कुरुक्षेत्र में 'न घर का न घाट का' नाटक का मंचन, दो पत्नियों के बीच फंसे पति की दास्तां देख लोटपोट हुए दर्शक
कुरुक्षेत्र में विश्व रंगमंच दिवस पर आयोजित रंगरथ नाट्य महोत्सव में रंग मंडप दिल्ली ने हास्य नाटक 'घर का न घाट का' का मंचन किया। जयवर्धन द्वारा लिखित ...और पढ़ें
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बच्चे की लालसा में दो बीवियों के बीच फंसा पति रहा घर का न घाट का।
HighLights
विश्व रंगमंच दिवस पर कुरुक्षेत्र में नाट्य महोत्सव
रंग मंडप दिल्ली ने 'घर का न घाट का' नाटक प्रस्तुत किया
दो पत्नियों के बीच फंसे पति की हास्यपूर्ण कहानी
जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र। विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर हरियाणा कला परिषद की ओर से कला कीर्ति भवन में आयोजित तीन दिवसीय रंगरथ नाट्य महोत्सव की दूसरी शाम में रंग मंडप दिल्ली के कलाकारों ने हास्य नाटक का मंचन किया। जयवर्धन के लेखन और जेपी सिंह के निर्देशन में लगभग डेढ़ घंटे की अवधि वाले नाटक घर का न घाट का में कलाकारों ने दर्शकों की वाहवाही बटोरी।
दर्शकों को संबोधित करते हुए डॉ. पवन आर्य ने बताया कि रंगकर्मी अपने नाटक के माध्यम से समाज में जागरूकता लाने के साथ-साथ एक आइना दिखाने का भी प्रयास करते हैं। हरियाणा कला परिषद के निदेशक विवेक कालिया के दिशा-निर्देश में आयोजित उत्सव अत्यंत सराहनीय प्रयास है जो न केवल रंगकर्मियों को मंच प्रदान कर रहा, बल्कि लोगों को भी रंगमंच से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगा। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. पवन आर्य, धर्मपाल, बृजकिशोर शर्मा, दीपक शर्मा ने की। मंच का संचालन विकास शर्मा ने किया।
तीन-तीन दिन के बंटवारे में बंट गया पति, संडे को हुआ बेघर
जयवर्धन की लेखनी से सजे हास्य नाटक की कहानी अमन, रमा और प्रिया की तकरार से शुरू होती है। अमन जो एक कला समीक्षक है तथा उसकी पहली पत्नी रमा नौकरी करती है। रमा को बच्चा न होने के कारण अमन रमा की सहमति से एक विधवा महिला प्रिया से शादी कर लेता है और वहीं से शुरू होती है रमा और प्रिया की तकरार। शादी होने के बाद रमा और प्रिया अपने पति को दूसरी पत्नी के पास भेजना पसंद नहीं करती। जिसके कारण प्रिया कोर्ट में केस कर देती है।
कोर्ट का फैसला आने पर पता चलता है कि कोर्ट ने अमन को तीन-तीन दिन के लिए पत्नी के पास रहना का निर्णय लिया है। जिसमें दोनों पत्नियां तीन-तीन दिन बांट लेती है। एक दिन प्रिया अमन और रमा को बताती है कि वह मां बनने वाली है। जिसके बाद रमा और अमन दोनों प्रिया की अच्छे से देखभाल करना शुरू कर देते हैं।
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कुछ समय बीतने के बाद रमा भी मां बनने की खुशखबरी देती है। अमन दोनों पत्नियां से बच्चा होने की बात सुनकर झूम उठता है। लेकिन दोनों पत्नियां अपने-अपने बच्चे को पहला वारिस बताने के चक्कर में लड़ने लग जाती है। बाद में खुलासा होता है कि प्रिया ने बच्चा पैदा करने की झूठी अफवाह फैलाई थी।
इस तरह दो पत्नियों के बीच फंसा पति न घर का रहता है न घाट का। हंसी के फव्वारे छोड़ते नाटक ने डेढ़ घंटे तक दर्शकों को बांधे रखा। नाटक में अमन का किरदार अरुण सोदे, रमा तृप्ति जौहरी तथा प्रिया का किरदार श्रीया कुमार ने निभाया। संगीत संचालन पवन तथा प्रकाश व्यवस्था जेपी सिंह ने संभाली। नाटक के अंत में डॉ. पवन आर्य ने स्मृति चिन्ह भेंट कर रंगमंडप दल का सम्मान किया। इस मौके पर शहर के कलाप्रेमी भारी मात्रा में सभागार में उपस्थित रहे।