हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में मिलेंगी बड़े प्राइवेट हॉस्पीटलों जैसी सुविधाएं, मेदांता फाउंडेशन के साथ होगा MoU पर हस्ताक्षर
हरियाणा सरकार मेदांता फाउंडेशन के साथ मिलकर ग्रामीण सरकारी अस्पतालों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाएगी। ...और पढ़ें
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सरकारी अस्पतालों में मिलेंगी बड़े प्राइवेट हॉस्पीटलों जैसी सुविधाएं। फाइल फोटो
HighLights
ग्रामीण अस्पतालों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का उन्नयन।
मेदांता फाउंडेशन के साथ साझेदारी, पीपीपी मॉडल पर काम।
अटेली, फर्रुखनगर, मीरपुर में मिलेंगी निजी अस्पताल जैसी सुविधाएं।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में अब महिलाओं को प्रसव या नवजात शिशु के इलाज के लिए महंगे अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। प्रदेश सरकार ग्रामीण इलाकों के सरकारी अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने जा रही है।
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने मंगलवार को एक बड़े हेल्थ मिशन की घोषणा करते हुए बताया कि जल्द ही मेदांता फाउंडेशन के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
इस साझेदारी के जरिए अटेली, फर्रुखनगर और मीरपुर के सरकारी अस्पतालों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अपग्रेड किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि गांव की मां और नवजात को भी वही सुविधा मिले, जो बड़े निजी अस्पतालों में मिलती है।
पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) के तहत अटेली के उप जिला अस्पताल और फर्रुखनगर व मीरपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसूति सेवाओं को आधुनिक बनाया जाएगा। लेबर रूम को हाईटेक सुविधाओं से लैस किया जाएगा, जबकि सी-सेक्शन आपरेशन थिएटरों को भी नए उपकरणों और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस किया जाएगा।
नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए विशेष यूनिट तैयार होंगी ताकि जन्म के बाद किसी भी आपात स्थिति में तुरंत इलाज मिल सके। इसके अलावा अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सेवाएं, एम्बुलेंस सपोर्ट और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर रहेगा।
सरकार केवल अस्पतालों की दीवारें चमकाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। योजना का अहम हिस्सा डाक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की स्किल ट्रेनिंग भी है। मेदांता के विशेषज्ञ स्वास्थ्य कर्मियों को आधुनिक मातृ एवं शिशु देखभाल की ट्रेनिंग देंगे, ताकि छोटे शहरों के अस्पतालों में भी मरीजों को बेहतर और भरोसेमंद इलाज मिल सके।
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स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि यह पहल ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदलने वाली साबित होगी। इससे गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों को समय पर सुरक्षित इलाज मिलेगा और बड़े अस्पतालों पर निर्भरता भी घटेगी।
यह एमओयू शुरुआत में तीन वर्षों के लिए लागू किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि समझौते के तुरंत बाद अटेली में असर दिखना शुरू हो जाएगा, जबकि छह महीने के भीतर फर्रुखनगर और मीरपुर के अस्पतालों में भी नई स्वास्थ्य सुविधाएं जमीन पर नजर आने लगेंगी।
सरकार इस माडल को भविष्य में हरियाणा के अन्य कम सेवा वाले क्षेत्रों में भी लागू करने की तैयारी में है। यानी आने वाले समय में गांवों के सरकारी अस्पताल केवल रेफर सेंटर नहीं, बल्कि भरोसेमंद इलाज के मजबूत केंद्र बनते नजर आ सकते हैं।