नूंह में डीएमई-केएमपी एक्सप्रेसवे पर नींद की झपकी बन रहीं जानलेवा, छह महीने में 88 लोगों की मौत
नूंह जिले में डीएमई और केएमपी एक्सप्रेसवे पर नींद की झपकी और अवैध रूप से खड़े वाहनों के कारण सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। छह महीनों में 88 लोगों की मौ ...और पढ़ें

डीएमई पर अवैध रूप से खड़े ट्रक। जागरण अर्काइव
HighLights
नींद की झपकी और अवैध पार्किंग मुख्य कारण।
छह महीनों में 88 लोगों की सड़क हादसों में मौत।
जिले में ट्रामा सेंटर की कमी से इलाज में देरी।
मोहम्मद मुस्तफा, नूूंह। जिले की सीमा से गुजर रहे डीएमई और केएमपी पर आए दिन हो रही सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य सबब नींद की झपकी सामने आता है। इस एक्सप्रेस वे पर अधिकतर हादसे रात 12 बजे से सुबह पांच बजे के बीच होते हैं। इसके अलावा रात में अवैध रुप से खड़े होने वाले वाहन भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। हालांकि यातायात पुलिस लगातार अवैध रूप से खड़े होने वाले वाहनों पर शिकंजा कस रही है।
पुलिस ने बीस से अधिक ऐसे वाहन चालकों के विरुद्ध मामला भी दर्ज किया है, जो डीएमई पर अवैध रूप से वाहनों को कई कई घंटे तक खड़ा रखते हैं। इसके अलावा दिन में भी कुछ चालक गर्मी के कारण अपने टायरों को ठंडा करने के लिए भी खड़ा कर देते हैं।
लापरवाही से बढ़ रही परेशानी
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक छह महीनों में 88 लोगों की मौत हो चुकी है। आए दिन हो रहे हादसों से न तो लोग यातायात नियमों की पालना पर ध्यान दे रहे हैं और न ही ट्रक चालक रात के समय अवैध पार्किंग में डीएमई पर वाहनों को खड़ा करने से बाज आ रहे हैं।
बता दें कि जिले में सबसे अधिक सड़क हादसे केएमपी और डीएमई पर रात के समय नींद की झपकी के कारण होते हैं। इन मार्गों से लंबे सफर तय करने वाले लोग नींद आने पर वाहनों को ठहरने के लिए नहीं रोकते, जिसके कारण उन्हें नींद की झपकी आती है और वाहन का संतुलन बिगड़ने के कारण अवैध रूप से खड़े वाहनों से टकरा जाते हैं। उन्हें पता उस समय चलता है जब वाहन भिड़ जाता है।
इसके अलावा जिले के अन्य मार्गों पर हादसे यातायात नियमों की अवहेलना करने पर अधिक होते हैं। जिनमें सबसे अधिक बाइक सवार दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। जो हेलमेट नहीं लगाने के साथ साथ तीन सवारी या उससे अधिक सवारी बैठाकर सफर करते हैं। हालांकि एसपी द्वारा शुरु कराई गई चालान प्रक्रिया से यातयात नियम तोड़ने वालों पर शिकंजा कसने से लोकल मार्गाें पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में काफी हद तक सुधार हुआ है।
ट्रामा सेंटर की खल रही कमी: जिले में ट्रामा सेंटर न होने के कारण सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण भी उनकी मौत हो जाती है। घायल लोगों को पहले मांडीखेड़ा, उसके बाद उसे नलहड़ के लिए रेफर किया जाता है वहां से भी उन्हें हायर सेंटरों के लिए भेज दिया जाता है। जहां तक पहुंचने में मरीज को घंटोंभर का समय लग जाता है। जिससे कई बार रास्ते में ही मौत हो जाती है।
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मौत के आंकड़ों पर एक नजर
- जनवरी में 20 सड़क हादसे, दस लोगों की मौत
- फरवरी में 25 हदासे, दस की मौत
- मार्च में 16 हादसे, 18 की मौत
- अप्रेल में 20 सड़क हादसे, 13 की मौत
- मई में 69 हादसे, 27 की मौत
- जून में 30 हादसे, दस की मौत
डीएमई पर अवैध रूप से खड़े होने वाले वाहनों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है। 30 वाहन चालकों पर कार्रवाई की जा चुकी है। आगे भी लगातार कार्रवाई जारी है। यातायात नियमों के प्रति भी लोगों को जागरुक किया जा रहा है।
नरेंद्र कुमार, थाना प्रभारी ट्रेफिक मांडीखेड़ा