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    पेयजल पर करोड़ों रुपये खर्च, फिर भी ग्रामीण पानी खरीदने को मजबूर; कब मिलेगी राहत?

    Updated: Fri, 06 Feb 2026 06:24 PM (IST)

    मेवात के फिरोजपुर झिरका स्थित साकरस गांव में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की रे ...और पढ़ें

    मेवात के साकरस गांव में पानी का संकट गहराया। सोशल मीडिया

    मेवात के साकरस गांव में पानी का संकट गहराया। सोशल मीडिया

    संवाद सहयोगी, फिरोजपुर झिरका (मेवात)। मेवात में फिरोजपुर झिरका के गांव साकरस के लोगों को पेयजल आपूर्ति करने के लिए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी गांव के व्यक्ति पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं। पेयजल की आपूर्ति नहीं होने से परेशान ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।

    ग्रामीणों ने उपायुक्त नूंह अखिल पिलानी से मांग की है कि वे जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को आदेश देकर गांव में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था करवाएं। ग्राम पंचायत की आबादी लगभग 35 हजार है। इसमें ग्राम पंचायत के 22 वार्ड हैं।

    इस गांव में कई वर्षों से पेयजल संकट से ग्रामीण जूझ रहे थे। परेशान ग्रामीण पानी मोल खरीदकर पीने को मजबूर हैं। कहने को प्रदेश सरकार द्वारा 263 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई रेनीवेल परियोजना एवं इसके तहत फिरोजपुर झिरका एवं इसके साथ 80 गावों के लोगों को पर्याप्त पेयजल आपूर्ति होने की संभावना बनी थी।

    जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने इस योजना के तहत गांव साकरस में पानी के चार टैंक बनाए गए। रेनीवेल परियोजना के तहत बनाए गए चार टैंकों में से मात्र दो टैंकों को विभागीय अधिकारियों ने पाइप लाइन से जोड़ा है। जिससे गांव में मात्र 15 से 20 प्रतिशत क्षेत्र में ही पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।

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    गांव के कुरैशी मोहल्ला, भसोला मोहल्ला, शेखनियां मोहल्ला, मुख्य बाजार, बिलावत पट्टी सहित काफी क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति ठप पड़ी है। जिससे ग्रामीणों को 1500 रुपये प्रति टैंकर पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं।

    ग्रामीणों के अनुसार मीठे पानी का टैंकर 1500 रुपये प्रति टैंकर तथा कुछ खारेपन के पानी का टैंकर एक हजार रुपये प्रति टैंंकर खरीद रहे हैं। जिससे उनका काफी पैसे पानी खरीदने पर ही खर्च हो जाता है। लोगों ने पेयजल की पूर्ति कराने की मांग की है।

    -प्रदेश सरकार ने 263 करोड़ की रेनीवेल परियोजना बनाकर फिरोजपुर झिरका एवं 80 गावों के लोगों को पेयजल आपूर्ति करने के लिए क्रियांवित की है। लेकिन खंड़ के सबसे बड़े गांव साकरस में 80 प्रतिशत ग्रामीण बूंद- बूंद पानी को तरस रहे हैं। प्रदेश सरकार की योजनाओं पर सरकारी तंत्र सही तरह से कार्य नहीं कर रहा है। - फजरुद्दीन बेसर, पूर्व सरपंच ग्राम पंचायत साकरस

    जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा प्रदेश सरकार की योजनाओं को सही तरह से धरती पर अमलीजामा नहीं पहनाया जा रहा है। पेयजल आपूर्ति पर करोड़ों खर्च करने के बावजूद भी पीने का पानी मोल खरीदकर पीना पड रहा है। उपायुक्त नूंह अखिल पिलानी को चाहिए कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर साकरस गांव के लोगों को पर्याप्त मात्रा में पेयजल आपूर्ति करवाएं। - खुर्शीद अहमद,निवासी साकरस, पूर्व जिला पार्षद

    साकरस गांव में पानी के दो टैंकों को जोडऩे के लिए पाइप लाइन डालनी है। इसके लिए एस्टीमेट बनाकर विभाागीय अधिकारियों को भेजा जा चुका है। शीघ्र ही इस गांव में काम पूरा करवाकर प्रत्येक व्यक्ति को नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में पेयजल की आपूर्ति की जाएगी। फिलहाल गांव में पानी के दौ टैंकों से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। - इमरान खान, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, फिरोजपुर झिरका