'गुटबाजी छोड़ पार्टी के लिए लड़ें...', BJP के अभेद्य किले में सेंध लगाने दक्षिण हरियाणा आ रहे कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त
हरियाणा कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त दक्षिण हरियाणा के जिलों का दौरा कर बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। ...और पढ़ें
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कांग्रेस की बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने के प्रयास में संजय दत्त।
HighLights
संजय दत्त का दक्षिण हरियाणा में संगठन मजबूत करने का दौरा
कभी कांग्रेस का गढ़ रहा क्षेत्र अब भाजपा का किला
गुटबाजी और कमजोर संगठन कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती
सत्येंद्र सिंह, चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी संजय सतीशचंद्र दत्त दूसरे चरण में दक्षिण हरियाणा के कई जिलों का दौरा करने वाले हैं। वे जिलाध्यक्षों के साथ बैठकें कर बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने के इरादे से 30 जुलाई को आ रहे हैं।
तीन अगस्त तक प्रभारी गुरुग्रांम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह और रेवाड़ी जिलों का दौरा कर बैठकें करेंगे। यह दौरा उनके लिए बड़ी चुनौती वाला होगा। क्योंकि 12 साल पहले जहां दक्षिण हरियाणा कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, वहीं अब भाजपा का गढ़ बन चुका है।
प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के लिए भी यहां बड़ी चुनौती है, क्योंकि वे दक्षिण हरियाणा के जिला नारनौल के रहने वाले हैं। भाजपा के मजबूत किले को भेदने के लिए संजय दत्त को सबसे पहले अपने कार्यकर्ताओं को यह सीख देनी होगी की पार्टी के लिए लड़ने की आदत डालें।
अभी देखने में यह आता है कि अधिकतर कांग्रेसी कार्यकर्ता अपने आकाओं के इशारे पर ही काम करते नजर आते हैं। उनके लिए पार्टी सर्वोपरि नहीं हैं। कुछ नेता भी नहीं चाहते हैं कि संगठन मजबूत हो और उनपर किसी तरह का संगठन का अंकुश रहे।
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करीब 11 साल तक बगैर संगठन के काम करने की आदी हो चुके कांग्रेस के कुछ नेता संगठन क्या होता है यह भूल चुके हैं। यही वजह है कि इस क्षेत्र से कांग्रेस को एक भी लोकसभा सीट पर जीत नहीं मिली, विधानसभा चुनाव में भी करारी हार का सामना करना पड़ा था। निगम चुनावों में पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया। हालांकि, जिलाध्यक्षों के चयन के बाद पार्टी के पुराने कार्यकर्ता कांग्रेस पार्टी से जुड़ने लगे हैं, लेकिन अभी संगठन इस स्थिति में नहीं है कि किसी चुनाव में मजबूत संगठन वाले सत्ताधारी दल का सामना कर सके।
मेवात में कांग्रेस मजबूत थी पर हथीन से कांग्रेस विधायक मोहम्मद इसराइल पार्टी का साथ लगभग छोड़ चुके हैं। राज्यसभा चुनाव में उनके ऊपर क्रास वोटिंग करने का आरोप लगा। तब से वह कई बार भाजपा सरकार के मंच पर नजर आ चुके हैं।
पुन्हाना के कांग्रेसी विधायक पूर्व मंत्री मोहम्मद इलियास का भी कांग्रेस से मोहभंग हो चुका है। उनके बेटे ने तो भाजपा ज्वाइन भी कर ली है। इन हालातों में कांग्रेस प्रभारी को संगठन मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।
हालांकि प्रभारी संगठन सृजन के शिल्पकार माने जाते हैं। पद संभालते ही उन्होंने जिस तरह से प्रदेश के दौरे करने शुरू किए, उससे उनमें संगठन सृजन की कुछ झलक भी दिखाई देती है। इसके पूर्व कोई भी प्रदेश प्रभारी जिलास्तर तक इतना सक्रिय नहीं रहा है।
उनसे पहले के प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने जिला स्तरीय दौरे शुरू किए थे, लेकिन तब तक वे कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बन चुके हैं। अब देखना यह होगा कि प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष मिलकर पार्टी से गुटबाजी दूर कर कार्यकर्ताओं व नेताओं को एकता का मंत्र किस स्तर तक पढ़ाने में सफल होते हैं।