पलवल: छायंसा गांव में हेपेटाइटिस से एक और मौत, ग्रामीणों में दहशत; जांच के नाम पर खानापूर्ति
पलवल के छायंसा गांव में हेपेटाइटिस से मौतें नहीं रुक रहीं, जबकि स्वास्थ्य विभाग सामान्य स्थिति का दावा कर रहा है। हाल ही में 35 वर्षीय अर्शीदा की हेपे ...और पढ़ें
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छायंसा गांव में नहीं रुक रहा मौतों का सिलसिला। जागरण
HighLights
छायंसा गांव में हेपेटाइटिस से मौतें लगातार जारी हैं।
ग्रामीण जांच में खानापूर्ति और सुविधाओं की कमी बता रहे।
50 से अधिक हेपेटाइटिस मामले, 8 मौतें दर्ज हुईं।
जागरण संवाददाता, पलवल। पलवल में जिला स्वास्थ्य विभाग बेशक छायंसा गांव में सामान्य हालात होने का दावा कर रहा है, लेकिन गांव में लोगों की मौतों का सिलसिला नहीं रुक रहा है। शनिवार रात को भी अचानक बीमार हुई 35 वर्षीय अर्शीदा ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
महिला की तबीयत दो दिन पहले अचानक बिगड़ गई थी। उसे गंभीर हालत में नल्हड मेडिकल कॉलेज में दाखिल कराया गया था। स्वजन के अनुसार महिला में हेपेटाइटिस की पुष्टि हुई थी।
परिजनों के अनुसार, करीब दो दिन पहले अर्शीदा का हेपेटाइटिस से जुड़ा टेस्ट हुआ था। अगले दिन गुरुग्राम से आई रिपोर्ट में हेपेटाइटिस की पुष्टि हुई थी। हालांकि, हथीन के एसएमओ डॉ. संजय शर्मा का कहना है कि अर्शीदा की मौत के कारणों को जानने के लिए वह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
इसी तर 27 फरवरी को गांव की रहने वाली 45 वर्षीय महिला मेमुना की हेपेटाइटिस बी के संक्रमण से मौत हो गई थी, जिसकी पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने भी की है।
ग्रामीणों का कहना, जांच के नाम पर हो रही खानापूर्ति
गांव में फैले संक्रमण को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) की टीम ने गांव का दौरा कर चुकी है। जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम भी बीते एक महीने से घर-घर जाकर जांच और टीकाकरण का दावा कर रही है, लेकिन हेपेटाइटिस से मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अचानक तबीयत बिगड़ने से हो रही मौतों से गांव में भय का माहौल है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। स्वास्थ्य जांच रिपोर्ट कई-कई दिन तक नहीं दी जाती। गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में न तो डाक्टर रहते हैं और न ही दवाएं। ऐसे में इस बीमारी पर रोकथाम नहीं लग पा रही है। गांव में अभी भी पेयजल की आपूर्ति सुचारू रूप से नहीं हो पाई है।
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उधर, जिला स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि वर्तमान में गांव की स्थिति पूरी तरह स्थिर है। रविवार को जिला सिविल सर्जन डॉ. सतिन्द्र वशिष्ठ के कार्यालय से जारी बयान के अनुसार स्वास्थ्य शिविरों में केवल एक-दो मरीज ही बुखार एवं पेट दर्द की शिकायत के साथ सामने आ रहे हैं, जिनका मौके पर ही स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
चिकित्सकों से ही उपचार करवाएं
स्वास्थ्य विभाग द्वारा आमजन से अपील की गई है कि किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर झोलाछाप से उपचार लेने के बजाय केवल पंजीकृत एवं अधिकृत चिकित्सकों से ही उपचार करवाएं। जिला प्रशासन पलवल एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूरे मामले पर लगातार नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकता अनुसार सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि छह हजार की आबादी वाले छायंसा गांव में फरवरी माह की शुरुआत से ही हेपेटाइटिस और पीलिया के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। करीब 50 से अधिक हेपिटाइटिस बी और सी के मामले सामने आ चुके हैं। हेपिटाइटिस बी और सी से पीड़ित पांच मरीजों की मौत भी हो चुकी है। साथ ही तीन मरीज पीलिया के कारण जान गंवा चुके हैं। हालांकि जिला स्वास्थ्य विभाग बीते कुछ दिनों से गांव में सामान्य हालत होने का दावा कर रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उनकी टीम घर-घर सर्वे अभियान के तहत तीन हजार से ज्यादा घरों की स्क्रीनिंग कर चुकी है। इसके अतिरिक्त 240 से ज्यादा व्यक्तियों को हेपेटाइटिस-बी का टीकाकरण किया गया। हेपेटाइटिस ए एवं ई लेप्टोस्पायरोसिस तथा स्क्रब टायफस की जांच हेतु 60 नमूने लिए गए, जिनमें से कोई भी पाजिटिव नहीं पाया गया, लेकिन लगातार हो रही मौत से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।