बछड़े को बचाते-बचाते चार लोगों की मौत, झज्जर में महापंचायत ने उठाई पीड़ितों के लिए शहीद के दर्जे और मुआवजे की मांग
झज्जर के मुनीमपुर गांव में बछड़े को बचाने के प्रयास में चार युवाओं की जहरीली गैस से मौत के बाद महापंचायत बुलाई गई। ...और पढ़ें
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सर्व समाज की महापंचायत में फूटा गुस्सा (फोटो: जागरण)
HighLights
मुनीमपुर में बछड़ा बचाने में चार युवाओं की मौत।
महापंचायत ने प्रशासनिक लापरवाही पर जताया गहरा रोष।
मृतकों को शहीद दर्जा, 1 करोड़ मुआवजे की मांग।
जागरण संवाददाता, झज्जर। मुनीमपुर गांव में शिव मंदिर के पास स्थित एक कुएं में गिरे गाय के बछड़े को बचाने के प्रयास में जहरीली गैस की चपेट में आने से चार युवाओं की मौत के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है।
इस हृदयविदारक घटना और उसके बाद प्रशासनिक व चिकित्सीय स्तर पर बरती गई कथित लापरवाही को लेकर सोमवार को मुनीमपुर गांव में सर्व समाज की विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया। ग्राम पंचायत मुनीमपुर एवं बादली हलके के ग्रामीणों ने इस दौरान गहरा रोष प्रकट किया और झज्जर के उपायुक्त के नाम एक ज्ञापन तैयार कर अपनी मांगें रखीं।
प्रशासनिक और चिकित्सीय लापरवाही के गंभीर आरोप
सौंपे गए मांग पत्र के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा 19 जुलाई 2026 की रात करीब 8:45 बजे घटित हुआ था, जब शिव मंदिर के पास एक कुएं में गाय का बछड़ा गिर गया। जीव दया की भावना से ओत-प्रोत होकर उसे सुरक्षित बाहर निकालने के लिए मुनीमपुर निवासी दलबीर (40), मोनू (35), नरेन्द्र (31) तथा दलबीर के पास मजदूरी करने वाला रामलाल (32) कुएं में उतरे थे। लेकिन कुएं के भीतर मौजूद अत्यधिक जहरीली गैस के कारण चारों युवक तत्काल बेहोश हो गए।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डायल 112 पर तुरंत सूचना दी गई थी, लेकिन पुलिस बेहद देरी से मौके पर पहुंची, दुलीना चौकी से गांव की दूरी महज 5 से 10 मिनट की है। इसके अतिरिक्त सिविल अस्पताल झज्जर में संपर्क करने का प्रयास किया गया, परंतु किसी ने फोन तक नहीं उठाया।
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घटना के लगभग डेढ़ घंटे बीत जाने के बाद रिलायंस एमइटी से फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंची, लेकिन उनके पास न तो आवश्यक रेस्क्यू उपकरण थे और न ही दक्ष टीम। अंततः ग्रामीणों ने खुद मोर्चा संभालते हुए जेसीबी से कुएं की दीवार को तोड़ा और दो सेप्टिक टैंकों से पानी निकालकर चारों युवकों को बाहर निकाला।
ग्रामीणों का आक्रोश यहीं नहीं थमा, उन्होंने बताया कि मौके पर बुलाई गई एंबुलेंस में न तो आक्सीजन की कोई सुविधा उपलब्ध थी और न ही कोई चिकित्सक उपस्थित थे। नागरिक अस्पताल झज्जर पहुंचने के बाद भी करीब डेढ़ घंटे तक उचित चिकित्सीय सहायता और वेंटिलेटर आदि उपकरणों के अभाव में तड़पते हुए नरेन्द्र पुत्र सत्यवान ने दम तोड़ दिया।
महापंचायत के फैसले पर खाप प्रधान व प्रबुद्ध जनों की बात
इस पूरे घटनाक्रम पर आक्रोश व्यक्त करते हुए महापंचायत में उपस्थित गुलिया खाप के प्रधान विनोद गुलिया ने कहा कि प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण ही चार होनहार युवाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पंचायत ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि जब तक सरकार और प्रशासन पीड़ित परिवारों की सभी जायज मांगों को पूरा नहीं करता, तब तक मृतकों का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
खाप प्रधान ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरा बादली हलका और सर्व समाज मिलकर बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होगा। उन्होंने कहा कि इन युवाओं ने एक बेजुबान जानवर की जान बचाते हुए अपने प्राणों की आहुति दी है, जो किसी शहादत से कम नहीं है। इसलिए सरकार को तुरंत इनके परिवारों की सुध लेनी चाहिए।
महापंचायत द्वारा उपायुक्त के समक्ष रखी गईं मुख्य मांगें
- बेजुबान बछड़े की जान बचाते हुए अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले चारों मृतकों के आश्रितों को 1-1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए तथा प्रत्येक पीड़ित परिवार के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए।
- समाज में जीव दया की अनुपम मिसाल पेश करने वाले इन चारों मृतकों को 'शहीद' का दर्जा दिया जाए। इसके साथ ही उनके बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च सरकार द्वारा मुफ्त वहन किया जाए।
- इस पूरे घटनाक्रम में डायल 112, दमकल विभाग और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका की उच्च स्तरीय मजिस्ट्रेट जांच कराई जाए। ड्यूटी में कोताही बरतने और लापरवाही के जिम्मेदार दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाए।