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    समय सीमा बढ़ी, पर राहत नहीं; FCI के चावल डिलीवरी रोकने से करनाल के राइस मिलर परेशान

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 08:35 AM (IST)

    केंद्र सरकार ने सीएमआर डिलीवरी की समय सीमा 30 सितंबर तक बढ़ाई है, लेकिन एफसीआई द्वारा चावल की डिलीवरी रोकने से राइस मिलरों को राहत नहीं मिल पा रही है। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. सीएमआर डिलीवरी की समय सीमा 30 सितंबर तक बढ़ी।

    2. एफसीआई ने चावल की डिलीवरी लेना फिलहाल रोका।

    3. करनाल की 237 राइस मिलें प्रभावित, 40% चावल शेष।

    जागरण संवाददाता, करनाल। केंद्र सरकार ने कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) की डिलीवरी की अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 सितंबर कर राइस मिलरों को राहत देने का प्रयास किया है, लेकिन भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) द्वारा चावल की डिलीवरी फिलहाल बंद किए जाने से यह राहत बेअसर साबित हो रही है।

    एफसीआई की ओर से चावल की उठान पर रोक लगाए जाने के कारण जिले की अधिकांश राइस मिलों में मिलिंग कार्य ठप पड़ गया है। राइस मिलरों का कहना है कि जब तैयार चावल लेने वाला कोई नहीं है तो मिलिंग करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

    करनाल जिले में करीब 237 राइस मिलें सीएमआर के तहत सरकार के लिए धान की मिलिंग करती हैं। अब तक सरकार को लगभग 60 प्रतिशत चावल की आपूर्ति की जा चुकी है, जबकि करीब 40 प्रतिशत यानी लगभग 2 लाख 32 हजार मीट्रिक टन चावल अभी भी सरकार को देना शेष है।

    समय सीमा बढ़ने से मिलरों को थी उम्मीद

    समय सीमा बढ़ने से मिलरों को उम्मीद थी कि वे निर्धारित अवधि में शेष कार्य पूरा कर लेंगे, लेकिन एफसीआइ की रोक ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राइस मिल संचालकों का कहना है कि यदि वे मिलिंग जारी रखते हैं तो तैयार चावल को रखने के लिए उनके पास पर्याप्त भंडारण व्यवस्था नहीं है।

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    दूसरी ओर लंबे समय तक गोदामों में रखा चावल गुणवत्ता परीक्षण, विशेषकर कलर टेस्ट, में फेल होने का खतरा रहता है। ऐसी स्थिति में सरकार द्वारा चावल अस्वीकार किए जाने पर पूरा आर्थिक नुकसान मिलरों को उठाना पड़ेगा।

    मिल संचालकों का यह भी कहना है कि मिलें बंद रहने के बावजूद उन्हें कर्मचारियों का वेतन, बिजली के स्थायी खर्च, रखरखाव और अन्य प्रशासनिक खर्च लगातार वहन करने पड़ रहे हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है। उनका मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो सीएमआर का शेष कार्य समय पर पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

    एफसीआइ के पास भंडारण की कमी बनी वजह

    एफसीआइ के गोदामों में पर्याप्त भंडारण क्षमता उपलब्ध नहीं होने के कारण फिलहाल नई डिलीवरी नहीं ली जा रही है। इसी कारण जिले की अधिकांश राइस मिलों ने सीएमआर के तहत मिलिंग कार्य अस्थायी रूप से रोक दिया है और अब वे एफसीआइ के अगले आदेश का इंतजार कर रहे हैं।

    क्या बोले राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान

    जुंडला राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान राजेंद्र मोंगा ने कहा, केंद्र सरकार ने सीएमआर की समय सीमा 30 सितंबर तक बढ़ाकर राहत दी है, लेकिन एफसीआई चावल की डिलीवरी नहीं ले रहा। इससे राइस मिलरों की परेशानी बढ़ गई है। एफसीआई को जल्द निर्णय लेना चाहिए ताकि सभी मिलर समय रहते सीएमआर का कार्य पूरा कर सकें और अनावश्यक आर्थिक नुकसान से बच सकें।