Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    शिक्षा के नाम पर लूट, करनाल के स्कूलों और पब्लिशर्स की मनमानी; अभिभावकों पर थोपा जा रहा किताबों का भारी-भरकम सेट

    Updated: Wed, 01 Apr 2026 12:57 PM (IST)

    करनाल में नए शैक्षणिक सत्र के साथ निजी स्कूलों और पब्लिशर्स की मनमानी सामने आई है। अभिभावकों को किताबों के साथ कापियां और कवर का पूरा सेट खरीदने के लि ...और पढ़ें

    स्कूलों की मनमानी शुरू (AI Generated फोटो)

    स्कूलों की मनमानी शुरू (AI Generated फोटो)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, करनाल। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही अब निजी स्कूलों व पब्लिशर्सों की मनमानी फिर से सामने आने लगी है। जिसको लेकर इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुई है, जिसमें अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन की ओर से किताबों के साथ कापियां और कवर भी अनिवार्य रूप से खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। इससे अभिभावकों की परेशानी और खर्च दोनों बढ़ गए हैं।

    स्कूलों की मिलीभगत से अधिकतर पब्लिशर्स स्कूलों को किताबों का पूरा सेट उपलब्ध कराते हैं, जिसमें कापियां और कवर भी शामिल होते हैं। स्कूल इन्हीं सेटों को निर्धारित दुकानों पर उपलब्ध करवा रहे हैं, जहां से अभिभावकों को पूरा पैकेज खरीदना पड़ रहा है। अलग से किताबें लेने का विकल्प नहीं दिया जा रहा।

    उन्होंने कहा कि दुकानदार पूरा सेट दे रहे हैं, अगर इनसे सिंगल किताब लेने की बात करते हैं तो कहते हैं कि एक बार पूरा सेट खरीद लो, उसके बाद कुछ दिनों में बदल देंगे। शहर की चुनिंदा किताबों की दुकानों पर सुबह से ही अभिभावकों की लंबी कतारें लग रही हैं। एक ही दुकान पर कई स्कूलों की किताबें मिलने के कारण भीड़ और बढ़ रही है।

    अभिभावक कह रहे हैं कि घंटों लाइन में लगने के बावजूद समय पर किताबें नहीं मिल पा रहीं, जिससे उन्हें बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। पब्लिशर्ससों ने कोई व्यवस्था नहीं की हुई है। अभिभावकों ने मांग उठाई है कि पब्लिशर्स को दुकानों पर अतिरिक्त स्टाफ या लेबर की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि वितरण सुचारू रूप से चल सके और उन्हें लंबा इंतजार न करना पड़े।

    खबरें और भी

    उनका कहना है कि बच्चों के स्कूल शुरू होने से पहले किताबें मिलना जरूरी है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में यह काम मुश्किल हो रहा है। वहीं कुछ अभिभावकों का कहना है कि स्कूल किताबों के साथ कापियां खरीदने को नहीं कहते हैं, यह पब्लिशर्स ही अपनी मनमानी चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल को चाहिए की किसी एक ऐसे वेंडर को काम दें कि जो समय पर पुस्तकें उपलब्ध करवा सकें।

    क्योंकि इनको यह तो पता होगा की किस स्कूल में कितने बच्चों की किताबों के सेट बनवाने हैं, उसी हिसाब से फटाफट अभिभावकों को पुस्तकें उपलब्ध करवा दें। इस बारे में पब्लिशर्स का कहना है कि छह अप्रैल के बाद खुला सेट मिल जाएगा।