हेरिटेज का दर्जा भी नहीं बदल सका सूरत, कैथल में गंदगी और जलकुंभी से बदहाल हुई सरस्वती नदी
पुलड गांव में हेरिटेज का दर्जा प्राप्त सरस्वती नदी जलकुंभी और गंदगी से बदहाल है, जिससे जहरीले जीव और दुर्गंध फैल रही है। ...और पढ़ें
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कैथल में गंदगी और जलकुंभी से बदहाल हुई सरस्वती नदी (फोटो: जागरण)
HighLights
हेरिटेज सरस्वती नदी जलकुंभी और गंदगी से अटी।
नदी में जहरीले सांप-बिच्छू, दुर्गंध से लोग परेशान।
संरक्षण योजनाओं के बावजूद, सफाई और रखरखाव का अभाव।
अमित तनेजा, सीवन। सरकार की तरफ से हेरिटेज नदी का दर्जा दिए जाने के बावजूद गांव पोलड से होकर गुजर रही पौराणिक सरस्वती नदी आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। नदी के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के उद्देश्य से यहां रिवर फ्रंट निर्माण की योजना भी शुरू की गई थी, लेकिन धरातल पर हालात इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई देते हैं।
नदी का अधिकांश हिस्सा जलकुंभी से ढका हुआ है, पानी से तेज दुर्गंध उठती है और जहरीले सांप, बिच्छू व अन्य कीटों का बसेरा बन जाने से आसपास के लोगों का जीवन भी प्रभावित हो रहा है। सरस्वती नदी के किनारे स्थित प्राचीन सरस्वती मंदिर धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है।
वर्ष में यहां कई धार्मिक आयोजन, यज्ञ और मेले आयोजित होते हैं। पहले दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचकर सरस्वती नदी में स्नान कर पूजा-अर्चना करते थे, लेकिन अब घाटों की बदहाल स्थिति और गंदे, बदबूदार पानी के कारण श्रद्धालु स्नान करने से भी कतराने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी की दुर्दशा से धार्मिक महत्व भी प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने सरस्वती नदी को हेरिटेज नदी का दर्जा देकर इसके संरक्षण की बड़ी घोषणा की थी। रिवर फ्रंट परियोजना से भी लोगों को उम्मीद जगी थी कि नदी का स्वरूप बदलेगा और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन सफाई और रखरखाव के अभाव में सारी योजनाएं अधूरी नजर आ रही हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी से जलकुंभी हटाकर नियमित सफाई कराई जाए।
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निकल रहे सांप व बिच्छू
गांव निवासी जगरूप सिंह ने बताया कि नदी में जलकुंभी और झाड़ियों के कारण जहरीले सांप, बिच्छू तथा अन्य जीवों का स्थायी बसेरा बन गया है। कई बार ये जीव घरों में घुस आते हैं, जिससे ग्रामीणों में हमेशा डर का माहौल बना रहता है। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर परिवार हमेशा चिंतित रहते हैं।
दिलबाग सिंह पटवारी ने कहा कि सरस्वती नदी की नियमित सफाई और रखरखाव की बेहद आवश्यकता है, लेकिन संबंधित विभाग इस ओर गंभीर नहीं दिख रहा। उनका कहना है कि वर्ष में एक-दो बार मंदिर में हवन या धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कर देने से नदी का संरक्षण नहीं हो सकता।
नदी के पानी से इतनी तेज बदबू आती है कि आसपास रहने वाले लोग अपने घरों के बाहर बैठकर भोजन तक नहीं कर पाते। गर्मी और बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
नदी की बदहाली को नहीं किया जा रहा दूर
पूर्व सरपंच श्रवण कुमार ने बताया कि पहले नदी में औद्योगिक इकाइयों का केमिकलयुक्त पानी भी आता था, जिसे ग्रामीणों के प्रयासों से काफी हद तक बंद कराया गया है। इसके बावजूद नियमित सफाई नहीं होने से नदी की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ। आज भी यह नदी एक गंदे नाले जैसी दिखाई देती है और इसका प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह बिगड़ चुका है।