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    कुरुक्षेत्र में डेस्क की कमी से जूझ रहे स्कूल, फर्श पर बैठने को मजबूर नौनिहाल

    Updated: Fri, 27 Feb 2026 02:25 PM (IST)

    कुरुक्षेत्र जिले के सरकारी स्कूलों में डेस्क की भारी कमी है, जिससे हजारों विद्यार्थी फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। शिक्षा विभाग हर दो महीने म ...और पढ़ें

    डेस्क की कमी से जूझ रहे स्कूल, फर्श पर बैठने को मजबूर नौनिहाल।

    डेस्क की कमी से जूझ रहे स्कूल, फर्श पर बैठने को मजबूर नौनिहाल।

    HighLights

    1. कुरुक्षेत्र के स्कूलों में डेस्क की भारी कमी

    2. हजारों विद्यार्थी फर्श पर बैठकर पढ़ाई को मजबूर

    3. 779 स्कूलों में 5594 डेस्क की तत्काल आवश्यकता

    रीतिका एस. वोहरा, कुरुक्षेत्र। जिले के स्कूलों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए डेस्क की कमी है। विद्यार्थी फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कई स्कूलों में तो हालात ऐसे हैं कि 10 से 12 साल पुराने डेस्क हैं। हर दो महीने के बाद शिक्षा विभाग की ओर से नए डेस्क को लेकर डिमांड तो मांग ली जाती है लेकिन नए डेस्क भेजे नहीं जाते।

    जिले में बालवाटिका से लेकर बारहवीं कक्षा तक के स्कूलों में यह स्थिति बनी हुई है। एक बार फिर शिक्षा निदेशालय ने एमआइएस पोर्टल पर गूगल फार्म भेजकर स्कूल के हेड मास्टर्स से डिमांड मांगी है। इस रिपोर्ट में यह भी पूछा गया है कि किस कक्षा में कितने डेस्क की आवश्यकता है।

    एक जानकारी के अनुसार जिले के लगभग 779 स्कूलों में 5594 डेस्क की आवश्यकता बताई गई है। इसमें बालवाटिका से पांचवीं तक 2269, छठीं से आठवीं तक 1726, नौवीं से बारहवीं तक 767 व ग्यारहवीं से बारहवीं कक्षा तक 832 डेस्क की आवश्यकता है।

    पुराने डेस्क पर बैठने को मजबूर विद्यार्थी

    सबसे अधिक परेशानी प्राइमरी स्कूलों में देखने को मिल रही है, जहां छोटे बच्चों को टाट और दरी पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है। कई स्कूलों में 10 से 12 साल पुराने डेस्क ही उपयोग में लाए जा रहे हैं, जो सुरक्षा और सुविधा दोनों के लिहाज से ठीक नहीं है। शिक्षा विभाग की ओर से हर दो महीने में स्कूलों से डेस्क की मांग संबंधी रिपोर्ट मंगाई जाती है।

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    बावजूद इसके, डेस्क की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। स्कूल प्रशासन का कहना है कि बार-बार मांग भेजने के बाद भी पर्याप्त संख्या में डेस्क उपलब्ध नहीं करवाए जा रहे हैं। इस बारे में जिला शिक्षा अधिकारी को दो बार फोन से संपर्क करने के प्रयास किए गए लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

    80 डेस्क की भेजी डिमांड

    गांव थाना के राजकीय प्राइमरी स्कूल में बालवाटिका से पांचवीं कक्षा तक 184 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। मुख्य शिक्षक रमेश कुमार ने बताया कि लंबे समय से स्कूल की ओर से डेस्क की डिमांड की जा रही है। अब भी 80 डेस्क की डिमांड भेजी है। स्कूल में जो डेस्क उपलब्ध हैं उनको बार-बार रिपेयर करवाकर प्रयोग किया जा रहा है। इसके अलावा बच्चे टाट पर बैठकर पढ़ाई करते हैं।

    सीनियर और हाईस्कूलों में 70 से 80 प्रतिशत डेस्क हैं। वहीं, लगभग 50 प्रतिशत राजकीय प्राइमरी स्कूलों में डेस्क की कमी है। पिछले दो व तीन साल से डेस्क की डिमांड विभाग की ओर से मांगी जा रही है। अभी हाल ही में 44 प्राइमरी मॉडल संस्कृति स्कूलों में डेस्क आए हैं लेकिन अभी कई राजकीय प्राथमिक स्कूलों में डेस्क की कमी से नौनिहालों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। 15-20 दिन पहले भी डेस्क की रिपोर्ट मांगी गई है। सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों के बराबर लाने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी तरफ मूल सुविधाओं की भी कमी है। स्कूलों में डेस्क एक मूल सुविधा है लेकिन इससे बड़ी संख्या में नौनिहाल वंचित हैं। इसी के साथ गर्मी व सर्दी में बच्चों को नीचे टाट पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है। -पवन मित्तल, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा प्राइमरी हेड टीचर्स एसोसिएशन।

    शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों से ड्यूल डेस्क का डाटा मांगा गया था। स्कूलों की ओर से डाटा एक्सेल शीट के माध्यम से भेजा जा चुका है। अब टीमें स्कूलों में जाकर भेजे गए डाटा का पुनरीक्षण करेंगी। -विनोद कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी।