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    कुरुक्षेत्र में मारकंडा नदी का जलस्तर कम होने से आंशिक राहत, फसलों की बर्बादी और भविष्य के खतरे से सहमे ग्रामीण

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 01:20 PM (IST)

    मारकंडा नदी का जलस्तर घटने से शाहबाद के बाढ़ प्रभावित गांवों को राहत मिली है, लेकिन खेतों में भरा पानी और भविष्य में बाढ़ का डर अभी भी बना हुआ है। ...और पढ़ें

    कुरुक्षेत्र में मारकंडा नदी का जलस्तर कम होने से आंशिक राहत (फोटो: जागरण)

    कुरुक्षेत्र में मारकंडा नदी का जलस्तर कम होने से आंशिक राहत (फोटो: जागरण)

    संवाद सूत्र, शाहाबाद। मारकंडा दरिया का जलस्तर तेजी से घटने के बाद रविवार को बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। एक दिन पहले शनिवार को जहां दरिया में 14 हजार 294 क्यूसेक पानी आने से कठवा, तंगौर और कलसाना सहित कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे, वहीं अब मारकंडा में मात्र 561 क्यूसेक, मुलाना में 7800 क्यूसेक और कालाअंब में 1032 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया।

    जलस्तर कम होने के साथ ही गांव कलसाना की आबादी और कठवा के मुख्य मार्ग से पानी उतर गया है, जिससे लोगों का आवागमन सामान्य होने लगा है। हालांकि खेतों में फैला पानी अब भी किसानों की चिंता का कारण बना हुआ है।

    ग्रामीणों के अनुसार गांव तंगौर, कठवा, कलसाना, मुगलमाजरा और मदुदां की करीब 2500 से 3000 एकड़ कृषि भूमि में लगी धान बाढ़ की चपेट में आ गई, जिसमें आधे से अधिक फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है।

    कठवा का मुख्य रास्ता पानी में डूब चूका था जिस कारण प्रशासन की और से रास्ता बंद का बोर्ड लगा दिया गया था। लेकिन अब पानी उतरने के बाद इस रास्ते से ग्रामीणों की आवाजाही शुरू हो गयी है।

    चार वर्षों से लगातार नुकसान

    गांव तंगौर के सरपंच सचिन कुमार, कठवा के पूर्व सरपंच अमरिंदर सिंह तथा अन्य ग्रामीणों ने कहा कि पिछले चार वर्षों से लगातार मारकंडा का पानी उनकी फसलों को बर्बाद कर रहा है। पिछले वर्ष भी मुख्यमंत्री सहित सत्ता और विपक्ष के कई बड़े नेता प्रभावित गांवों का दौरा कर चुके थे और स्थायी समाधान का भरोसा दिया गया था, पर आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

    ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे इस मुद्दे पर बड़ा निर्णय लेने को मजबूर होंगे। हर वर्ष उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर केवल अस्थायी इंतजाम किए जाते हैं।

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    जलस्तर घटा लेकिन बना हुआ है डर

    भले ही फिलहाल मारकंडा का जलस्तर काफी नीचे आ गया है, लेकिन ग्रामीणों में डर अभी भी बरकरार है। उनका कहना है कि अगर पहाड़ी क्षेत्रों में दोबारा तेज बारिश होती है तो दरिया फिर उफान पर आ सकता है और हालात दोबारा बिगड़ सकते हैं। इसी आशंका के चलते कई ग्रामीण लगातार मारकंडा दरिया के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं।

    बाजीगर कालोनी में भी घुसा था पानी

    मारकंडा दरिया का पानी शाहाबाद स्थित बाजीगर कालोनी के निचले हिस्से तक भी पहुंच गया था। पानी घरों में घुसने के कारण दो-तीन परिवारों को अस्थायी रूप से मारकंडा मंदिर में शरण लेनी पड़ी। हालांकि जलस्तर कम होने के बाद सभी परिवार वापस अपने घर लौट आए हैं और अब नुकसान का आकलन कर रहे हैं।


    बाढ़ का पानी कम होने के बावजूद प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। प्रभावित गांवों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा चिकित्सा और राहत संबंधी व्यवस्थाएं बनाए रखी गई हैं। प्रशासन का कहना है कि अगर दोबारा जलस्तर बढ़ता है तो तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जाएंगे।