कुरुक्षेत्र में आंगनबाड़ी के बच्चों को मिलेगा चूरमा और उबले चने, कुपोषण मिटाने के लिए नई पहल
कुरुक्षेत्र में महिला एवं बाल विकास विभाग कुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने के लिए नई पहल कर रहा है। ...और पढ़ें

कुरुक्षेत्र में आंगनबाड़ी के बच्चों को मिलेगा चूरमा और उबले चने (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र। जिले में कुपोषण से जूझ रहे बच्चों की सेहत सुधारने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने नई पहल शुरू करने की तैयारी की है। अब आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को नियमित पोषण आहार के साथ पारंपरिक खाद्य पदार्थों में चूरमा और उबले हुए काले चने भी उपलब्ध करवाए जाएंगे।
विभाग का मानना है कि स्थानीय खानपान पर आधारित यह पहल बच्चों को अतिरिक्त ऊर्जा, प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध करवाने के साथ उनके शारीरिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
हाल ही में विभाग की ओर से किए गए सर्वेक्षण में जिले के 1950 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। इनमें 93 बच्चे गंभीर तीव्र कुपोषण (एसएएम), 1556 बच्चे मध्यम तीव्र कुपोषण (एमएएम) तथा 301 बच्चे गंभीर रूप से कम वजन और गंभीर रूप से बौनापन की श्रेणी में शामिल हैं।
इन बच्चों की सेहत में सुधार के लिए विभाग ने अतिरिक्त पोषण उपलब्ध करवाने की योजना तैयार की है, ताकि बच्चों को शुरुआती स्तर पर ही बेहतर पोषण देकर उनकी स्थिति में सुधार लाया जा सके। इसके अलावा विभाग बच्चों को कुपोषण मुक्त करवाने के लिए भी प्रयासरत हैं। पिछले दिनों विभाग ने 69 अति कुपोषित बच्चों को सही आहार व सही निर्देशन से सामान्य वर्ग में लाया है।
डिजिटल निगरानी से हो रही ग्रोथ की मॉनिटरिंग
नई व्यवस्था के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रत्येक बच्चे की लंबाई, वजन और स्वास्थ्य संबंधी सभी आंकड़े नियमित रूप से पोषण ट्रैकर एप पर अपलोड कर रहे हैं। इससे बच्चों की वृद्धि पर लगातार नजर रखी जा सकेगी और यह भी आंकलन किया जाएगा कि अतिरिक्त पौष्टिक आहार का उनकी सेहत पर कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
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यदि किसी बच्चे की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होता है तो समय रहते उसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे। विभाग आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से अभिभावकों को भी संतुलित आहार, स्वच्छता और बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच के प्रति जागरूक कर रहा है ताकि घर पर भी बच्चों को पौष्टिक भोजन मिल सके।
पारंपरिक भोजन पर रहेगा जोर
महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी बलजीत कौर ने बताया कि केवल सप्लीमेंट या दवाओं पर निर्भर रहने की बजाय पारंपरिक खाद्य पदार्थ अधिक प्रभावी और लंबे समय तक लाभ देने वाले होते हैं।
इसी सोच के तहत बच्चों को गेहूं, घी और गुड़ से तैयार चूरमा तथा प्रोटीन, आयरन और फाइबर से भरपूर उबले हुए काले चने दिए जाएंगे। यह आहार बच्चों के वजन बढ़ाने, मांसपेशियों के विकास, खून की कमी दूर करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में सहायक माना जाता है।
प्रोजेक्ट के लिए चल रही प्रक्रिया
बलजीत कौर ने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल बच्चों का पेट भरना नहीं, बल्कि उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। इस प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए तैयारी चल रही है। बजट स्वीकृत करवाने की प्रक्रिया चल रही है।
जल्द ही आंगनबाड़ी केंद्रों में कुपोषित बच्चों को चूरमा और उबले हुए काले चने उपलब्ध करवाने की योजना शुरू कर दी जाएगी। विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी आएगी और उनके स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।