हरियाणा: गर्भवती पत्नी को बेरहमी से पीटा, पति को जमानत देते हुए कोर्ट ने कहा, 'शराब की लत छोड़कर परिवार संभालें'
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने गर्भवती पत्नी से मारपीट के आरोपित पति को नियमित जमानत दी है। ...और पढ़ें

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो
HighLights
गर्भवती पत्नी से मारपीट के आरोपित पति को जमानत
कोर्ट ने शराब छोड़ने, परिवार संभालने की सलाह दी
पत्नी पर लिंग जांच के लिए दबाव बनाने का आरोप
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने गर्भवती पत्नी से कथित रूप से मारपीट करने के आरोपित पति को नियमित जमानत प्रदान की है। अदालत ने जमानत देते समय आरोपित को शराब की लत छोड़ने और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने की सलाह दी।
फरीदाबाद निवासी पत्नी ने आरोप लगाया है कि उसका पति तीसरी बेटी नहीं चाहता था। उसने अवैध रूप से भ्रूण का लिंग जानने के लिए दबाव बनाया और जब पत्नी ने इन्कार किया, तो उसने उसके बाल पकड़कर दीवार से सिर टकराया, लात-घूंसों से पीटा और सब्जी काटने वाले चाकू से उसके हाथों पर वार किया।
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि दंपती की शादी 2019 में हुई थी और उनके दो बच्चे हैं। घटना के समय महिला लगभग तीन माह की गर्भवती थी।
पत्नी ने अपनी शिकायत में कहा कि उसका पति शराब पीकर अक्सर मारपीट करता था और इस बार वह गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग जानने के लिए लगातार दबाव बना रहा था। जब उसने कानून का हवाला देते हुए लिंग जांच कराने से मना किया, तो आरोपित ने उसके साथ बर्बरता की।
महिला के शरीर पर 11 चोटों के निशान
हरियाणा सरकार ने अदालत को बताया कि मेडिकल जांच में महिला के शरीर पर 11 चोटों के निशान पाए गए। आरोप है कि पति कन्या भ्रूण होने की आशंका के कारण गर्भपात कराना चाहता था और इसी मंशा से लिंग जांच कराने का दबाव बना रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने जमानत का विरोध किया।
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हाईकोर्ट ने कहा कि आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर हैं और यदि मुकदमे में साबित होते हैं, तो आरोपित का व्यवहार अत्यंत निंदनीय माना जाएगा। हालांकि, आरोपित 21 अप्रैल 2026 से न्यायिक हिरासत में है, पुलिस जांच पूरी हो चुकी है और मुकदमे के जल्द समाप्त होने की संभावना नहीं है। ऐसे में नियमित जमानत दी जा सकती है।
परिवार के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाए: अदालत
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि आरोपित को शराब की लत छोड़ने के लिए गंभीर प्रयास करने चाहिए और अपनी गर्भवती पत्नी, बच्चों तथा वृद्ध मां के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निस्तारण तक सीमित हैं और ट्रायल कोर्ट मामले का फैसला उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्वतंत्र रूप से करेगा।