कैथल के भानपुरा गांव में दो तालाबों के सुंदरीकरण पर 1.49 करोड़ रुपये हुए खर्च, फिर भी अमृत सरोवर पड़े बदहाल
कैथल के भानपुरा गांव में अमृत सरोवर योजना के तहत दो तालाबों के सौंदर्यीकरण पर 1.40 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद वे बदहाल पड़े हैं। ...और पढ़ें

कैथल के भानपुरा गांव में दो तालाबों का हाल (File Photo)
HighLights
कैथल के भानपुरा में अमृत सरोवर पर करोड़ों खर्च
तालाब बदहाल, ग्रामीणों ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया
अधिकारियों ने मामले की जांच का आश्वासन दिया
राजिंद्र तंवर, कैथल। जिले के कैथल ब्लॉक का गांव भानपुरा। इस गांव में सरकार की महत्वपूर्ण अमृत सरोवर योजना के तहत वर्ष 2023 में दो तालाबों के सुंदरीकरण व खुदाई का कार्य शुरू हुआ था।
दोनों तालाबों के जीर्णोद्वार को लेकर सरकार की तरफ से एक एक करोड़ 86 लाख 49 हजार रुपये की राशि को मंजूरी दी गई थी, इनमें से संबंधित एजेंसी ने एक करोड़ 40 लाख रुपये की राशि से तालाबों के सुंदरीकरण पर खर्च कर दी। इसमें से एक तालाब पर 1.22 करोड़ रुपये तो दूसरे तालाब पर 18 लाख सात हजार रुपये की राशि खर्च की गई है। ढाई से तीन एकड़ में फैले इन तालाबों पर इतनी मोटी रकम खर्च होने के बावजूद बदहाल पड़े हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि तालाबों पर खर्च की गई राशि में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। धरातल पर पैसा कम खर्च हुआ, जबकि कागजों में ज्यादा हुआ है। करोड़ों रुपये की राशि खर्च होने के बावजूद तालाब सुंदर नहीं बल्कि बदहाल नजर आते हैं। तालाबों पर साफ-सफाई नहीं, गोबर के उपले नजर आ रहे हैं। पानी बिल्कुल गंदा हो गया है, जो पशुओं के पीने लायक नहीं है।

दोनों तालाबों पर लगाई 18 स्ट्रीट लाइट, सभी खराब
ग्रामीणों ने बताया कि दोनों ही तालाब गंदगी से अटे हैं। खानापूर्ति के लिए तालाबों पर तारबंदी की गई है, लेकिन यह महज दिखावे के लिए है। तार पूरी तरह से जंग खा चुकी है, लगाए गए पोल की क्वालिटी भी घटिया है।
इसी तरह से स्ट्रीट लाइट 18 लगाई गई थी, जो कुछ दिन बार ही खराब हो गई। तालाब पर बनाए गए बर्म की मिट्टी खिचक चुकी है, इस कारण ग्रामीणों को हादसे का डर बना रहता है।
तालाबों के आसपास व अंदर गंदगी जमा है। पीने लायक पानी न होने के कारण पशु पालकों को काफी परेशानी आ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि तालाब के चारों तरफ कोई पेड़-पौधे नहीं लगाए गए हैं, तालाब में जो मिट्टी निकली है, उसी से मिट्टी का फुटपाथ बना दिया गया है, वहां भी लगाए गए ब्लाक उखड़-खाबड़ हो चुके हैं, जिससे हादसे का डर लोगों में बना रहता है।
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काम करने के बाद एजेंसी ने नहीं किया तालाबों का दौरा
ग्रामीण ने बताया कि तालाबों पर काम वर्ष 2023 में शुरू हुआ था, जो वर्ष 2025 तक चला। इसके बाद आज तक भी एजेंसी ने तालाबों का दौरा नहीं किया। तालाब अब पूरी तरह से बदहाल हो चुके हैं, गंदगी तालाबों में जमा है, जिससे लोगों को बीमारियां फैलने का डर बना रहता है।
कई जगहों पर तालाबों के आसपास गोबर डाला जा रहा है, वहीं बड़ी-बड़ी घास उग आई है, जिसमें से जहरीले जीव निकल रहे हैं, जिसके चलते आसपास के मकानों में रहने वाले लोगों को हादसे का डर बना रहता है। लोगों की मांग है कि तालाबों पर खर्च की गई करोड़ों रुपये की राशि को लेकर जांच की जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

तालाबों के सुंदरीकरण के कार्य में बरती गई लापरवाही : सरपंच
गांव भानपुरा के सरपंच दयानंद ने बताया कि वर्ष 2023 में गांव के दोनों तालाबों पर कार्य शुरू हुआ था। यह कार्य ई-टेंडरिंग के माध्यम से एजेंसी ने किया था, पंचायत का इसमें कोई रोल नहीं है। काम पूरा होने के बाद एजेंसी ने दोबारा से तालाब का कोई दौरा नहीं किया। अब दोनों तालाब बदहाली की स्थिति में है।
स्ट्रीट लाइट भी खराब पड़ी हैं। पंचायत भी इस कार्य से संतुष्ट नहीं है।
रिपोर्ट ली जाएगी : कार्यकारी अभियंताजिला परिषद के कार्यकारी अभियंता अंकुर गर्ग ने बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही कैथल में पंचायत राज के कार्यकारी अभियंता कार्यालय का कार्यभार संभाला है। यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। इसकी रिपोर्ट लेकर जांच की जाएगी।