कुरुक्षेत्र में बिजली निगम की लापरवाही से जली किसान की फसल, आयोग ने दिया मुआवजा का आदेश
कुरुक्षेत्र के जिला उपभोक्ता आयोग ने बिजली निगम की लापरवाही के कारण किसान अशोक कुमार की गन्ने की फसल जलने के मामले में अहम फैसला सुनाया है। ढीले बिजली ...और पढ़ें

बिजली निगम पर लापरवाही हुई साबित, किसान को जली फसल का मिलेगा मुआवजा।
HighLights
बिजली निगम की लापरवाही से जली किसान की गन्ने की फसल
उपभोक्ता आयोग ने निगम को मुआवजा देने का आदेश दिया
किसान को 2 लाख रुपये और मुकदमा खर्च मिलेगा
जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अहम फैसले में बिजली निगम की लापरवाही को जिम्मेदार मानते हुए किसान को मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला गांव सुनारियां निवासी अशोक कुमार की ओर से दायर शिकायत से जुड़ा हुआ है।
शिकायत के अनुसार, किसान अशोक कुमार ने अपनी करीब 17 कनाल 18 मरला जमीन में गन्ने की फसल उगाई थी, जिसकी सिंचाई ट्यूबवेल कनेक्शन के माध्यम से की जा रही थी। उनके खेतों के ऊपर से गुजर रही 11 केवी बिजली लाइन के तार काफी नीचे झूल रहे थे और फसल को छू रहे थे। किसान ने कई बार बिजली निगम को मौखिक रूप से शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
14 अक्टूबर 2021 को अशोक कुमार ने निगम को लिखित शिकायत भी दी, जिस पर 9 दिसंबर 2021 को निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में पाया गया कि बिजली लाइन के तार निर्धारित मानकों से नीचे थे और दो नए पोल लगाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई सुधार नहीं किया गया।
जिसके बाद 13-14 फरवरी 2022 की रात को ढीले पड़े तारों में शार्ट सर्किट होने से खेत में आग लगने से पूरी गन्ने की लगभग 1012 क्विंटल फसल जलकर राख हो गई। इस घटना से किसान को लगभग 3.66 लाख रुपये का नुकसान हुआ। घटना की सूचना पुलिस को दी गई, जिसमें भी शार्ट सर्किट को आग लगने का कारण बताया गया।
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बिजली निगम ने रखा अपना पक्ष
मामले की सुनवाई के दौरान बिजली निगम ने आरोपों को नकारते अपना पक्ष रखा। निगम ने अपने बचाव में कहा कि घटना के समय तार ढीले नहीं थे और आग किसी अन्य कारण जैसे किसी राहगीर की ओर से फेंकी गई जलती तीली से लग सकती है। हालांकि आयोग ने प्रस्तुत साक्ष्यों, दस्तावेजों और तस्वीरों का अध्ययन करने के बाद यह पाया कि बिजली निगम ने समय पर आवश्यक मरम्मत नहीं की, जिससे यह दुर्घटना हुई। आयोग ने सबूतों और तस्वीरों के आधार पर निगम की लापरवाही को सही माना।
आयोग ने फैसला सुनाते हुए बिजली निगम को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए किसान को 2 लाख रुपये मुआवजा 9 प्रतिशत ब्याज सहित देने का आदेश दिया है। साथ ही 11 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देने के निर्देश दिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करना होगा, अन्यथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।