नौकरी नहीं, डेयरी को बनाया इनकम का जरिया; हर महीने ₹1.5 लाख कमा रहे महेंद्रगढ़ के ओमवीर
महेंद्रगढ़ के राता गांव के ओमवीर ने सरकारी नौकरी की बजाय पशुपालन और डेयरी व्यवसाय अपनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। ...और पढ़ें

HighLights
ओमवीर ने सरकारी नौकरी की बजाय डेयरी व्यवसाय चुना।
प्रतिमाह डेढ़ लाख रुपये की बचत कर रहे हैं।
दूध, घी, गोबर उत्पादों से आय के स्रोत बनाए।
संवाद सहयोगी, अटेली (महेंद्रगढ़)। सरकारी नौकरी की तैयारी में वर्षों लगाने वाले युवाओं के लिए महेंद्रगढ़ जिले के गांव राता का युवा ओमवीर एक प्रेरणा बनकर उभरा है। नौकरी की तलाश में शहरों की ओर जाने के बजाय उन्होंने पशुपालन और डेयरी व्यवसाय को अपनाया।
आज उनके पास करीब 80 पशु हैं, जिनमें लगभग दो दर्जन देशी नस्ल की गायें और शेष भैंसें शामिल हैं। डेयरी से निकलने वाला दूध अटेली शहर में अच्छे भाव में बिकता है, जबकि देशी गाय के दूध से तैयार घी 1800 रुपये प्रति किलो तक के भाव में बिकता है।
हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपये की बचत
इसके अलावा, छाछ, गोबर से बनी हवन की लकड़ी और गौमूत्र भी उनकी अतिरिक्त आय का माध्यम हैं। सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपये की बचत हो जाती है। यदि आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन अपनाया जाए तो पशुपालन आज के समय में युवाओं के लिए रोजगार का सबसे बेहतर विकल्प बन सकता है। शुरुआत में लोगों को लगता था कि डेयरी में इतनी आय संभव नहीं है, लेकिन मेहनत और सही प्रबंधन ने यह सोच बदल दी।
ओमवीर ने बताया, 'हमारे यहां दूध के साथ-साथ घी, छाछ, गौमूत्र और गोबर से बनने वाली हवन की लकड़ी भी बिकती है। हमने डेयरी के हर उत्पाद को आय का स्रोत बनाया है। मेरा मानना है कि युवा यदि केवल नौकरी के पीछे भागने के बजाय स्वरोजगार अपनाएं तो गांव में रहकर भी अच्छी कमाई कर सकते हैं। पशुपालन में मेहनत जरूर है, लेकिन आमदनी और आत्मसंतोष दोनों भरपूर मिलते हैं।'
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ओमवीर के पिता भीम सिंह ने कहा, 'मैं स्वयं नौकरी करता हूं, लेकिन कभी बेटे पर नौकरी करने का दबाव नहीं बनाया। मेरा मानना है कि यदि इकलौता बेटा भी नौकरी पर चला जाएगा तो घर, खेती और पशुपालन कौन संभालेगा।' ओमवीर ने डेयरी व्यवसाय को इस मुकाम तक पहुंचा दिया है कि परिवार की अच्छी आय हो रही है और कई लोगों को प्रेरणा भी मिल रही है।
सरकार भी पशुपालन को बढ़ावा दे रही है। यदि युवा इस क्षेत्र में आधुनिक तरीके अपनाएं तो उन्हें रोजगार के लिए कहीं भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ओमवीर की कहानी यह दर्शाती है कि आत्मनिर्भरता और मेहनत से किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है।