पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला, हत्या के दो दोषियों की सजा पर रोक; बस एक महीने तक अस्पताल में करनी होगी सेवा
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हत्या के दो दोषियों, नवीन और प्रवीण, की सजा निलंबित कर दी है। उन्हें अपील लंबित रहने तक गुरुग्राम सिविल अस्पताल में एक ...और पढ़ें

हत्या के दो दोषियों की सजा पर रोक, एक माह तक मरीजों की सेवा करने का आदेश।
HighLights
हाई कोर्ट ने हत्या के दो दोषियों की सजा निलंबित की।
दोषियों को गुरुग्राम सिविल अस्पताल में सामुदायिक सेवा का आदेश।
एक माह तक मरीजों और घायलों की देखभाल करेंगे।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हत्या के दो दोषियों की अपील लंबित रहने तक उनकी सजा निलंबित करते हुए उन्हें सशर्त राहत दी है। अदालत ने दोनों को रिहाई के बाद एक माह तक गुरुग्राम के सिविल अस्पताल में सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया है। इस दौरान उन्हें अलग-अलग शिफ्ट में घायल और मरीजों की देखभाल सहित अस्पताल प्रशासन द्वारा सौंपे जाने वाले अन्य कार्य करने होंगे।
साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि उनके आचरण या कार्य को लेकर कोई शिकायत मिली अथवा वे किसी अन्य आपराधिक मामले में शामिल पाए गए तो सजा निलंबन का आदेश तत्काल वापस लिया जा सकता है। जस्टिस विनोद एस भारद्वाज और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने आदेश में कहा कि आवेदक-अपीलकर्ता अपनी रिहाई की तारीख से एक माह तक अलग-अलग शिफ्टों में सामुदायिक सेवा करेंगे। वे गुरुग्राम सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा सौंपे गए सभी सामान्य कार्यों के साथ-साथ घायलों और मरीजों की देखभाल से संबंधित कार्य भी करेंगे।
यह आदेश नवीन उर्फ भोला और प्रवीण की ओर से दायर उन अर्जियों पर दिया गया, जिनमें उनकी आपराधिक अपीलों के लंबित रहने तक सजा निलंबित करने की मांग की गई थी। अपीलकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि 21 फरवरी 2020 की घटना में घायल हुए गुड्डू का सफदरजंग अस्पताल में आपरेशन हुआ था और 28 फरवरी 2020 को उन्हें स्थिर हालत में छुट्टी दे दी गई थी। इसके बाद वह बिहार स्थित अपने गांव चले गए, जहां छह अप्रैल 2020 को उनकी मृत्यु हो गई। पोस्टमार्टम के अनुसार मृत्यु का कारण सेप्टीसीमिया, टाक्सीमिया और शाक था।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मृत्यु चोट का प्रत्यक्ष परिणाम नहीं थी, बल्कि उपचार के बाद आवश्यक सावधानी नहीं बरतने के कारण हुई। इस संबंध में मृतक के भाई एवं अभियोजन गवाह टिंकू कुमार के बयान का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया कि गांव लौटने के बाद मृतक ने फिर से खेती का काम शुरू कर दिया और शराब का सेवन भी करने लगा, जिससे उसकी स्थिति बिगड़ गई और सेप्टीसीमिया हो गया।
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इसी आधार पर दलील दी गई कि यह विचारणीय प्रश्न है कि क्या अपीलकर्ताओं को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराया जा सकता है। तीन अगस्त 2026 के हिरासत प्रमाणपत्र के अनुसार नवीन उर्फ भोला करीब नौ माह 29 दिन और प्रवीण एक वर्ष नौ माह 21 दिन की सजा काट चुके हैं।
बचाव पक्ष ने यह भी स्वीकार किया कि दोनों के कुछ आपराधिक मामले पूर्व से दर्ज हैं, लेकिन भरोसा दिलाया कि वे भविष्य में किसी अपराध में शामिल नहीं होंगे। साथ ही स्वयं प्रस्ताव रखा कि दोनों गुरुग्राम सिविल अस्पताल में सामुदायिक सेवा देने को तैयार हैं।
हरियाणा सरकार की ओर से कहा कि दोषियों द्वारा अब तक काटी गई सजा अपेक्षाकृत कम है। हालांकि उन्होंने इस तथ्य का विरोध नहीं किया कि मृतक की अस्पताल से छुट्टी के एक माह से अधिक समय बाद मृत्यु हुई, छुट्टी के समय उसकी हालत स्थिर थी और मृत्यु का कारण सेप्टीसीमिया बताया गया था।
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने दोनों की सजा निलंबित करते हुए उन्हें संबंधित इलाका मजिस्ट्रेट/मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के अनुसार जमानत मुचलका भरने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि दोनों शपथपत्र देकर यह वचन देंगे कि वे किसी अन्य अपराध में शामिल नहीं होंगे। अदालत ने सामुदायिक सेवा पूरी होने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी/सिविल सर्जन से अनुपालन रिपोर्ट भी तलब की है।