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    काॅलेजियम की 22 सीटों पर मुकाबला, पंचकूला अग्रवाल सभा में बढ़ सकती है खेमेबाजी; चुनावी गर्मी चरम पर

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 07:05 AM (IST)

    पंचकूला अग्रवाल सभा के कॉलेजियम चुनाव में रविवार को 22 सीटों के लिए मतदान होगा, जबकि 96 सदस्य पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। यह चुनाव न केवल कॉले ...और पढ़ें

    अग्रवाल भवन सेक्टर-16 में सुबह 8 बजे से मतदान शुरु हो जाएगा।

    अग्रवाल भवन सेक्टर-16 में सुबह 8 बजे से मतदान शुरु हो जाएगा।

    HighLights

    1. अग्रवाल सभा कॉलेजियम की 22 सीटों पर मतदान आज।

    2. 96 सदस्य पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं।

    3. प्रधान पद के चुनाव पर भी इन परिणामों का असर।

    राजेश मलकानियां, पंचकूला। अग्रवाल सभा पंचकूला के काॅलेजियम चुनाव में रविवार को 22 सीटों के लिए मतदान होगा। काॅलेजियम के कुल 118 सदस्यों में से 96 सदस्य पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं, जबकि शेष 22 सीटों पर उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला होगा। अग्रवाल भवन सेक्टर-16 में सुबह 8 बजे से मतदान शुरु हो जाएगा।

    वहीं शनिवार देर शाम तक चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवारों को निर्विरोध चुनने के लिए प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों के बीच सहमति बनाने के प्रयास चलते रहे। समाज के कई वरिष्ठ और प्रभावशाली सदस्य भी इस कवायद में जुटे रहे, लेकिन अधिकांश सीटों पर सहमति नहीं बन सकी।

    बताया जा रहा है कि केवल एक सीट पर ही अंतिम समय में आपसी सहमति बन पाई, जबकि बाकी 21 सीटों पर चुनाव होना तय है। ऐसे में रविवार को होने वाला मतदान न केवल काॅलेजियम के शेष सदस्यों का फैसला करेगा, बल्कि इसके परिणामों का असर आगे होने वाले सभा के पदाधिकारियों के चुनाव पर भी देखने को मिल सकता है।

    अग्रवाल सभा के कालेजियम में 118 सदस्यों का निर्वाचन पूरा होने के बाद प्रधान समेत अन्य पदाधिकारियों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

    रिटर्निंग अधिकारी द्वारा कालेजियम सदस्यों के निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी कर इसकी रिपोर्ट जिला रजिस्ट्रार को भेजी जाएगी। इसके बाद नियमानुसार सभा के अन्य पदाधिकारियों के निर्वाचन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

    प्रधान पद को लेकर भी लामबंदी शुरू

    काॅलेजियम चुनाव के साथ ही अग्रवाल सभा के प्रधान पद को लेकर भी अंदरखाने राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। समाज के कई सदस्य इस महत्वपूर्ण पद के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। पिछले दिनों समाज के कुछ वरिष्ठ सदस्यों की बैठक भी हुई थी, जिसमें चुनाव की स्थिति से बचने और आपसी सहमति के आधार पर प्रधान चुनने को लेकर विचार-विमर्श किया गया।

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    बैठक में कथित तौर पर पर्ची सिस्टम के माध्यम से प्रधान का चयन करने का सुझाव भी सामने आया, ताकि चुनाव की नौबत न आए। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर अंदरखाने विरोध के स्वर भी सामने आए।

    कई सदस्यों का मानना है कि कालेजियम के निर्वाचन के बाद निर्वाचित सदस्यों में से अनेक सदस्य प्रधान सहित विभिन्न पदों पर अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। ऐसे में केवल आपसी सहमति से पदाधिकारियों का चयन कर पाना आसान नहीं होगा।

    चुनाव हुआ तो बढ़ेगी सियासी हलचल

    अग्रवाल सभा के चुनाव को लेकर समाज के भीतर इस समय गहमागहमी का माहौल है। काॅलेजियम की 22 सीटों पर होने वाला मतदान यह तय करेगा कि निर्वाचित सदस्यों का संतुलन किस ओर जाता है। यही संतुलन आगे प्रधान और अन्य पदों के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

    समाज में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि यदि प्रधान एवं अन्य पदों के लिए चुनाव की स्थिति बनी तो दोनों पक्ष अपने समर्थक निर्वाचित सदस्यों को शहर से बाहर ले जाने की रणनीति अपना सकते हैं, ताकि मतदान से पहले किसी प्रकार के दबाव, प्रलोभन अथवा पाला बदलने की संभावना को रोका जा सके।

    फिलहाल रविवार का मतदान अग्रवाल सभा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 22 सीटों के परिणाम सामने आने के बाद यह तस्वीर काफी हद तक साफ होगी कि 118 सदस्यीय कालेजियम में किस खेमे का पलड़ा भारी है और प्रधान पद की अगली लड़ाई किस दिशा में जाती है।