियर हैं। अभय सिंह मूल रूप से झज्जर के सासरौली गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता कर्ण सिंह वकील हैं और झज्जर बार एसोसिएशन के प्रधान भी रह चुके हैं।

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    घर पहुंचने पर आईआईटी बाबा अभय सिंह की दुल्हनिया ने पूरी तरह से सनातन परंपराओं का निर्वहन किया। माथा पर कलश लेकर घर में प्रवेश किया। इसके बाद दोनों ने पद चिन्हों वाले रीति-रिवाज को पूरा किया। बाबा की मां ने बहू को तिलक और मिठाई खिलाकर आरती उतारी।

    यह भी पढ़ें- कौन हैं IIT बाबा अभय सिंह की पत्नी? कर्नाटक की इंजीनियर बनीं हरियाणा की बहू; कैसे शुरू हुई लव स्टोरी?

    अभी दोनों घर पर ही हैं, काफी संख्या में लोग इनसे मिलने के लिए पहुंच रहे हैं। सेल्फी लेने से लेकर बातचीत करने तक लोग काफी उत्सुक दिख रहे हैं।

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    बता दें कि अभय सिंह पूर्व एयरोस्पेस इंजीनियर हैं, जो आध्यात्मिक साधक बन गए हैं। आईआईटी बॉम्बे से स्नातक होने के बाद उन्होंने आत्म-खोज और आंतरिक शांति की खोज के लिए अपने एक सफल करियर तक को पीछे छोड़ दिया।

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    उन्होंने किताब भी लिखी है। 'ए ब्यूटीफुल प्लेस टू गेट लास्ट', 195 पेज की पुस्तक काफी ट्रेंड में थी। अभय सिंह ने अपने इंस्टा प्रोफाइल पर लिंक भी डाला है। पुस्तक सही और गलत की कठोर धारणाओं को चुनौती देती है। मन और आत्मा के जंगल में अन्वेषण को प्रोत्साहित करती है। काव्यात्मक गद्य और गहन अंतर्दृष्टि के माध्यम से यह अस्तित्व के सार, प्रेम की प्रकृति और वास्तविक संबंध के महत्व पर प्रकाश डालती है।