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    कुरुक्षेत्र सर्राफा बाजार में मंदी का दौर, नए गहनों की खरीदारी ठप; पुराने गहनों को नया रूप दे रहे लोग

    Updated: Sun, 17 May 2026 12:45 PM (GMT+05:30)

    सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों और मलमास के कारण कुरुक्षेत्र का सर्राफा बाजार 85% तक सुस्त पड़ गया है। ...और पढ़ें

    कुरुक्षेत्र का सर्राफा बाजार 85% तक सुस्त पड़ गया है (फोटो: जागरण)

    कुरुक्षेत्र का सर्राफा बाजार 85% तक सुस्त पड़ गया है (फोटो: जागरण)

    रीतिका एस. वोहरा, कुरुक्षेत्र। सोने व चांदी की लगातार बढ़ती कीमतों और मलमास के चलते जिले का सर्राफा बाजार सुस्त पड़ गया है। हालात अब यह है कि बाजार में सामान्य दिनों की तुलना में केवल 10 से 15 प्रतिशत की खरीदारी हो रही है।

    शादियों का सीजन होने के बावजूद भी लोग अभी नए आभूषणों को खरीदने से बच रहे हैं। जिले में करीब 400 ज्वेलरी दुकानों पर यही स्थिति है। सर्राफा एसोसिएशन के प्रधान मनोज गोयल ने बताया कि अब केवल ग्राहक पुराने गहने देकर नए डिजाइन तैयार बनवाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    ज्वेलर्स का कहना है कि शुभ कामों पर रोक और सबसे बड़ी वजह केंद्र सरकार की ओर सोने पर आयात शुल्क (इम्पोर्ट ड्यूटी) बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है। जिससे सोने की कीमतें बढ़ गई है। जहां मध्यम वर्ग के लिए गहने खरीदना मुश्किल हो गया है वहीं सोने के दाम बढ़ने से बाजारों में ग्राहकों की संख्या भी कम हो गई है।

    ड्यूटी बढ़ने से सोने के दाम छू रहे आसमान

    व्यापारियों का कहना है कि ड्यूटी बढ़ने से सोने के दाम आसमान छू रहे हैं। इससे आम परिवारों के लिए शादी-ब्याह की खरीदारी करना मुश्किल हो गया है। सर्राफा कारोबारी विपिन गुप्ता ने बताया कि सोने की खरीदारी पर काफी फर्क पड़ गया है।

    लोग नाममात्र की खरीदारी करने के लिए पहुंच रहे हैं। पहले शादी के सीजन में 30 से 50 हजार रुपये तक की खरीदारी करना आम बात थी। अब लोग सिर्फ डिजाइन देखकर लौट रहे हैं। कारीगरों के पास काम नहीं है और दुकानों में छाई खामोशी बता रही है कि बाजार की हालत खराब है।

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    पुराने गहनों से तैयार करवा रहे हैं नए गहने

    सर्राफा एसोसिएशन के प्रधान मनोज बताते हैं कि पिछले लगभग 20 दिनों से सोने व चांदी के कारोबार में 85 प्रतिशत तक की गिरावट आ चुकी है। मात्र 10 से 15 प्रतिशत का ही काम रह गया है।

    वहीं छोटे कारीगरों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो उन्हें अपना पुश्तैनी काम छोड़ना पड़ सकता है। अभी तो ग्राहकों ने भी खरीदारी को टाल दिया है। लेकिन जिनको ज्यादा जरूरत है वे लोग केवल पुराने गहनों को ही नया रूप देने की मांग कर रहे हैं।