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    Kanwar Yatra 2026: आज गंगा स्नान, कल से प्रस्थान करेंगे शिवभक्त; 11 अगस्त को बाघेश्वर धाम में लगेगा मेला

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 09:43 AM (IST)

    गुरु पूर्णिमा पर हरियाणा और एनसीआर से हजारों श्रद्धालु हरिद्वार में गंगा स्नान करेंगे, जिसके बाद 30 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू होगी। कांवड़िए 350 किम ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- ai generated

    सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- ai generated

    HighLights

    1. गुरु पूर्णिमा पर हरिद्वार में हजारों श्रद्धालु करेंगे गंगा स्नान।

    2. 30 जुलाई से शुरू होगी कांवड़ यात्रा, 350 किमी पदयात्रा।

    3. 11 अगस्त को बाघेश्वर धाम में लगेगा विशाल कांवड़ मेला।

    संवाद सहयोगी, कनीना। गुरु पूर्णिमा पर मंगलवार को हरियाणा सहित एनसीआर क्षेत्र से हजारों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचकर गंगा स्नान करेंगे। इसके साथ ही 30 जुलाई से कांवड़ यात्रा का सिलसिला शुरू हो जाएगा। श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हुए बाघोत स्थित प्रसिद्ध बाघेश्वर धाम समेत विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक करेंगे।

    बाघेश्वर धाम कांवड़ चढ़ाने के लिए पूरे क्षेत्र का प्रमुख आस्था केंद्र है। यहां 11 अगस्त को कांवड़ मेला लगेगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु कांवड़ अर्पित करेंगे। बैठी, खड़ी, झूला और टोकना कांवड़ लेकर श्रद्धालु करीब 350 किलोमीटर की पदयात्रा पूरी कर धाम पहुंचते हैं। रास्ते में विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों की ओर से सेवा शिविर भी लगाए जाएंगे।

    कनीना के श्रद्धालु सुमेर सिंह अब तक 48 बार कांवड़ अर्पित कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस बार उनका दल एक अगस्त को हरिद्वार के लिए रवाना होगा, तीन अगस्त को कांवड़ उठाएगा और आठ अगस्त तक बाघेश्वर धाम पहुंचने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और अनुशासन का भी प्रतीक है।

    गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाई जाती है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन गुरु का पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। मान्यता है कि गुरु ही व्यक्ति को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान का मार्ग दिखाते हैं।

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    अरविंद जोशी ने बताया कि भगवान शिव को प्रथम गुरु माना जाता है। गुरु पूर्णिमा पर गुरु पूजन, गंगा स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। सावन माह में बाघेश्वर धाम के स्वयंभू शिवलिंग पर विशेष पूजन और प्रत्येक सोमवार को मेले का आयोजन भी होता है।

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