2017 डेरा हिंसा मामला! आरोपित बगीचा सिंह को आखिरी मौका, कड़ी शर्तों के साथ पंचकूला Court से मिली जमानत
पंचकूला कोर्ट ने 2017 डेरा हिंसा के आरोपी बगीचा सिंह को कड़ी शर्तों के साथ जमानत दे दी है। वह करीब 10 महीने तक गैरहाजिर रहने के बाद आत्मसमर्पण कर जेल ...और पढ़ें

पंचकूला जिला अदालत ने सुनाया फैसला।
HighLights
आरोपित 10 माह गैरहाजिर रहने के बाद जेल में था।
दंगा और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज है केस।
50 हजार की एफडीआर जमा करनी होगी, देश से बाहर नहीं जा सकेगा।
अंकेश ठाकुर, पंचकूला। 2017 में सिरसा डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह को सजा के दौरान पंचकूला में हुई हिंसा के आरोपित सिरसा निवासी 50 वर्षीय बगीचा सिंह को आखिरकार कड़ी शर्तों के साथ जमानत मिल गई है। वह करीब 10 माह तक अदालत से गैरहाजिर था।
पंचकूला जिला अदालत ने यह साफ करते हुए नियमित जमानत मंजूर की कि आरोपित की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं की जाएगी, लेकिन मुकदमे की धीमी रफ्तार और उसके आत्मसमर्पण को देखते हुए उसे एक और अवसर दिया जा रहा है।
अदालत ने चेतावनी भी दी कि यदि भविष्य में किसी भी शर्त का उल्लंघन किया तो जमानत तुरंत रद कर दी जाएगी। 25 अगस्त 2017 को सेक्टर-5 थाना में दर्ज इस मामले में सिरसा निवासी 50 वर्षीय बगीचा सिंह पर दंगा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, हत्या के प्रयास, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम समेत कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है।
आरोपित पहले जमानत पर था, लेकिन 19 सितंबर 2025 को अदालत में पेश न होने पर उसकी जमानत रद कर दी गई थी और गिरफ्तारी वारंट जारी हुए। इसके बाद उसने 10 जुलाई 2026 को अदालत में सरेंडर किया और तब से जेल में था।
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सुनवाई के दौरान आरोपित ने दलील दी कि उसने गलती से अगली तारीख 19 सितंबर के बजाय 29 सितंबर लिख ली थी, इसलिए अदालत नहीं पहुंच सका। दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि आरोपित जानबूझकर गैरहाजिर रहा और मुकदमे में देरी करता रहा, इसलिए उसे दोबारा जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
इन शर्तों पर मिली जमानत
अदालत ने 50 हजार रुपये के निजी मुचलके, इतनी ही राशि की एक जमानत, 50 हजार रुपये की एफडीआर जमा कराने और मोबाइल नंबर, पता और अन्य शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। आरोपित लगातार दो तारीखों पर गैरहाजिर नहीं रह सकेगा, किसी गवाह को प्रभावित नहीं करेगा और बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जा सकेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी शर्त के उल्लंघन पर जांच एजेंसी जमानत रद्द कराने के लिए आवेदन कर सकेगी।