'26 वर्ष का बेदाग सेवा रिकाॅर्ड...' IAS पंकज अग्रवाल की दलील, CBI का जवाब-घोटाले के पैसों से मौज की; जमानत याचिका खारिज
पंचकूला स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने पूर्व आईएएस पंकज अग्रवाल की 645 करोड़ के आईडीएफसी घोटाले में जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने इसे सार्वजनिक धन की ...और पढ़ें

करोड़ों के घोटाले में पूर्व आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ीं।
HighLights
पंचकूला स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने खारिज की याचिका।
645 करोड़ के आईडीएफसी घोटाले से जुड़ा मामला।
सीबीआई कोर्ट ने आर्थिक अपराध को गंभीर बताया।
अंकेश ठाकुर, पंचकूला। हरियाणा के बहुचर्चित करीब 645 करोड़ के सरकारी फंड घोटाले में गिरफ्तार पूर्व आईएएस अधिकारी एवं हरियाणा के पूर्व प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल को जमानत नहीं मिली है। जमानत के लिए बचाव पक्ष ने 26 वर्ष का बेदाग सेवा रिकाॅर्ड की दलील दी। वहीं, सीबीआई ने घोटाले के पैसों से मौज करने की बात कही।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने पंकज अग्रवाल की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। बुधवार को याचिका पर अंतिम सुनवाई के दौरान अदालत ने वीरवार के लिए फैसला सुरक्षित रखा था।
अदालत ने कहा कि मामला बड़े पैमाने पर सार्वजनिक धन की कथित हेराफेरी से जुड़ा आर्थिक अपराध है, जिसकी गंभीरता को हल्के में नहीं लिया जा सकता। इस तरह के आर्थिक अपराध के मामलों का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। ऐसे मामलों में जमानत पर विचार करते समय गंभीर अपराधों जैसा ही दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
मास्टरमाइंड का करीबी
जांच एजेंसी (सीबीआई) ने याचिका का विरोध करते दायर जवाब में आरोप लगाया कि पंकज अग्रवाल घोटाले के मास्टरमाइंड और चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व अधिकारी रिभव ऋषि का करीबी था। वह रिभव रिषी के घोटाले के पैसों से मौज कर रहा था। इतना ही नहीं पंकज अग्रवाल ने उनसे आर्थिक और अन्य अनुचित लाभ प्राप्त किए।
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बैंक में खाते खुलवाने में भूमिका
सीबीआई के अनुसार, जांच में सामने आया कि स्कूल शिक्षा विभाग और बाद में (एचएसएएमबी) में प्रधान सचिव रहते हुए पंकज अग्रवाल ने कथित रूप से सरकारी नियमों को दरकिनार कर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खाते खुलवाने में भूमिका निभाई।
इन्हीं खातों से लगभग 60 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी हुई, जबकि पूरे मामले में विभिन्न विभागों के करीब 645 करोड़ रुपये की हेराफेरी की जांच चल रही है।
मनी ट्रेल नहीं मिला : बचाव पक्ष
बचाव पक्ष ने दलील दी कि पंकज अग्रवाल का 26 वर्ष का बेदाग सेवा रिकाॅर्ड है, उनके खिलाफ कोई धन की बरामदगी या मनी ट्रेल नहीं मिला और उन्होंने केवल प्रशासनिक मंजूरी दी थी।
सीबीआई ने दावा किया कि आरोपित ने विशेष बैंक को लाभ पहुंचाने के लिए प्रभाव डाला, सह-आरोपितों से लगातार संपर्क में रहे और जांच में डिजिटल साक्ष्यों से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
23 जून को हुई थी गिरफ्तारी
सीबीआई ने वरिष्ठ आइएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को 23 जून 2026 को गिरफ्तार किया था। उल्लेखनीय है कि करोड़ों रुपये के इस चर्चित बैंक घोटाले की सीबीआई लगातार जांच कर रही है और मामले में कई आरोपितों से पूछताछ की जा चुकी है। जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन और कथित अनियमितताओं की विभिन्न कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।
सरकारी प्रक्रिया का पालन नहीं किया
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन का आरोप है कि आरोपित ने खाते खुलवाने में प्रभाव का इस्तेमाल किया, सरकारी प्रक्रिया का पालन नहीं किया और कथित मुख्य साजिशकर्ता के संपर्क में रहा। जांच के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्यों और अन्य सामग्री की सत्यता का परीक्षण ट्रायल में होगा, लेकिन इस स्तर पर उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।