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    पंचकूला में निजी जमीन पर बना दिया सरकारी स्कूल, अब मिलेगा मुआवजा या बराबर का प्लाॅट; वर्षों की लड़ाई के बाद Court का फैसला

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 07:05 AM (IST)

    पंचकूला कोर्ट ने हरियाणा सरकार और नगर निगम को रामगढ़ के एक सरकारी स्कूल के लिए निजी जमीन के अवैध कब्जे पर मुआवजा या वैकल्पिक भूमि देने का आदेश दिया है ...और पढ़ें

    23 साल पहले निजी जमीन पर सरकारी स्कूल का निर्माण करा दिया गया था।

    23 साल पहले निजी जमीन पर सरकारी स्कूल का निर्माण करा दिया गया था।

    HighLights

    1. कोर्ट ने निजी जमीन पर स्कूल निर्माण को असंवैधानिक बताया।

    2. सरकार को 6 माह में मुआवजा या वैकल्पिक भूमि देने का आदेश।

    3. 23 साल बाद पीड़ित परिवार को मिला न्याय, स्कूल नहीं हटेगा।

    अंकेश ठाकुर, पंचकूला। एक तरफ हरियाणा सरकार, जिला प्रशासन व नगर निगम सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ इसके बिल्कुल उलट ऐसा मामला सामने आया है जिससे कई तरह के सवाल खड़े हुए हैं।

    आज से 23 साल पहले निजी जमीन पर सरकारी स्कूल का निर्माण कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि बिना भूमि अधिग्रहण और मुआवजा दिए बिना ही स्कूल की इमारत बना दी गई। अब इस मामले में वर्षों चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद पीड़ितों के हक में फैसला आया है।

    सरकारी परियोजनाओं के नाम पर निजी जमीन का इस्तेमाल करने के मामले में पंचकूला जिला अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। रामगढ़ स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल के निर्माण के लिए निजी जमीन का उपयोग किए जाने के मामले में अदालत ने हरियाणा सरकार और नगर निगम पंचकूला को छह माह के भीतर जमीन का कानून के अनुसार अधिग्रहण कर उचित मुआवजा देने या भूमि मालिकों को बराबर की जमीन देना के आदेश दिया है।

    मामले को लेकर पीड़ित परिवार के सदस्य उमेश गुप्ता, रघुनंदन लाल, श्याम लाल, कैलाश चंद व उनके बेटे संजीव व राजीव, राकेश कुमार, राजिंदर कुमार और राजेश कुमार ने वर्ष 2021 में ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी।

    कोर्ट ने दायर अपील स्वीकार करते हुए कहा कि राज्य बिना वैधानिक अधिग्रहण, पंजीकृत हस्तांतरण या मुआवजा दिए किसी नागरिक की निजी संपत्ति पर कब्जा नहीं रख सकता। अदालत ने ट्रायल कोर्ट का फैसले पलटते हुए पीड़ितों के हक में फैसला सुनाया।

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    वर्ष 2003 में हुआ था स्कूल का निर्माण

    वादियों की तरफ से उनका केस लड़ने वाले वकील मनोज अरोड़ा ने अदालत को बताया कि गांव रामगढ़ में उक्त परिवार के सदस्यों की दो मरला जमीन पर वर्ष 2003 में सरकारी प्राइमरी स्कूल का निर्माण कर दिया गया था।

    न तो जमीन का अधिग्रहण किया गया और न ही बदले में कोई मुआवजा या वैकल्पिक भूखंड दिया गया। वर्ष 2018 में कराई गई पैमाइश के दौरान उन्हें पहली बार पता चला कि उनकी जमीन स्कूल परिसर का हिस्सा बन चुकी है। इसके बाद उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

    राजस्व रिकाॅर्ड में भी वादियों के नाम निकली जमीन

    अदालत ने पाया कि राजस्व रिकार्ड में संबंधित जमीन वादियों के नाम है। वहीं सरकार और नगर निगम यह साबित नहीं कर सके कि भूमि का विधिसम्मत अधिग्रहण या हस्तांतरण किया गया था।

    अदालत ने यह भी कहा कि केवल ग्राम पंचायत के कथित प्रस्ताव के आधार पर किसी निजी व्यक्ति के स्वामित्व अधिकार समाप्त नहीं किए जा सकते, खासकर जब उस प्रस्ताव का विधिक प्रमाण भी प्रस्तुत नहीं किया गया हो।

    स्कूल को नहीं हटाया जा सकता: अदालत

    हालांकि अदालत ने यह भी माना कि सरकारी प्राइमरी स्कूल वर्षों से संचालित हो रहा है और उसे हटाया नहीं जा सकता। इसी कारण अदालत ने सरकार को कानून के अनुसार भूमि का अधिग्रहण कर मुआवजा अथवा वैकल्पिक भूखंड उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।