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    नीट-एसएस टॉपर प्रोफेसर को अध्ययन अवकाश में बाधा, हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार के अधिकारियों को लगाई फटकार

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 01:32 PM (IST)

    नीट-सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा में प्रथम रैंक प्राप्त प्रोफेसर कुलजीत कुमार को अध्ययन अवकाश और बांड निष्पादन में अधिकारियों की लापरवाही के कारण पंजाब एव ...और पढ़ें

    नीट-एसएस टॉपर प्रोफेसर को अध्ययन अवकाश में बाधा (हाई कोर्ट फोटो)

    नीट-एसएस टॉपर प्रोफेसर को अध्ययन अवकाश में बाधा (हाई कोर्ट फोटो)

    HighLights

    1. प्रोफेसर कुलजीत कुमार ने नीट-एसएस में प्रथम रैंक हासिल की।

    2. अधिकारियों की लापरवाही से अध्ययन अवकाश और बांड अटका।

    3. हाई कोर्ट ने 10 अगस्त तक बांड निष्पादन का आदेश दिया।

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। नीट-सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा में प्रथम रैंक प्राप्त करने वाले हरियाणा के एक प्रोफेसर को उच्च शिक्षा के लिए अध्ययन अवकाश और आवश्यक बांड की औपचारिकता में अधिकारियों की लापरवाही के कारण पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

    जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा कि फरवरी 2026 से बांड निष्पादन का मामला लंबित रखना संबंधित अधिकारियों का 'असंवेदनशील रवैया और प्रशासनिक उदासीनता' है। हाई कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 10 अगस्त 2026 को शाम पांच बजे तक याचिकाकर्ता को आवश्यक बांड निष्पादित करने की सुविधा उपलब्ध कराएं। ऐसा न करने पर संबंधित अधिकारियों से पांच लाख रुपये जुर्माने के रूप में वसूले जाएंगे।

    जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने यह आदेश कुलजीत कुमार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिका में पांच फरवरी 2026 के पत्र के अनुपालन में बांड और बैंक गारंटी निष्पादित करने के लिए आवश्यक प्रारूप उपलब्ध कराने तथा बाल अस्थि रोग विशेषज्ञता में एमसीएच की पढ़ाई के लिए अध्ययन अवकाश देने की मांग की गई थी।

    याचिकाकर्ता वर्तमान में कल्पना चावला राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, करनाल में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें 22 अक्टूबर 2016 को आर्थोपेडिक्स विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर नियुक्त किया गया था। उन्होंने वर्ष 2025 की नीट-सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा में शामिल होने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था, जिसे पांच फरवरी 2026 को जारी किया गया। इसके बाद उन्होंने नीट-एसएस परीक्षा में आर्थोपेडिक्स समूह में प्रथम रैंक हासिल की।

    याचिकाकर्ता ने बाल अस्थि रोग में एमसीएच करने के लिए तीन वर्ष के वेतन सहित अध्ययन अवकाश का आवेदन किया। इसके लिए उन्हें बांड के साथ बैंक गारंटी भी जमा करनी थी। हालांकि, बांड निष्पादन का मामला फरवरी 2026 से लंबित रहा।

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    एक जून 2026 को भी संबंधित अधिकारी ने उच्च अधिकारी से अनुरोध किया कि आवश्यक कार्रवाई जल्द की जाए, ताकि याचिकाकर्ता अध्ययन अवकाश पर जा सकें और जरूरी बांड निष्पादित कर सकें। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट को बताया कि नए संस्थान में प्रवेश की अंतिम तिथि 12 अगस्त 2026 है। समय पर बांड निष्पादित नहीं होने पर उन्हें उच्च शिक्षा के अवसर से वंचित होना पड़ सकता है, जिसका उनके करियर पर दूरगामी असर पड़ सकता है। हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि याचिकाकर्ता मेधावी विद्यार्थी हैं और उन्होंने वर्ष 2025 में आयोजित नीट-सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा में प्रथम रैंक हासिल की है।

    इसलिए वह उच्च शिक्षा प्राप्त करने के हकदार हैं। हाई कोर्ट ने मामले का निपटारा करते हुए संबंधित अधिकारियों को 10 अगस्त 2026 को शाम पांच बजे तक आवश्यक बांड निष्पादित कराने की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। आदेश का पालन न होने पर संबंधित अधिकारियों से पांच लाख रुपये की लागत वसूली जाएगी।