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    हरियाणा के बाद अब इन मार्गों पर चलेंगी 35 हाइड्रोजन ट्रेनें, चेक करें रूट

    Updated: Wed, 15 Jul 2026 08:15 PM (IST)

    प्रधानमंत्री मोदी 17 जुलाई को जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे, जो देश को स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन की दिशा में आगे बढ़ाएगी। ...और पढ़ें

    हेरिटेज और पर्वतीय रेल मार्गों पर चलेंगी 35 हाइड्रोजन ट्रेनें। फोटो जागरण

    हेरिटेज और पर्वतीय रेल मार्गों पर चलेंगी 35 हाइड्रोजन ट्रेनें। फोटो जागरण

    HighLights

    1. जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ।

    2. 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य, 'हाइड्रोजन फोर हेरिटेज' योजना।

    3. हरियाणा बनेगा भविष्य की हरित रेल तकनीक का प्रवेश द्वार।

    अनुराग अग्रवाल, चंडीगढ़। हरियाणा 17 जुलाई को भारतीय रेलवे के इतिहास के एक ऐसे अध्याय का साक्षी बनेगा, जो भविष्य के स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन की दिशा तय करेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जींद से देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

    इसके साथ ही भारत पर्यावरण अनुकूल रेल तकनीक अपनाने वाले दुनिया के चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो जाएगा। प्रधानमंत्री इसी कार्यक्रम में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं से विकसित जींद और नरवाना रेलवे स्टेशनों का भी लोकार्पण करेंगे।

    2070 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य

    देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन केवल एक नई रेल सेवा नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे के डीकार्बोनाइजेशन अभियान की औपचारिक शुरुआत मानी जा रही है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है।

    इसी लक्ष्य को आधार बनाकर रेलवे ने 'हाइड्रोजन फोर हेरिटेज' योजना तैयार की है, जिसके तहत देश के हेरिटेज और पर्वतीय रेल मार्गों पर चरणबद्ध ढंग से 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाई जाएंगी। जींद से शुरू होने वाली यह सेवा उसी महत्वाकांक्षी योजना की पहली कड़ी है।

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    इन मार्गों पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की तैयारी

    प्रत्येक हाइड्रोजन ट्रेन के निर्माण पर लगभग 80 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि प्रत्येक रूट पर हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और रिफ्यूलिंग जैसी आधारभूत सुविधाएं विकसित करने के लिए करीब 70 करोड़ रुपये अलग से लगाए जाएंगे।

    योजना के अगले चरणों में कालका-शिमला, दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, नीलगिरी माउंटेन रेलवे, कांगड़ा वैली रेलवे और माथेरान हिल रेलवे जैसे ऐतिहासिक रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनें संचालित करने की तैयारी है।

    जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलने वाली यह 10 कोच की ट्रेन आधुनिक 1,200 किलोवाट क्षमता वाले हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम से लैस है। इसमें एक बार में 2,638 यात्री यात्रा कर सकेंगे।

    ट्रेन 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में सक्षम है और लगभग 89 किलोमीटर का सफर करीब दो घंटे में पूरा करेगी। फिलहाल सप्ताह में छह दिन इसका संचालन होगा, जबकि रविवार को रखरखाव किया जाएगा।

    भविष्य में प्रतिदिन दो फेरों का संचालन संभव

    भविष्य में प्रतिदिन दो फेरे चलाने की योजना है। यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रेन में आरामदायक सीटें, पंखे, मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट, खड़े यात्रियों के लिए हैंडग्रिप और आधुनिक यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

    ट्रेन का निर्माण चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी में हुआ है। इसके सुरक्षित संचालन के लिए छह लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और दो गार्डों को चेन्नई तथा गुजरात में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

    जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन के बाद अब भारत में हाइड्रोजन ट्रेन

    हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें डीजल की जगह हाइड्रोजन से बिजली तैयार होती है। इस प्रक्रिया में कार्बन डाइआक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता और उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प निकलती है।

    यही कारण है कि इसे भविष्य के हरित परिवहन का सबसे प्रभावी विकल्प माना जा रहा है। इस उपलब्धि के साथ भारत जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन के बाद हाइड्रोजन ट्रेन संचालित करने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा।

    हरियाणा बनेगा भविष्य की रेल तकनीक का प्रवेश द्वार

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आधुनिक, स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ हरियाणा की धरती से होना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है।

    यह परियोजना विकसित भारत, हरित ऊर्जा और अत्याधुनिक तकनीक आधारित परिवहन व्यवस्था के संकल्प को नई मजबूती देगी तथा हरियाणा को भविष्य की रेल तकनीक का प्रवेश द्वार बनाएगी।

    'हाइड्रोजन फोर हेरिटेज' योजना क्या है?

    'हाइड्रोजन फोर हेरिटेज' योजना भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसमें वर्ष 2070 के नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित है, ताकि विरासत (हेरिटेज) और ग्रामीण मार्गों पर चल रहे पुराने डीजल इंजनों की जगह पर्यावरण-अनुकूल विकल्प उपलब्ध कराया जा सके।

    • - देश के हेरिटेज और पर्वतीय रेल मार्गों पर 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाई जाएंगी।
    • - प्रत्येक ट्रेन की लागत करीब 80 करोड़ रुपये।
    • - प्रत्येक रूट पर हाइड्रोजन इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए लगभग 70 करोड़ रुपये का निवेश।
    • - कालका-शिमला, दार्जिलिंग, नीलगिरि, कांगड़ा वैली और माथेरान जैसे ऐतिहासिक रूट योजना में शामिल।

    क्यों खास है देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन?

    • - जींद-सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर के रेलखंड पर संचालन।
    • - 10 कोच, 2,638 यात्रियों की क्षमता।
    • - 1,200 किलोवाट का हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम।
    • - 110-140 किमी प्रति घंटा की अधिकतम गति।
    • - डीजल की बजाय हाइड्रोजन से बिजली उत्पादन, कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य।
    • - आधुनिक यात्री सुविधाओं से लैस, छह दिन नियमित संचालन, दूसरे चरण में दो फेरे चलाने की योजना।