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    पंचकूला में 35 साल से हक की लड़ाई, करोड़ों रुपये जमा, अलाॅटमेंट लेटर मिले; फिर भी एक इंच जमीन नहीं मिली

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 08:04 PM (IST)

    पंचकूला की राजीव और इंदिरा कॉलोनी के निवासियों ने 35 साल से लंबित प्लॉट आवंटन को लेकर एचएसवीपी मुख्यालय का घेराव किया। करोड़ों रुपये जमा कराने और आवंट ...और पढ़ें

    हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण मुख्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया।

    हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण मुख्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया।

    HighLights

    1. राजीव-इंदिरा कॉलोनी निवासियों ने का फूटा गुस्सा।

    2. 35 साल से लंबित प्लॉट आवंटन को लेकर प्रदर्शन।

    3.  एचएसवीपी मुख्यालय का घेराव करने पहुंचे।

    जागरण संवाददाता, पंचकूला। करीब 35 साल से अपने आशियाने का सपना संजोए बैठे राजीव और इंदिरा काॅलोनी के सैकड़ों गरीब परिवारों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। सोमवार को बड़ी संख्या में काॅलोनीवासी हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) मुख्यालय, सेक्टर-6 पहुंच गए और मुख्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया।

    हाथों में ज्ञापन और दिल में वर्षों का दर्द लिए प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि यदि अब भी प्लाटों का कब्जा नहीं मिला तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

    प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व पार्षद उषा रानी, प्रेम कुमार और रामप्रसाद ने किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य प्रशासक के नाम सौंपे ज्ञापन में कहा कि 1994 में तत्कालीन हरियाणा सरकार ने राजीव और इंदिरा काॅलोनी के गरीब परिवारों को पुनर्वास के तहत एक-एक मरले के प्लाॅट देने की योजना बनाई थी।

    उस समय प्रति परिवार 10 हजार रुपये जमा कराए गए और विभाग ने बाकायदा सर्वे कर 5,533 झुग्गियों का सत्यापन किया। इनमें 4,149 परिवार पात्र पाए गए, जबकि 2,756 परिवारों ने विभाग के खाते में निर्धारित राशि जमा करा दी। बाद में भी सैकड़ों परिवारों ने विभाग के निर्देश पर अलग-अलग किस्तों में पैसे जमा करवाए।

    गरीबों की किस्मत नहीं बदली

    प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकारें बदलती रहीं, अधिकारी बदलते रहे, लेकिन गरीबों की किस्मत नहीं बदली। वर्ष 2000 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने भी जल्द कब्जा देने की घोषणा की थी, लेकिन वह भी सिर्फ घोषणा बनकर रह गई। इसके बाद वर्ष 2009-10 में बायोमैट्रिक सर्वे के नाम पर दोबारा गरीबों को बुलाया गया और आशियाना योजना के तहत लाखों रुपये जमा करा लिए गए।

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    कॉलोनीवासियों का आरोप है कि बाद में सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में स्पष्ट हुआ कि यह योजना राजीव और इंदिरा कालोनी पर लागू ही नहीं होती थी। इसके बावजूद अधिकारियों ने गरीब मजदूरों से पैसे जमा करवा लिए।

    प्लाॅट पर कब्जा नहीं मिला

    प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि विभाग के पास करोड़ों रुपये जमा हैं, लेकिन आज तक किसी भी पात्र परिवार को जमीन का वास्तविक कब्जा नहीं दिया गया। यहां तक कि 306 परिवारों को आवंटन पत्र (अलाटमेंट लेटर) जारी किए गए, लेकिन उन्हें भी प्लाॅट पर कब्जा नहीं मिल सका।

    लोगों ने सवाल उठाया कि जब सरकार पैसे ले चुकी है और आवंटन पत्र भी जारी कर चुकी है, तो आखिर गरीबों को उनका अधिकार क्यों नहीं दिया जा रहा।

    उषा रानी ने कहा कि राजीव और इंदिरा काॅलोनी में रहने वाले अधिकांश परिवार दिहाड़ी मजदूर हैं, जिन्होंने अपने बच्चों का पेट काटकर सरकार की योजना में पैसा जमा कराया था। आज कई आवेदकों की उम्र ढल चुकी है, कई लोग इस दुनिया से चले गए, लेकिन उनका आशियाना आज भी अधूरा है।

    तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगे

    प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि जहां पहले से पुनर्वास के लिए जमीन चिन्हित की गई थी और जो आज भी खाली पड़ी है, वहां तुरंत प्लॉटों का कब्जा दिया जाए।

    साथ ही उन्होंने मांग रखी कि जब तक सभी पात्र परिवारों को प्लॉट नहीं मिल जाते, तब तक पीएमडीए द्वारा कालोनियों में किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो बड़ा आंदोलन होगा।