Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    हरियाणा: झज्जर में बयानबाजी में विरोधाभास के चलते दुष्कर्म का आरोपी बरी, फेसबुक पर हुई थी दोनों की मुलाकात

    Updated: Tue, 07 Jul 2026 02:41 PM (IST)

    झज्जर कोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। महिला के बयानों में विरोधाभास के कारण उसे पीड़िता नहीं माना गया और मुआवजे से भी इनकार ...और पढ़ें

    बयानबाजी में विरोधाभास के चलते दुष्कर्म का आरोपी बरी (फाइल फोटो)

    बयानबाजी में विरोधाभास के चलते दुष्कर्म का आरोपी बरी (फाइल फोटो)


    HighLights

    1. आरोपी को दुष्कर्म और धमकी के मामले में बरी किया

    2. महिला के बयानों में विरोधाभास के कारण पीड़िता नहीं माना

    3. कोर्ट ने मुआवजे की सिफारिश से भी इनकार किया

    जागरण संवाददाता, झज्जर। करीब पांच साल पहले, दुष्कर्म और धमकी देने के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अदालत ने आरोपित को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया है।

    अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (विशेष अदालत) मोना सिंह की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपित के खिलाफ आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने शिकायतकर्ता महिला को किसी भी प्रकार का मुआवजा देने की सिफारिश करने से इनकार करते हुए टिप्पणी की कि महिला ''पीड़िता'' प्रतीत नहीं होती है। मामले में राज्य की ओर से लोक अभियोजक किरण चौधरी और आरोपित की तरफ से अधिवक्ता प्रीति कादियान ने पैरवी की थी।

    साढ़े चार साल से अधिक चला मामला

    अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, यह मामला झज्जर की विशेष अदालत में चल रहा था। आरोपित, जो उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के अहमदगढ़ थाना अंतर्गत नगला जगत का रहने वाला है, के खिलाफ थाना आसौदा में 23 फरवरी 2021 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जिसमें दुष्कर्म सहित भांदस की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। इस मामले का निपटारा 4 साल, 10 महीने और 22 दिनों की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 4 जुलाई 2026 को हुआ।

    मामले की दर्ज एफआइआर के अनुसार, महिला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उसका अपने पति के साथ विवाद चल रहा था और वह अपने मायके में रह रही थी। इसी दौरान फेसबुक पर उसकी पहचान आरोपित से हुई। जिसने उसे ढांढ़स बंधाया और मानसिक परेशानी दूर करने के बहाने बहादुरगढ़ बुलाया।

    आरोप के मुताबिक, 17 दिसंबर 2020 को महिला बहादुरगढ़ पहुंची, जहां आरोपित ने उसे एक होटल में ठहराया और उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। साथ ही महिला ने पैसे छीनने, वीडियो बनाने और बाद में फोन व व्हाट्सएप पर ब्लैकमेल कर धमकी देने का भी आरोप लगाया था।

    खबरें और भी

    बयानों में विरोधाभास बना बरी होने का आधार

    अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किसी भी दुष्कर्म के मामले में केवल पीड़िता का बयान ही आरोपित को दोषी ठहराने के लिए काफी हो सकता है, बशर्ते वह पूरी तरह विश्वसनीय, निष्कलंक और ठोस हो। लेकिन इस मामले में स्थिति उलट रहीं।

    फैसले में रेखांकित किया गया कि महिला द्वारा दर्ज कराए गए बयान, मेडिकल परीक्षण के समय दी गई हिस्ट्री, पुलिस में दर्ज एफआइआर और अदालत में दी गई गवाही में विरोधाभास और विसंगतियां पाई गईं। इन महत्वपूर्ण तथ्यों में बदलाव के कारण आरोप लगाने वाली महिला के बयानों को विश्वसनीय नहीं माना गया। अदालत ने फैसले के निष्कर्ष में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपित के खिलाफ संदेह से परे जाकर दोष साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। इसलिए उसे आरोपों से बरी किया जाता है।

    इसके साथ ही, जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण झज्जर द्वारा महिला को मुआवजा दिए जाने के बिंदु पर अदालत ने कहा कि चूंकि शिकायतकर्ता महिला ''पीड़िता'' नजर नहीं आती, इसलिए उसे राज्य सरकार की ओर से किसी भी प्रकार के मुआवजे की कोई आवश्यकता या औचित्य नहीं है।