पानी बचाने की ओर झज्जर का बड़ा कदम, 29 हजार एकड़ में धान की सीधी बिजाई का बना रिकॉर्ड
झज्जर के किसानों ने जल संरक्षण की दिशा में बड़ी पहल करते हुए 29 हजार एकड़ में धान की सीधी बिजाई (डीएसआर) कर नया रिकॉर्ड बनाया है। ...और पढ़ें

पानी बचाने की ओर झज्जर का बड़ा कदम (प्रतीकात्मक फोटो)
जागरण संवाददाता, झज्जर। जल संरक्षण की दिशा में जिले के किसानों ने इस बार एक मिसाल पेश करते हुए धान की सीधी बिजाई (डीएसआर तकनीक) को बड़े पैमाने पर अपनाया है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने वर्ष 2026-27 के खरीफ सीजन में जिले के लिए 10 हजार एकड़ में धान की सीधी बिजाई का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन किसानों ने उत्साह दिखाते हुए करीब 29 हजार एकड़ भूमि में डीएसआर तकनीक से बिजाई कर नया रिकॉर्ड कायम किया है।
यह निर्धारित लक्ष्य से लगभग तीन गुना अधिक है। पिछले वर्ष जिले में केवल दो हजार एकड़ क्षेत्र में ही धान की सीधी बिजाई हुई थी। इस प्रकार महज एक ही वर्ष में इस तकनीक का दायरा 27 हजार एकड़ बढ़ गया है।
पानी की 25 प्रतिशत तक बचत और लागत में कमी
धान की परंपरागत खेती में पहले नर्सरी तैयार की जाती है और फिर खेतों में जलभराव कर पौधों की रोपाई होती है, जिससे भूजल का भारी दोहन होता है। इसके विपरीत, डीएसआर तकनीक में सीधे खेत में बीजों की बिजाई की जाती है और आवश्यकतानुसार ही सिंचाई होती है।
इस तकनीक से 15 से 25 प्रतिशत तक पानी की सीधी बचत होती है। रोपाई की जरूरत न रहने से मजदूरी और समय दोनों की बचत होती है। खेतों में लगातार पानी न रुकने से मीथेन गैस का उत्सर्जन कम होता है। सही खरपतवार व उर्वरक प्रबंधन से इसकी पैदावार परंपरागत विधि के बराबर या उससे भी बेहतर मिलती है।
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4,500 रुपये प्रोत्साहन राशि और जागरूकता का दिखा असर
प्रदेश सरकार की ओर से धान की सीधी बिजाई करने वाले पंजीकृत किसानों को 4,500 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। जिले के किसानों ने इस योजना का भरपूर लाभ उठाया। इसके अलावा, इस वर्ष मानसून की धीमी शुरुआत के कारण भी किसानों ने जल बचाने वाली तकनीकों की ओर रुख किया।
कृषि विभाग द्वारा गांव-गांव चलाए गए जागरूकता अभियानों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने किसानों को डीएसआर तकनीक की बारीकियों से अवगत कराया, जिसका सकारात्मक परिणाम इस रिकार्ड बिजाई के रूप में सामने आया है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एसडीओ डॉ. जगजीत सांगवान ने कहा कि सरकार का उद्देश्य भूजल संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाना है। आने वाले वर्षों में डीएसआर तकनीक को और अधिक बढ़ावा दिया जाएगा ताकि जल संकट वाले क्षेत्रों में खेती अधिक टिकाऊ और लाभकारी बन सके। झज्जर के किसानों का यह कदम अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण है।