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    कुरुक्षेत्र में वेतन न मिलने से भड़के मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट के कर्मचारी, अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू; ओपीडी-आईपीडी सेवाएं ठप

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 09:16 PM (IST)

    मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट में तीन माह से वेतन न मिलने पर कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। ...और पढ़ें

    कुरुक्षेत्र में वेतन न मिलने से भड़के मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट के कर्मचारी (फोटो: जागरण)

    कुरुक्षेत्र में वेतन न मिलने से भड़के मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट के कर्मचारी (फोटो: जागरण)

    HighLights

    1. तीन माह से लंबित वेतन को लेकर धरना।

    2. ओपीडी-आईपीडी सेवाएं प्रभावित, इमरजेंसी जारी रहेगी।

    3. एसजीपीसी-एचएसजीएमसी विवाद का खामियाजा भुगत रहे कर्मचारी।

    संवाद सूत्र, शाहाबाद। मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर में पिछले तीन माह से लंबित वेतन को लेकर कर्मचारियों का आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। संस्थान के कर्मचारियों ने अपने संघर्ष को संगठित रूप देने के लिए मीरी-पीरी कर्मचारी संघर्ष समिति का गठन किया है, जिसकी अगुवाई 11 सदस्यीय कमेटी करेगी।

    समिति के नेतृत्व में शुक्रवार से संस्थान परिसर में अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना शुरू किया जाएगा। संघर्ष समिति के सदस्यों ने बताया कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों और उनके परिवारों को गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    कई बार संबंधित पक्षों से मांग उठाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिसके चलते अब आंदोलन का रास्ता अपनाना मजबूरी बन गया है। समिति ने बताया कि धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, इसका असर संस्थान की नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा।

    ओपीडी और आईपीडी सेवाएं प्रभावित

    उन्होंने कहा कि ओपीडी और आईपीडी सेवाएं प्रभावित होंगी। हालांकि, मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एमरजेंसी सेवाओं को बाधित नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है ताकि आपातकालीन स्थिति में आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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    कर्मचारियों का कहना है कि मीरी-पीरी संस्थान के प्रबंधन को लेकर एसजीपीसी और हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (एचएसजीएमसी) के बीच चल रहे विवाद का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। दोनों पक्ष प्रबंधन और वेतन भुगतान की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रहे हैं।

    संघर्ष समिति तीन प्रमुख मांगें प्रशासन एवं संबंधित प्रबंधन के समक्ष रखेगी। पहली, पिछले तीन माह से लंबित वेतन का तत्काल भुगतान किया जाए, ताकि कर्मचारियों को आर्थिक संकट से राहत मिल सके।

    दूसरी, कर्मचारियों के भविष्य को लेकर स्पष्ट निर्णय लिया जाए कि संस्थान का संचालन और वेतन भुगतान की जिम्मेदारी एसजीपीसी निभाएगी या एचएसजीएमसी, जिससे लंबे समय से बनी असमंजस की स्थिति समाप्त हो सके। तीसरी, कर्मचारियों के वेतन भुगतान की एक निश्चित एवं स्थायी तिथि घोषित की जाए, ताकि भविष्य में वेतन मिलने में अनावश्यक देरी न हो।

    चार करोड़ 20 लाख रुपये वेतन बकाया

    वेतन संकट का असर अब संस्थान के स्टाफ पर भी साफ दिखाई देने लगा है। 12 मई को न्यायालय द्वारा प्रबंधन संबंधी फैसला एचएसजीएमसी के पक्ष में आने के समय संस्थान में लगभग 375 से 380 कर्मचारी कार्यरत थे। पिछले करीब दो माह से वेतन नहीं मिलने के कारण कई कर्मचारी नौकरी छोड़ चुके हैं। वर्तमान में संस्थान में कर्मचारियों की संख्या घटकर करीब 335 से 340 रह गई है। पहले कर्मचारियों का कुल मासिक वेतन लगभग 1 करोड़ 50 लाख रुपये था, जो अब घटकर करीब 1 करोड़ 25 लाख से 1 करोड़ 30 लाख रुपये प्रतिमाह रह गया है। कर्मचारियों का करीब 4 करोड़ 20 लाख रुपये वेतन बकाया हो चुका है।