सभी विभागाध्यक्षों को देना होगा बैंक खातों का 5 साल का हिसाब, CBI जांच के बीच हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला
हरियाणा सरकार ने 650 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की सीबीआई जांच के बीच सभी विभागाध्यक्षों से पिछले पांच साल के बैंक खातों का विस्तृत हिसाब मांगा है। ...और पढ़ें

हरियाणा सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों से मांगा बैंक खातों का 5 साल का हिसाब। फाइल फोटो
HighLights
हरियाणा सरकार ने विभागाध्यक्षों से बैंक खातों का हिसाब मांगा।
650 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की सीबीआई जांच जारी।
वित्त विभाग ने पांच साल का विस्तृत ब्योरा तलब किया।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में 650 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की सीबीआइ जांच के बीच प्रदेश सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों से बैंक खातों का पिछले पांच साल का हिसाब मांग लिया है। विभागाध्यक्षों को एक सप्ताह के अंदर हार्ड कापी और साफ्ट कापी वित्त विभाग को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, एयू स्माल फाइनांस तथा कोटक महिंद्रा बैंक घोटाले में आठ विभागों का नाम आ चुका है। इस घोटाले में प्रदेश के तीन आइएएस अधिकारियों समेत करीब एक दर्जन अधिकारी व कर्मचारी जेल में हैं। घोटालों की जांच के बीच वित्त विभाग ने सभी विभागों से रिपोर्ट तलब कर ली है।
ये भी विवरण देना होगा
वित्त विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक की जानकारी निर्धारित प्रोफार्मा में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए विभागों को बताना होगा कि 31 मार्च तक कुल कितने डीडीओ बैंक खाते संचालित थे। इन खातों में वित्तीय वर्ष के दौरान कितना खर्च हुआ और 31 मार्च को खातों में कितनी राशि शेष थी, इसका भी विवरण देना होगा।
वित्त विभाग ने 50 प्रतिशत से कम खर्च वाले डीडीओ बैंक खाते, 50 प्रतिशत से लेकर 99 प्रतिशत तक खर्च वाले खाते तथा 100 प्रतिशत खर्च वाले डीडीओ बैंक खातों की जानकारी मांगी है। सरकार की तरफ से उन खातों के बारे में ब्योरा मांगा गया है, जिनमें कोई पैसा खर्च नहीं हुआ है।
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तुलनात्मक रिकॉर्ड तैयार करवा रही सरकार
ऐसे डीडीओ बैंक खातों की संख्या, संबंधित डीडीओ का विभाग, पदनाम और नाम, बैंक का नाम, बैंक खाता नंबर तथा वित्त वर्षों के दौरान 31 मार्च को मौजूद क्लोजिंग बैलेंस की डिटेल मांगी गई है। वित्त विभाग ने जानकारी के लिए पांच वित्तीय वर्षों—2021-22, 2022-23, 2023-24, 2024-25 और 2025-26 को शामिल किया है। सरकार पांच साल की अवधि में डीडीओ खातों में हुए लेन-देन और बची राशि का तुलनात्मक रिकार्ड तैयार करवा रही है।