हरियाणा के जींद और करनाल सहित पांच जिलों को NCR से बाहर करने की तैयारी, 16 जून को होगी अहम बैठक
हरियाणा के करनाल, जींद सहित पांच जिले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से बाहर हो सकते हैं, जिस पर 16 जून को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में चर्चा ...और पढ़ें
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हरियाणा के पांच जिलों को NCR से बाहर करने की तैयारी। फोटो एआई की मदद से बनाई गई है
HighLights
करनाल, जींद सहित पांच जिले एनसीआर से होंगे बाहर।
एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की 16 जून को होगी अहम बैठक।
दिल्ली से 100 किमी तक सीमित होगी एनसीआर की सीमा।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा के करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी जिले का बड़े क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से बाहर निकल सकता है। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की 16 जून को होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी।
राष्ट्रीय राजधानी से 100 किलोमीटर परिधि से बाहर के जिलों को एनसीआर से बाहर करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल (वर्तमान में केंद्रीय ऊर्जा तथा आवास एवं शहरी मामले मंत्री) ने प्रयास शुरू किए थे, जिस पर अगले सप्ताह होने वाली बैठक में बात आगे बढ़ सकती है। रीजनल प्लान-2041 के तहत एनसीआर सीमा को नए सिरे से तय करने का प्रस्ताव है।
एनसीआर की सीमा दिल्ली से 100 किलोमीटर के दायरे तक सीमित
हरियाणा सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली तो राज्य का एनसीआर क्षेत्र करीब 60 प्रतिशत तक सिमट सकता है। बैठक के मसौदे में प्रस्ताव है कि एनसीआर की सीमा दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर के दायरे तक सीमित की जाए। अभी हरियाणा के 14 जिले किसी न किसी रूप में एनसीआर का हिस्सा हैं, जिसका कुल क्षेत्रफल 25 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक है। नए फार्मूले के लागू होने पर यह क्षेत्र घटकर करीब 10.5 हजार वर्ग किलोमीटर तक रह सकता है।
उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने उन तहसीलों को भी एनसीआर में शामिल रखने का सुझाव दिया है, जिनका कुछ हिस्सा 100 किलोमीटर की सीमा में आता है, जबकि हरियाणा का तर्क है कि केवल एनसीआर की सीमा में पूरी तरह आने वाली तहसीलों को ही रखा जाए।
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एनसीआर के मौजूदा ढांचे की समीक्षा की जरूरत
तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठकों में यह मुद्दा उठाया था कि दिल्ली से काफी दूर स्थित जिलों को एनसीआर में बनाए रखना व्यावहारिक चुनौतियां पैदा कर रहा है। विधानसभा में भी उन्होंने एनसीआर के मौजूदा ढांचे की समीक्षा की जरूरत बताई थी। अब वही सोच रीजनल प्लान-2041 के जरिए औपचारिक रूप ले सकती है।
वहीं, हरियाणा सरकार ने 11 राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर चौड़ा कारिडोर एनसीआर में बनाए रखने की सिफारिश की है। इससे उन इलाकों को बचाने की कोशिश होगी जो सड़क नेटवर्क और आर्थिक गतिविधियों के जरिए दिल्ली क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। इस व्यवस्था से पानीपत और करनाल जैसे क्षेत्रों को कुछ राहत मिलने की संभावना मानी जा रही है।
एनसीआर से विभिन्न क्षेत्रों को इसलिए बाहर कराना चाहती प्रदेश सरकार
एनसीआर में शामिल जिलों पर कई अतिरिक्त प्रतिबंध लागू होते हैं। वायु प्रदूषण से निपटने के लिए लगाई जाने वाली पाबंदियों का असर उन जिलों तक पहुंचता रहा है जो दिल्ली के वास्तविक प्रभाव क्षेत्र से काफी दूर हैं। निर्माण गतिविधियों, उद्योग और अन्य आर्थिक गतिविधियों पर इसका प्रभाव पड़ता है।
राज्य सरकार का तर्क है कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार विकास की अधिक स्वतंत्रता भी जरूरी है। अगर सीमा पुनर्गठन लागू होता है तो असर केवल एनसीआर टैग हटने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग, भविष्य के क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क, रेल कनेक्टिविटी और निवेश योजनाओं की प्राथमिकताएं भी प्रभावित हो सकती हैं। रियल एस्टेट और औद्योगिक निवेश की दिशा भी नए सिरे से तय होगी।