Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    इंदिरा गांधी के योग गुरु रहे धीरेंद्र ब्रह्मचारी के आश्रम को चलाएगी हरियाणा सरकार, अधिकारी संभालेंगे कमान

    Updated: Sun, 15 Mar 2026 09:08 AM (IST)

    हरियाणा सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी के आश्रम और अपर्णा संस्था का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया है। अब एक आ ...और पढ़ें

    हरियाणा सरकार संभालेगी धीरेंद्र ब्रह्मचारी आश्रम की कमान, भूमि विवाद के बाद बड़ा फैसला।

    हरियाणा सरकार संभालेगी धीरेंद्र ब्रह्मचारी आश्रम की कमान, भूमि विवाद के बाद बड़ा फैसला।

    HighLights

    1. हरियाणा सरकार ने धीरेंद्र ब्रह्मचारी आश्रम का प्रबंधन संभाला

    2. आईएएस/एचसीएस अधिकारी और समिति करेंगे आश्रम का संचालन

    3. गुरुग्राम में 24 एकड़ विवादित जमीन की बिक्री रद हुई

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के आध्यात्मिक और योग गुरु रहे दिवंगत धीरेंद्र ब्रह्मचारी के आश्रम और अपर्णा संस्था को अब प्रदेश सरकार चलाएगी। न्यूनतम दो साल की सेवा वाले आईएएस या पांच साल की सेवा वाले एचसीएस अधिकारी को संस्था का प्रशासक बनाया जाएगा।

    इसके अलावा चार सदस्यीय समिति बनाई जाएगी, जिसमें न्यूनतम एक साल की सेवा वाले प्रथम श्रेणी और दो साल की सेवा वाले द्वितीय श्रेणी अधिकारियों को सदस्य बनाया जाएगा। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव अमित कुमार अग्रवाल ने अपर्णा संस्था (प्रबंधन एवं नियंत्रण का अधिग्रहण) नियम-2026 की अधिसूचना जारी कर दी है।

    प्रदेश सरकार पिछले साल नवंबर में अपर्णा संस्था (प्रबंधन एवं नियंत्रण का अधिग्रहण) अधिनियम- 2025 को लागू कर संस्था का टेकओवर कर चुकी है। आदेशों के मुताबिक संस्था को राष्ट्रीयकृत बैंक में एक अलग खाता खोलना होगा। अनुदान, उपहार और दान सहित सभी आय इसी खाते में जमा की जाएगी। इस धनराशि का उपयोग केवल संस्था के खर्चों के लिए ही किया जा सकेगा। अधिशेष धनराशि को राष्ट्रीयकृत बैंक में सावधि जमा के रूप में रखा जा सकता है।

    गुरुग्राम के सेक्टर 30 के पास स्थित सिलोखरा और सुकराली गांव में आश्रम की 24 एकड़ से अधिक जमीन है, जिसका बाजार मूल्य 2400 करोड़ रुपये है। 1994 में विमान दुर्घटना में ब्रह्मचारी की मृत्यु के बाद आश्रम दो विरोधी गुटों में विभाजित हो गया।

    खबरें और भी

    वर्ष 2020 में बड़ा विवाद हुआ जब 24 एकड़ जमीन की बिक्री का विलेख मात्र 55 करोड़ रुपये में रजिस्टर्ड कर दिया गया। राज्य सरकार की जांच में पाया गया कि जमीन को तीन कंपनियों को बहुत कम कीमत पर बेचा गया था। गुरुग्राम उपायुक्त ने बिक्री विलेख को रद कर दिया, जिसे बाद में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बरकरार रखा।