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‘मिनी कुंभ’ में मोनालिसा के स्वजन का जलवा, मालाओं की बिक्री बनी आकर्षण का केंद्र; महाकुंभ से फिल्म के सफर पर क्या बोले?

Published: Sat, 29 Nov 2025 07:09 PM (IST)

हरियाणा के झज्जर जिले के कबलाना गांव में मिनी कुंभ मेले में प्रयागराज की चर्चित कलाकार मोनालिसा के परिवार ने ...और पढ़ें

‘मिनी कुंभ’ में मोनालिसा के स्वजन का जलवा। फाइल फोटो

‘मिनी कुंभ’ में मोनालिसा के स्वजन का जलवा। फाइल फोटो

HighLights

  1. कबालाना में मिनी कुंभ में मोनालिसा का परिवार

  2. मालाओं की बिक्री बनी आकर्षण का केंद्र

  3. साधु-संतों को मालाएं बेचता है परिवार

राकेश कुमार, झज्जर। गांव कबलाना में चल रहे मिनी कुंभ में इस बार कुछ अलग ही रंग देखने को मिला। मेले की पारंपरिक शोभा, विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और साधु-संतों के जमावड़े के बीच जिस परिवार ने लोगों का खास ध्यान खींचा, वह था प्रयागराज की चर्चित युवा कलाकार मोनालिसा के स्वजनों का परिवार।

महाकुंभ से उभरी उनकी लोकप्रियता अब दक्षिण भारतीय सिनेमा तक पहुंच चुकी है और इसी सफर की चमक इस बार कबलाना के मिनी कुंभ में भी दिखाई दी।

मालाओं की खुशबू और महेश्वर की मिट्टी का रिश्ता

मध्यप्रदेश के महेश्वर गांव से आया मोनालिसा का यह परिवार - जिसमें छाया पवार, बरखा, वर्षा, धन्नो, सोनू और अभीजित, कई पीढ़ियों से साधु-संतों को रुद्राक्ष, स्फटिक, तुलसी और मोती की मालाएं व पूजा-सामग्री उपलब्ध कराने का कार्य करता आ रहा है।

धार्मिक आस्था से जुड़े काम में उनकी पहचान बेहद मजबूत मानी जाती है। कबलाना मेले में अन्य परंपराओं के साधु यहां से मालाएं खरीदते दिखे। परिवार की बुजुर्ग सदस्य और मोनालिसा की बुआ छाया पवार बताती हैं, मोनालिसा गांव महेश्वर की बेटी है।

प्रयागराज महाकुंभ में साधुओं को माला देते समय मीडिया की नजर पड़ी और फिर उसकी तस्वीरें वायरल होने लगीं। इसी मौके ने उसे फिल्मों की ओर बढ़ने का रास्ता दिया।

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महाकुंभ से फिल्म इंडस्ट्री तक - कैसे उभरी मोनालिसा की कहानी

धार्मिक मेलों में परिवार के साथ काम करते-करते मोनालिसा का सौम्य व्यक्तित्व और सहजता उन्हें अलग पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण रहे। परिवार बताता है कि अब तक वह दो दक्षिण भारतीय फिल्मों में अभिनय कर चुकी है, जबकि उनका एक म्यूजिक वीडियो भी अच्छी प्रतिक्रिया हासिल कर चुका है।

मोनालिसा की चचेरी बहन वर्षा बताती हैं - फिल्मों में काम करने के बावजूद उसकी जड़ें वहीं हैं, जहां से वह उठकर आई हैं। त्योहारों पर वह जरूर गांव आती है और पड़ोसियों से लेकर बुजुर्गों तक सबका हाल-चाल पूछती है। उसका स्वभाव आज भी वैसा ही सरल है जैसा पहले था।

परिवार के सदस्यों के चेहरे पर गर्व साफ झलकता है। बरखा, जिन्हें मोनालिसा बहन की तरह मानती है, बताती हैं - वह बचपन से हमारे साथ मेला-दर-मेला घूमती रही है। साधुओं को मालाएं देने में पूरा दिन बीत जाता था।

आज जब वह फिल्मों में काम कर रही है, तब भी हमारी परंपरा को अपना सम्मान देती है। परिवार के सोनू पवार कहते हैं, हम उज्जैन, नासिक, काशी या हरिद्वार जहां पर भी बड़ा मेला लगता है, वहां सामान पहुंचाते हैं। हमारे लिए यह सिर्फ व्यवसाय नहीं, बल्कि साधु-संतों की सेवा है, जो वर्षों से हमारे जीवन का हिस्सा रही है।

आस्था, परंपरा और नई पीढ़ी की उड़ान

कबलाना में लगे मिनी कुंभ में इस परिवार के पास खरीदारों की भीड़ रही। साधुओं का कहना था कि उज्जैन और काशी के रुद्राक्ष अपनी गुणवत्ता और आध्यात्मिक प्रभाव के लिए प्रसिद्ध हैं।

साधक मानते हैं कि ऐसी मालाओं में विशेष ऊर्जा होती है, जो साधना को समर्थ बनाती है। शायद यही वजह रही कि मालाओं की बिक्री मुख्य आकर्षण बन गई।

मोनालिसा के परिवार की उपस्थिति ने कबलाना के मिनी कुंभ मेले में एक अतिरिक्त आकर्षण जोड़ दिया। जहां एक ओर परंपरा और आस्था का गहरा रंग था, वहीं दूसरी ओर नई पीढ़ी के सपनों की उड़ान की कहानी भी बार-बार चर्चा में रही कि कैसे साधारण परिवेश से उठी एक लड़की आज फिल्मी दुनिया में अपना स्थान बना रही है।

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