कुरुक्षेत्र में बौद्ध स्तूप के सुंदरीकरण पर विवाद, पुरातत्व विभाग पर धरोहर का मूल स्वरूप बदलने का आरोप
कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर स्थित बौद्ध स्तूप के सुंदरीकरण को लेकर हरियाणा राज्य पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग विवादों में घिर गया है। ...और पढ़ें
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कुरुक्षेत्र में बौद्ध स्तूप के सुंदरीकरण पर विवाद (फोटो: जागरण)
जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर के उत्तर-पश्चिम तट स्थित बौद्ध स्तूप के सुंदरीकरण करने के मामले में हरियाणा राज्य पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग फंस गया है। बौद्ध एवं पुरातात्विक विशेषज्ञों ने सुंदरीकरण करने के चक्कर में पुरातात्विक धरोहर के मूल स्वरूप को ही बदलने के आरोप विभाग पर लगाए हैं।
इतना ही नहीं सुंदरीकरण करते हुए नियमों की भी अनदेखी की। विशेषज्ञों के मुताबिक स्तूप के स्थान को संरक्षित करने की बजाय ईंटे लगाकर छोड़ दिया गया। स्तूप के नजदीक बिजली के खंभों को गाड़ने, एकदम स्ट्रक्चर के साथ पैदल मार्ग बनाने और साइट पर बांस के पौधे लगाने को भी नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है।
इससे जमीन के नीचे मूल ढांचे को नुकसान होगा। इसे विभाग के मौजूदा डिप्टी डायरेक्टर ने भी माना कि इस तरह की साइट पर यह सब नहीं किया जा सकता। अब इस मामले में शिकायत के बाद पुरातत्व विभाग भी परतें खोलने में लग गया है।
मामला बेहद गंभीर
आज तक इस साइट को ठीक तरह से आइडेंटिफाई ही नहीं किया गया है। यह बहुत गंभीर मामला है। ऊपर वाला जो स्तूप है वह स्तूप भी है या नहीं इस पर भी संशय है, क्योंकि सबसे ऊपर जो स्ट्रक्चर है वह स्तूप की बजाय दीवार है। इतना ही नहीं जिसे स्तूप बताया जाता है उसमें जो ब्रिक्स लगी हुई है वह अलग-अलग काल की लगी हुई है।
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अग्रोहा में भी ऐसा स्ट्रक्चर मिलते हैं। फिर यह एक आपदा ही है कि एक साइट को खत्म करने के लिए दो-दो बार सुंदरीकरण करवा दिए। जिसके नीचे स्तूप होने पर चर्चा थी उसे पोंड बना दिया गया। इसको लेकर विभाग का अपना ही डाक्यूमेंट है।
इसको स्तूप लिख रखा है। आगे एक मंदिर के अवशेष भी मिल चुके हैं। इसलिए इस साइट को पुन: आइडेंटिफाई करना चाहिए, ताकि इन सभी गलतियों को ठीक किया जा सके।
सिद्धार्थ गौरी, कन्वीनर, इंडियन नेशनल ट्रस्ट फोर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज यमुनाननगर चैप्टर।
कन्वीनर सिद्धार्थ बोले- विभाग इतने पर ही नहीं रुका। एकदम स्ट्रक्चर के साथ पैदल मार्ग बनाना नियम के खिलाफ है। बड़ी-बड़ी जेसीबी मशीनों को इस साइट पर चढ़ाने से नीचे के ढांचे को भी नुकसान हो सकता है। बांस के पौधे जमीन के नीचे ढांचे को भी नुकसान पहुंच सकते हैं। बिजली के खंभे और बांस के पौधे लगाने से साइट को नुकसान हो सकता है।
2012-13 में खुदाई का हिस्सा रहे डा. मनोज ने बताया कि खोदाई के दौरान यहां एक स्तूपनुमा स्ट्रक्चर मिला था, जिसका संरक्षण करना था। इस साइट पर अंदर दबे हुए स्ट्रक्चर में एक छोटी सील भी मिली थी जिसमें ब्रह्मा-विष्णु-महेश का सिंबल दिखाई दे रहा था।
विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. नरेंद्र परमार से संवाददाता की सीधी बातचीत
प्रश्न : ऐसी साइट पर जेसीबी चढ़ाई जा सकती है या नहीं?
डा. परमार : नहीं, ऐसी साइट पर जेसीबी चढ़ाने से नीचे ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है।
प्रश्न : बांस के पौधे लगाए जा सकते हैं या नहीं?
डा. परमार : नहीं, इससे भी जमीन के नीचे स्थित ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसी साइट पर बांस के पौधे भी नहीं लगाए जा सकते।
प्रश्न : सुंदरीकरण करते हुए नियमों की अनदेखी हुई है या नहीं?
डा. परमार : इस पर ज्यादा कुछ नहीं कह सकता। अभी दो दिन पहले ही एक शिकायत आई है। इस पर जांच की जाएगी।
प्रश्न : सुंदरीकरण पर कितना बजट खर्च हुआ?
डा. परमार : सुंदरीकरण पर कितना बजट खर्च हुआ इसकी जानकारी फिलहाल मेरे पास नहीं है, दिसंबर माह में ही मैंने प्रभार संभाला है और अभी कार्यालय से बाहर हूं।