महेंद्रगढ़ में SIR से बदले राजनीतिक समीकरण, हर विधानसभा क्षेत्र से कट गए 15 हजार से ज्यादा वोट
महेंद्रगढ़ जिले में एसआइआर के कारण लगभग 64 हजार वोट काटे गए हैं, जिससे आगामी 2029 विधानसभा चुनावों के राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। ...और पढ़ें

HighLights
महेंद्रगढ़ जिले में एसआइआर से 64 हजार वोट कटे।
प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से 15 हजार से अधिक वोट हटाए गए।
2029 विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक समीकरण बदलेंगे।
बलवान शर्मा, नारनौल। चुनाव में जहां एक-एक वोट का अत्यधिक महत्व होता है, वहीं एसआइआर के चलते करीब 64 हजार वोट कट गए हैं। आने वाले विधानसभा चुनाव भले ही 2029 में होंगे पर इन तीन साल के अंतराल में इतने वोट बढ़ जाएंगे, ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है।
महेंद्रगढ़ जिले में चार विधानसभा क्षेत्र हैं। 2024 के चुनाव परिणाम पर नजर डालें तो चार में से तीन में हार-जीत का अंतर दस हजार से कम रहा था। केवल नारनौल विधानसभा क्षेत्र ही ऐसा था, जिसमें यह अंतर 17 हजार 171 वोटों का था। वर्तमान एसआइआर के बाद आई स्थिति से स्पष्ट हुआ है कि हर विधानसभा क्षेत्र से 15 हजार से अधिक वोट कट गए।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
जाहिर है कि ये आंकड़े राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा करने के लिए काफी हैं। कटने वाले वोट किसी भी पार्टी से संबंधित हो सकते हैं, लेकिन मुख्य रूप से विजेता और उपविजेता के समीकरणों पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ सकता है।
कारण साफ है, इन दोनों को ही सर्वाधिक वोट मिले थे और कटने वाले वोट इनसे ही ज्यादा जुड़े होने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। अब हम जिले की बात करें तो 10597 मतदाता अनुपस्थित रहे हैं, जबकि 25 हजार 876 मतदाता स्थायी रूप से अन्यत्र स्थानांतरित हो गए हैं। 20 हजार 813 मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है।
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5726 मतदाताओं ने डुप्लीकेट वोट बनवा रखे थे। खैर यदि राजनीतिक नुकसान का विश्लेषण करें तो असल में अनुपस्थित और स्थानांतरित मतदाताओं के रूप में ज्यादा हुआ है। डुप्लीकेट वोट तो कटने ही थे और जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनका विश्लेषण उचित नहीं है।
यदि विधानसभा क्षेत्र वाइज विश्लेषण करें तो 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश यादव कांग्रेस प्रत्याशी राव नरेंद्र सिंह से 17171 वोटों से जीते थे। यह जिले का सर्वाधिक जीत अंतर रहा था। इस क्षेत्र से कुल 18144 वोट काटे गए हैं, जो कि जीत के अंतर से ज्यादा है। इसी तरह महेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो भाजपा प्रत्याशी कंवर सिंह यादव ने कांग्रेस प्रत्याशी राव दान सिंह को 2648 वोटों के अंतर से हराया था। इस विधानसभा क्षेत्र से 15809 वोट कट गए हैं। हार-जीत के अंतर से कटे हुए वोटों का आंकड़ा कई गुणा ज्यादा है।
बात करें अटेली विधानसभा क्षेत्र की तो स्वास्थ्यमंत्री आरती सिंह राव ने बसपा प्रत्याशी अतरलाल को 3085 वोटों के अंतर से हराया था। इस विधानसभा क्षेत्र में एसआइआर के बाद 15142 वोट कट गए हैं। जाहिर है कि जीत के अंतर से पांच गुणा वोट कट गए हैं और ऐसे में 2029 के विस चुनाव तक विजेता, उपविजेता और भावी प्रत्याशियों को इन कटे हुए वोटों की भरपाई के लिए बड़ी ताकत झोंकनी होगी।
इसी तरह बात करें नांगल चौधरी विधानसभा क्षेत्र की तो 2024 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मंजू चौधरी ने भाजपा प्रत्याशी डा.अभय सिंह यादव को 6,930 वोटों के अंतर से हराया था। इस विधानसभा क्षेत्र में 14876 वोट कट गए हैं।
तीन साल बाद होने वाले विस चुनाव में भावी प्रत्याशियों को अब नए सिरे से रणनीति बनानी होगी और कटे हुए वोटों की भरपाई के लिए नए वोटरों को अपने पाले में लाने के लिए ताकत झोंकनी होगी। ये आंकड़े अपने आप में खुद गवाही दे रहे हैं कि 2029 के विधानसभा में 2024 जैसी स्थिति नहीं रहने वाली है।
आने वाले इन तीन वर्षों में समीकरण काफी बदलेंगे और राजनीतिक परिदृश्य कुछ अलग होने वाले हैं। हालांकि राजनीति और क्रिकेट में भविष्य वाणी हमेशा सही साबित नहीं होती है पर एसआइआर के बाद वर्तमान में उपजे हालात तो इसी तरफ इशारा कर रहे हैं।