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    कुरुक्षेत्र में किसान घाट जा रहे पिहोवा के किसान हिरासत में, ज्योतिसर पुलिस ने रोका रास्ता

    Updated: Tue, 21 Jul 2026 03:18 PM (IST)

    देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर दिल्ली स्थित किसान घाट जा रहे पिहोवा क्षेत्र के किसानों को ज्योतिसर पुलिस ने रोककर हिरासत में ले लिया। ...और पढ़ें

    कुरुक्षेत्र में किसान घाट जा रहे पिहोवा के किसान हिरासत में (फाइल फोटो)

    कुरुक्षेत्र में किसान घाट जा रहे पिहोवा के किसान हिरासत में (फाइल फोटो)

    संवाद सहयोगी, पिहोवा। देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को दिल्ली स्थित किसान घाट के लिए रवाना हुए पिहोवा क्षेत्र के किसानों को ज्योतिसर पुलिस चौकी के समीप पुलिस ने रोक लिया।

    किसानों का आरोप है कि बैरिकेडिंग कर उनके काफिले को आगे बढ़ने से रोक दिया गया और उन्हें हिरासत में लेकर दिनभर पुलिस लाइन में बैठाए रखा गया। किसान नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की।

    जानकारी के अनुसार देशभर से किसान सोमवार को किसान घाट पहुंचने के लिए दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। इसी क्रम में पिहोवा क्षेत्र के सैकड़ों किसान गांव सारसा में एकत्रित हुए। यहां से वे बसों के माध्यम से शांतिपूर्ण ढंग से दिल्ली के लिए रवाना हुए।

    किसानों का कहना है कि जैसे ही उनका काफिला ज्योतिसर पुलिस चौकी के पास पहुंचा, वहां पहले से की गई बैरिकेडिंग के जरिए पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद किसानों को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया गया, जहां उन्हें दिनभर रखा गया।

    किसान नेताओं का दावा है कि पुलिस ने किसान नेताओं की धरपकड़ की कार्रवाई एक दिन पहले ही शुरू कर दी थी। उनके अनुसार 20 जुलाई की रात पुलिस और किसान नेताओं के बीच बचने और पकड़ने का सिलसिला चलता रहा। इसके बावजूद किसान सोमवार सुबह एकत्रित होकर दिल्ली के लिए रवाना हुए, लेकिन उन्हें रास्ते में ही रोक लिया गया।

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    शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अधिकार

    किसान नेताओं ने कहा कि वे किसी प्रकार की अशांति फैलाने नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से किसान घाट पहुंचकर अपनी बात रखने जा रहे थे। देश के प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और आवागमन की स्वतंत्रता का अधिकार है।

    ऐसे में किसानों को रोकना और हिरासत में लेना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। किसान नेताओं ने सरकार से किसानों की समस्याओं को सुनने और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करने की मांग की।