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    हरियाणा: कैथल के सजूमा गांव में दूषित पानी का प्रकोप, एक बच्ची की मौत; 39 बच्चे बीमार

    Updated: Sat, 11 Jul 2026 07:48 PM (IST)

    कैथल के गांव सजूमा में दूषित पेयजल से बीमारी फैली है, जिससे एक बच्ची की मौत हो गई और 39 बच्चे बीमार पड़ गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने हेपेटाइटिस-ए की पुष ...और पढ़ें

    कैथल के गांव सजूमा में दूषित पानी का प्रकोप।

    कैथल के गांव सजूमा में दूषित पानी का प्रकोप।

    HighLights

    1. सजूमा गांव में दूषित पानी से एक बच्ची की मौत

    2. 39 बच्चे बीमार, पांच में हेपेटाइटिस-ए की पुष्टि

    3. स्वास्थ्य विभाग ने लीकेज मरम्मत, घर-घर सर्वे शुरू किया

    जागरण संवाददाता, कैथल। कैथल जिले का गांव सजूमा इन दिनों दूषित पेयजल से फैले बीमारी के प्रकोप से जूझ रहा है। पिछले करीब 15 दिनों में एक बच्ची की मौत हो चुकी है, जबकि 39 बच्चे बीमार पड़ चुके हैं। इनमें पांच बच्चों का जिला नागरिक अस्पताल और निजी अस्पतालों में उपचार चल रहा है।

    स्वास्थ्य विभाग की जांच में अब तक लिए गए आठ रक्त नमूनों में से पांच में हेपेटाइटिस-ए की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 20 नमूनों की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। बीमारी के लगातार बढ़ते मामलों के बाद स्वास्थ्य विभाग और जनस्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें गांव में डेरा डाले हुए हैं।

    शुरुआती जांच में दूषित पेयजल और पाइपलाइन की लीकेज को बीमारी फैलने का प्रमुख कारण माना जा रहा है। विभाग ने पानी के नमूने लेने, घर-घर सर्वे और उपचार के साथ पाइप लाइन की लीकेज दुरुस्त करने का काम भी शुरू करा दिया है। विधायक आदित्य सुरजेवाला ने भी गांव पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली।

    हेपेटाइटिस-ए की पुष्टि, अभी 20 रिपोर्ट और आनी बाकी

    स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बीमार बच्चों के रक्त नमूने लेकर जांच कराई। अब तक आठ नमूनों की रिपोर्ट में पांच बच्चों में हेपेटाइटिस-ए की पुष्टि हुई है। करीब 20 नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार है।

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    जिन बच्चों में बुखार, पेट दर्द, उल्टी और कमजोरी जैसे लक्षण मिले हैं, उन्हें दवा देने के साथ निगरानी में रखा गया है। गंभीर हालत वाले पांच बच्चों का जिला नागरिक अस्पताल और निजी अस्पतालों में उपचार चल रहा है।

    सैनी कॉलोनी में सबसे ज्यादा शिकायत, लीकेज की हो रही मरम्मत

    ग्रामीणों के अनुसार गांव की सैनी कॉलोनी में पेयजल पाइप लाइन वर्षों पुरानी है और कई स्थानों पर लीकेज है। उनका आरोप है कि इन्हीं लीकेज वाले हिस्सों से गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल रहा है।

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    जनस्वास्थ्य विभाग ने गांव से पानी के नमूने लेकर जांच शुरू कर दी है। जिन स्थानों पर लीकेज मिली है, वहां मरम्मत कराई जा रही है ताकि दूषित पानी की आपूर्ति रोकी जा सके।

    12 टीमें गांव में, घर-घर पहुंच रही स्वास्थ्य सेवाएं

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    जिला मुख्यालय और कलायत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से गठित 12 टीमें गांव में डोर-टू-डोर सर्वे कर रही हैं। बीमार बच्चों की पहचान कर दवाइयां दी जा रही हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल भेजा जा रहा है। गांव में स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया है। लोगों को पानी उबालकर पीने, स्वच्छता बनाए रखने और बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई है।

    अस्पतालों में भर्ती बच्चों की हालत में सुधार

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    कैथल के जीवन ज्योति अस्पताल में गांव के 11 वर्षीय आर्यन, साढ़े चार वर्षीय अरणव और साढ़े आठ वर्षीय अविनया सहित तीन बच्चों का उपचार चल रहा है। अन्य दो बच्चे भी अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। स्वजनों का कहना है कि उपचार के बाद बच्चों की हालत पहले से बेहतर है, लेकिन गांव की पेयजल व्यवस्था को स्थायी रूप से दुरुस्त करना जरूरी है, ताकि दोबारा ऐसी स्थिति पैदा न हो।

    गांव में 12 स्वास्थ्य टीमें लगाई गई हैं। प्रभावित परिवारों का सर्वे कराया जा रहा है। हेपेटाइटिस-ए की पुष्टि वाले बच्चों की लगातार निगरानी की जा रही है और उपचार में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। -डॉ. रेनू चावला, सिविल सर्जन, कैथल