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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 11, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Haryana News: लोकसभा चुनाव के बाद JJP को लगा फिर बड़ा झटका, अब इन दिग्गज नेताओं ने थाम लिया कमल

    Updated: Tue, 11 Jun 2024 09:23 PM (IST)

    हरियाणा में जजपा (JJP) को लग रहे झटके रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। प्रदेश के सोनीपत जिले से पार्टी के दो दिग्गज नेताओं ने बीजेपी की सदस्यता ले ली है। ...और पढ़ें

    लोकसभा चुनाव के बाद JJP को लगा फिर बड़ा झटका (फाइल फोटो)।
    लोकसभा चुनाव के बाद JJP को लगा फिर बड़ा झटका (फाइल फोटो)।

    HighLights

    1. भाजपा का जजपा को बड़ा झटका
    2. जजपा के मजबूत चेहरे भूपेंद्र और पवन ने थामा कमल
    3. चंडीगढ़ में सीएम नायब सैनी ने दोनों वरिष्ठ नेताओं को भाजपा में कराया शामिल

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। लोकसभा चुनाव के दौरान झटके पर झटके झेल चुकी जननायक जनता पार्टी (जजपा) के लिए यह झटके अभी बंद नहीं हुए हैं। मंगलवार को सोनीपत जिले से पार्टी के दो दिग्गज नेताओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। बरौदा हलके के भूपेंद्र सिंह मलिक और खरखौदा के पवन खरखौदा सोनीपत जिले में जजपा के मजबूत चेहरे थे। मंगलवार को सीएम नायब सिंह सैनी ने दोनों को भाजपा की सदस्यता ग्रहण करवाई।

    सीएम नायब सैनी ने दिलाई सदस्यता

    ज्वाइनिंग के मौके पर सीएम के एडवाइजर (पब्लिसिटी) तरुण भंडारी और राजनीतिक सलाहकार भारत भूषण भारती भी मौजूद रहे। पवन खरखौदा को भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार के दौरान जजपा कोटे से चेयरमैन भी लगाया हुआ था। पवन ने 2019 का विधानसभा चुनाव जजपा के टिकट पर खरखौदा से लड़ा था।

    इस चुनाव में कांग्रेस के जयवीर सिंह वाल्मीकि ने 38 हजार 577 वोट लेकर जीत हासिल की थी। पवन ने 37 हजार 33 वोट लेकर कड़ा मुकाबला किया था। उनका हार का अंतर महज 1544 मतों का रहा। भाजपा प्रत्याशी मीना रानी को 20 हजार 542 वोट मिले थे।

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    नाराजगी की हो सकती है ये वजह

    भूपेंद्र सिंह मलिक ने 2019 का विधानसभा चुनाव जजपा टिकट पर बरौदा हलके से लड़ा था। भूपेंद्र मलिक यह चुनाव कांग्रेस के श्रीकृष्ण हुड्डा के हाथों हारे थे। चुनाव में भूपेंद्र सिंह मलिक ने 32 हजार 480 वोट हासिल किए थे। श्रीकृष्ण हुड्डा के निधन के बाद 2020 में हुए उपचुनाव में योगेश्वर दत्त ने भाजपा-जजपा गठबंधन के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था। उस समय भी भूपेंद्र मलिक को चुनाव लड़वाने की बात उठी थी लेकिन योगेश्वर दत्त टिकट लेने में कामयाब रहे थे।

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