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    करनाल में अब ग्राम पंचायतें भी बनाएंगी अपना बजट, ग्राम सचिवालय से खुद लिखेंगे अपना भविष्य; पलायन रोकने पर खास जोर

    Updated: Fri, 01 May 2026 09:55 PM (IST)

    ग्राम पंचायतों को अब नगर निगमों की तर्ज पर अपना बजट बनाने का अधिकार मिलेगा, जिसकी शुरुआत करनाल लोकसभा क्षेत्र से हुई है। ...और पढ़ें

    करनाल में अब ग्राम पंचायतें भी बनाएंगी अपना बजट। एआई निर्मित फोटो

    करनाल में अब ग्राम पंचायतें भी बनाएंगी अपना बजट। एआई निर्मित फोटो

    HighLights

    1. ग्राम पंचायतें अब अपना बजट स्वयं बनाएंगी।

    2. करनाल में 563 पंचायतों से पायलट प्रोजेक्ट शुरू।

    3. गांवों को आत्मनिर्भर बनाने और शहरी सुविधाएं देने का लक्ष्य।

    प्रदीप शर्मा, करनाल। भारत की आत्मा गांवों में बसती है, लेकिन अक्सर विकास के मामले में गांव शहरों से पिछड़ जाते हैं। इसी खाई को पाटने के लिए करनाल लोकसभा क्षेत्र से एक ऐसी अनूठी शुरुआत की गई है, जो आने वाले समय में देश के ग्रामीण परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकती है।

    देश में पहली बार अब नगर निगम और नगरपालिकाओं की तर्ज पर ग्राम पंचायतों का भी अपना बजट होगा। गांव के विकास कार्यों का फैसला केवल सरपंच नहीं, बल्कि पूरी पंचायत ग्राम सचिवालय में बैठक लेगी।

    केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में पिछले दो दिनों से चल रही मैराथन बैठकों में कई अहम फैसले लिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक उन फसलों में यह सबसे बड़ा फैसला है। इस प्रयोग का मुख्य उद्देश्य गांवों को आत्मनिर्भर बनाना और वहां शहरी स्तर की सुविधाएं प्रदान करना है।

    करनाल बनेगा रोल माडल, 563 पंचायतों को मिला टास्क

    इस महत्वाकांक्षी योजना के पहले चरण में करनाल लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली करनाल व पानीपत की करीब 563 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है। प्रशासन ने इन सभी पंचायतों को अपना बजट तैयार करने के लिए एक महीने का समय दिया है।

    इस प्रक्रिया में पंचायतों को केवल मांग पत्र नहीं सौंपना होगा, बल्कि एक पेशेवर तरीके से अपनी आय और व्यय का पूरा ब्यौरा पेश करना होगा।

    बजट में ग्राम पंचायतों को करना होगा निर्धारित

    • - पंचायत की वर्तमान आमदनी के स्रोत क्या हैं?
    • - विकास कार्यों के लिए अनुमानित खर्च कितना होगा?
    • - आमदनी बढ़ाने के लिए पंचायत के पास क्या योजनाएं हैं?

    पलायन पर लगेगी लगाम, गांवों में पहुंचेगी शहरी सहूलियत

    अक्सर देखा गया है कि बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की तलाश में ग्रामीण आबादी शहरों की ओर पलायन करती है। इस नई व्यवस्था के पीछे मुख्य सोच इसी पलायन को रोकना है।

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    दो दिन से केंद्रीय मंत्री के साथ चल रही इन बैठकों में ग्रामीण क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर फोकस किया जा रहा है जिसमें सड़कों, नालियों और स्ट्रीट लाइटों का प्रबंधन अब व्यवस्थित बजट के जरिये होगा। गांवों में पार्क, लाइब्रेरी और खेल मैदानों के रखरखाव के लिए अलग से फंड का प्रविधान होगा।

    गांवों में तलाशे जाएंगे आमदनी के विकल्प

    अभी तक पंचायतों को विकास कार्यों के लिए सरकारी ग्रांट पर निर्भर रहना पड़ता था और खर्च का कोई पूर्व-निश्चित बजट ढांचा नहीं होता था। लेकिन अब आय-व्यय का हिसाब रखने से पारदर्शिता आएगी।

    ग्राम पंचायतों को अपने खर्चों के स्रोत स्पष्ट करने होंगे, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और जनता के पैसे का सही हिसाब मिल सकेगा। यह केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि विकेंद्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। जब पंचायतें अपना बजट खुद बनाएंगी, तो उन्हें अपनी प्राथमिकताओं का बेहतर ज्ञान होगा

    ट्रायल सफल हुआ तो पूरे देश में लागू होगा मॉडल

    यह योजना फिलहाल करनाल में एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की गई है। सरकार की योजना है कि यदि यहां के परिणाम सकारात्मक रहते हैं, तो इसे पहले पूरे हरियाणा प्रदेश में लागू किया जाएगा। इसके बाद, केंद्र सरकार की मंशा इस माडल को राष्ट्रव्यापी स्तर पर लागू करने की है, ताकि देश की हर पंचायत स्मार्ट पंचायत बन सके।

    जानिये आम आदमी को क्या होगा सीधा फायदा

    • - बजट पहले से तय होने के कारण फंड के इंतजार में काम नहीं रुकेंगे।
    • - सामुदायिक संपत्तियों जैसे स्कूल, डिस्पेंसरी की मरम्मत के लिए बजट में प्रविधान होने से उनकी स्थिति सुधरेगी।
    • - ग्राम सभा की बैठकों में ग्रामीण खुद तय कर सकेंगे कि बजट का कितना हिस्सा किस काम पर खर्च होना चाहिए।
    • - पंचायतों को अपनी आय के स्रोत विकसित करने की प्रेरणा मिलेगी।